भारंगी के औषधीय गुण ,फायदे और नुकसान | Bharangi Benefits And Side Effects In Hindi

Last Updated on December 5, 2019 by admin

भारंगी क्या है ? : Bharangi in Hindi

भारंगी एक ऐसी वनस्पति है जिसका उपयोग, वैद्यगण अति प्राचीन काल से श्वास, कास, अस्थमा आदि रोगों की चिकित्सा में करते आ रहे हैं। यह वनस्पति ज्यादा प्रसिद्ध एवं सुपरिचित नहीं है । वैद्य गण इसका उपयोग काढ़े में करते आ रहे हैं। इस वनस्पति की जड़ उपयोग में ली जाती है।

भारंगी का विभिन्न भाषाओं में नाम : Name of Bharangi in Different Languages

Bharangi in –

संस्कृत (Sanskrit) – अंगारवल्लरी, भारंगी
हिन्दी (Hindi) – भारंगी
गुजराती (Gujarati) – भारुंगी
बंगला (Bengali) – बामनहाटी, भुइजाम
तेलगु (Telugu) – भारंगी, नाल निरेदू
कन्नड़ (Kannada) – गंटु ,भारंगी
तामिल (Tamil) – चेरु टेकु, अंगारवल्लरी
मलयालम (Malayalam) – कंक ,भरनी
उर्दू (Urdu) – भारंगी
नेपाली (Nepali) – चूआ
पंजाबी (Punjabi) – भाउंगी
फ़ारसी (Farsi) – हञ्जिका
लैटिन (Latin) – क्लेरोडेण्ड्रोन सेरेटम (Clerodandron serratum)

भारंगी के औषधीय गुण : Medicinal Properties of Bharangi in Hindi

यह गर्म, कफनाशक, श्वास कष्ट मिटाने वाली, वातनाशक, जठराग्नि बढ़ाने वाली, पाचन करने वाली, शोथ नाशक, रुचिकर, हलकी, रूखी, कसैली तथा गुल्म, रक्त विकार, कफ प्रकोप शान्त करने वाली वनस्पति है।

भारंगी का रासायनिक संघटन : Chemical composition of Bharangi in Hindi

इसकी जड़ की छाल में एक फेनोलिक ग्लाइकोसाइड तथा सेपोनिन का पता चला है। सेपोनिन में हिस्टेमिन- उत्सर्जक तथा कोलिनेस्टरेज क्रियाविरोधी गुण पाये गये हैं। पौधे के घन सत्व में हिस्टेमिन-प्रतिरोधी क्रिया पाई गई है।

भारंगी के उपयोग : Bharangi Uses in Hindi

☛ कर्नल चोपड़ा के मतानुसार भारंगी की जड़ का उपयोग श्वास, कफ, खांसी और कण्ठमाल में लाभकारी सिद्ध हुआ है।
☛ डॉ. कोमान के मतानुसार इस वनस्पति की जड़ का उपयोग सन्धिवात, अम्ल पित्त, अग्निमांद्य और जुकाम के प्रभाव से पैदा हुई फुफ्फुस की विकृति को दूर करने में सफल सिद्ध हुआ है।
☛ इस वनस्पति का उपयोग प्राचीन काल से किया जा रहा है और इसका प्रमाण यह है कि इसका उल्लेख चरक और सुश्रुत संहिताओं में मिलता है।
यहां घरेलू इलाज में उपयोगी भारंगी की जड़ के कुछ घरेलू उपयोगों की जानकारी प्रस्तुत की जा रही है।

रोग उपचार में भारंगी के फायदे : Bharangi Benefits in Hindi

कफज ज्वर में भारंगी के प्रयोग से लाभ (Bharangi Benefits in Fever Treatment in Hindi)

सर्दी, जुकाम के साथ बुखार हो, शरीर में जकड़न और भारीपन हो, आलस्य हो, भूख प्यास खत्म हो गई है, पेट में भारीपन हो, पसीना न आता हो और ज्वर 101 डिग्री तक बढ़ जाता हो तो भारंगी की जड़ का चूर्ण और दशमूल का चूर्ण- दोनों आधा-आधा चम्मच एक गिलास पानी में डाल कर उबालें। जब पानी आधा कप रह जाए तब उतार कर छान लें और ठण्डा करके एक चम्मच शहद डाल कर पी जाएं।

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वात जन्य खांसी में भारंगी से फायदा (Benefits of Bharangi in Cough Treatment in Hindi)

भारंगी से बना भारंग्यादि घृत 1-1 चम्मच सुबह शाम दूध में डाल कर पीने से सूखी वात जन्य खांसी ठीक हो जाती है।

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भारंगी के इस्तेमाल से कफ जन्य खांसी में लाभ (Bharangi Cures Cough in Hindi)

भारंगी की जड़ और सोंठ का चूर्ण आधा-आधा चम्मच मिला कर, गर्म पानी के साथ फांकने से कफ युक्त गीली खांसी ठीक होती है।

कफ युक्त श्वास रोग में भारंगी का उपयोग लाभदायक (Bharangi Uses to Cures Asthma in Hindi)

  • कफ युक्त गीली खांसी के साथ दमा रोग भी हो तो भारंगी की जड़ 10 ग्राम, सोंठ 3 ग्राम मिला कर काढ़ा करें। काढ़ा तैयार हो जाए तब उतार कर ठण्डा कर लें और बिल्कुल ठण्डा हो जाए तब एक चम्मच शहद घोल कर पीने से छाती में जमा कफ निकल जाता है और खांसी एवं दमा रोग में आराम होता है।
  • दूसरा नुस्खा- भारंगी, सोंठ, कटेली की जड़ और कुल्थी 5-5 ग्राम और मूली का रस दो चम्मच, दो कप पानी में डाल कर, काढ़ा बना कर छान लें। इसमें पीपर चूर्ण आधा ग्राम डाल कर पीने से, गीली कफ युक्त खांसी और दमा रोग में आराम होता है।

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दमे का दौरा कम करने में भारंगी करता है मदद (Bharangi Benefits in Asthma attack in Hindi)

दमा के रोगी को जब दमे का दौरा पड़ता है तब उसे बहुत कष्ट होता है। ऐसी स्थिति में, भारंगी की जड़ का महीन कपड़ छन चूर्ण 2-3 रत्ती मात्रा में, शहद के साथ मिला कर आधा आधा घण्टे से चाटने से कष्ट कम होता है और घबराहट दूर होती है।

हिचकी बंद करे भारंगी का उपयोग (Bharangi Cures Hiccup in Hindi)

हिचकी चलना बन्द हो तो इसे हिक्का रोग कहते हैं। भारंगी की जड़ का चूर्ण 1. 1 ग्राम, शहद के साथ दिन में 3-4 बार चाटने से हिचकी चलना बन्द होता है।

पेट के कीड़े नष्ट करता है भारंगी का सेवन (Bharangi Uses in Intestinal Worms in Hindi)

भारंगी के पत्तों को उबाल कर छान लें। इसे सुबह शाम आधा-आधा कप पीने से पेट के छोटे छोटे कीड़े नष्ट हो जाते हैं।

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चूहे का विष मिटाए भारंगी का उपयोग (Bharangi Cures Rat Poisoning in Hindi)

चूहा काट ले तो भारंगी की जड़ को पानी में घिस कर दो चम्मच पानी में मिला कर पिएं। यदि त्वचा पर रक्त विकार के धब्बे हो जाएं तो जड़ के 5 ग्राम चूर्ण को एक गिलास पानी में 10-15 मिनिट तक उबाल कर ढक दें। आधा घण्टे बाद छान लें। इस पानी को शरीर पर लगा कर मसलें। गाय का दूध पिएं। भोजन में सिर्फ दूध और चावल खाएं। नमक, नमकीन पदार्थ शाक दाल आदि न खाएं। 4-5 दिन में चूहे के विष का प्रभाव समाप्त हो जाएगा।

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वातज सिर दर्द में भारंगी के इस्तेमाल से लाभ (Benefits of Bharangi in Headache Treatment in Hindi)

वात प्रकोप (गैस) के प्रभाव और दबाव से सिर दर्द होने लगता है।
चोट लगने या तेज़ वायु के आघात से सिर दर्द होने लगता है। भारंगी की जड़ पानी के साथ पत्थर पर घिस कर चन्दन जैसा लेप तैयार कर लें। इसे थोड़ा गरम करके माथे, सिर के बालों में और पैरों के तलवों पर लगा कर मसलें। सिर दर्द दूर हो जाएगा।

प्रसूता स्त्री का सिर दर्द दूरकरने के लिए भारंगी की जड़ और तगर को घिस कर लेप तैयार करें और गले, कपाल तथा आंखों की पलकों पर यह लेप लगाने से वातजन्य सिर दर्द ठीक हो जाता है।

रक्त गुल्म में भारंगी का उपयोग फायदेमंद (Bharangi Uses to Cure Hematoma in Hindi)

स्त्रियों के गर्भाशय में होने वाला रक्त गुल्म यदि ज्यादा बड़ा न हो तो भारंगी की जड़, पीपल, करंज की छाल, पीपलामूल और देवदारु- यह 50-50 ग्राम ले कर कूट पीस कर बारीक महीन चूर्ण कर लें। यह चूर्ण आधा-आधा चम्मच सुबह शाम, तिल्ली के काढ़े के साथ पीने से रक्त गुल्म समाप्त हो जाता है।

बच्चों की खांसी में भारंगी के सेवन से लाभ (Bharangi Uses to Cure Children’s cough in Hindi)

भारंगी, रास्ना और . काकड़ा सिंगी- तीनों 10-10 ग्राम ले कर बारीक पीस कर महीन चूर्ण करके मिला लें। सुबह शाम 1-1 रत्ती चूर्ण, ज़रा से शहद में मिला कर चटाने से बालकों की खांसी ठीक हो जाती है।

रक्त स्राव बंद करने में फायदेमंद भारंगी के औषधीय गुण (Bharangi Uses to Stop Bleeding in Hindi)

चोट लगने से होने वाले रक्त स्राव को रोकने के लिए भारंगी की जड़ को जल में घिस कर लेप लगाने से रक्त का बहना बन्द हो जाता है।

भारंगी के नुकसान : Side Effect of Bharangi in Hindi

आवश्यकता से अधिक मात्रा में और अधिक समय तक भारंगी का सेवन करने से वमन (उल्टी) तथा दस्त लग सकते है ।

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