दशांग लेप के फायदे गुण उपयोग और नुकसान – Dashang Lepa Benefits and Side Effects in Hindi

दशांग लेप क्या है ? (What is Dashang Lepa in Hindi)

आयुर्वेद में कई योगों को चमत्कारिक योगों के रूप में जाना जाता रहा है। यह दशांग लेप भी उनमें से एक है। जिन्होंने एक बार भी इसका प्रयोग किया वह प्रभावित हुए बिना नहीं रहे। दशांग लेप चोट खाए, घायल, ज्वर और चर्मरोग पीड़ितों के लिए संजीवनी जैसा ही है।

दशांग चूर्ण लेप हर्बल पेस्ट फॉर्म में आयुर्वेदिक दवा है। इसका उपयोग हर्पस घावों, त्वचा रोगों, बुखार और सूजन के इलाज के लिए बाहरी अनुप्रयोग के रूप में किया जाता है। इसका उपयोग बुखार, सिरदर्द, एक्जिमा, हर्पस घाव, गर्मी के चकत्ते आदि जैसे आयुर्वेदिक उपचार में किया जाता है। इसे घी के साथ पेस्ट में बनाया जाता है और स्थानीय रूप से लागू किया जाता है।

दशांग लेप के घटक द्रव्य (Dashang Lepa Ingredients in Hindi)

  • जटामांसी
  • सिरस की छाल
  • मुलहठी
  • तगर
  • लाल चन्दन
  • इलायची
  • हल्दी
  • दारुहल्दी
  • कूठ
  • खस सभी समान मात्रा में।

दशांग लेप बनाने की विधि (Preparation Method of Dashang Lepa in Hindi)

सब द्रव्यों को कूट पीस कर महीन चूर्ण करके मिला लें और तीन बार छान लें ताकि सब द्रव्य ठीक से मिल कर एक जान हो जाएं। लेप के लिए चुर्ण तैयार है।

दशांग लेप उपयोग विधि –

एक चम्मच चूर्ण पानी में घोंट पीस कर गाढ़ा लेप बनाएं। इसमें 56 बूंद शुद्ध घी टपका कर अच्छी तरह फेंट कर मिला लें । इस लेप को गाढ़ा-गाढ़ा लगा कर ऊपर से साफ़ रूई रख कर पट्टी बांध दें। यह लेप सुबह-शाम लगाएं।

दशांग लेप के उपयोग (Dashang Lepa Uses in Hindi)

दशांग लेप के चमत्कारिक प्रयोग –

अचानक चोट लग गई है या मोच आ गई है, आपको ज्ञात नहीं है शायद हड्डी टूट गई हो, डॉक्टर के पास जाने से पहले ही लेप को दो-चार बूंद घी या तेल और थोड़ा पानी मिलाकर हलवे की तरह हल्का पकाएँ और चोट के स्थान पर बाँध दें। थोड़ी देर में दर्द मिट जाएगा।

यदि हड्डी न टूटी हो तो दिन में दो बार प्रातःसायं ऐसे ही लेप बनाकर बाँधते रहें, किसी भी दवा या लेप आदि से अधिक लाभ मिलेगा।

यदि चोट के साथ त्वचा फटने से खून भी आ गया हो तो घबराने की बात ‘ नहीं, इसका लेप इंफेक्शन नहीं होने देगा। घाव जल्दी भरेगा और सूजन भी जल्द मिट जाएगी। आजमाकर देखें।

हड्डी टूट जाने पर भी उसे ठीक से जोड़कर, बिठाकर लेप की पट्टी बाँधते रहने से दर्द भी नहीं रहेगा और हड्डी भी जल्दी जुड़ जाएगी। इसमें यह सावधानी आवश्यक है कि यदि हड्डी सही जोड़ पर नहीं बैठी तो वैसी ही जुड़ जाती है, इससे हो सकता है टेढ़ापन रह जाए। इसलिए एक्स-रे द्वारा सुनिश्चित करना चाहिए और अस्थि विशेषज्ञ से राय लेनी चाहिए।

दशांग लेप के फायदे (Dashang Lepa Benefits in Hindi)

दशांग लेप के फायदे निम्नलिखित हैं-

1). चोट – चोट लगने पर, खून निकलने पर दशांग का लेप लगाएँ। इस लेप में थोड़ा ज़्यादा ही घी मिलाएँ ताकि लेप सूखे नहीं। लेप कपड़े पर रखकर पट्टी बाँधे, खून बहना बंद हो जाएगा। रोज़ बाँधते रहने से घाव भी ज़ल्दी भरेगा।

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2). वात रोग – संधिवात या आमवात आदि वात रोग से जोड़ों में सूजन और दर्द हो तो लेप में 5 प्रतिशत तक कोई वात शामक, थोड़ा पानी मिलाकर हलवे की तरह पकाएँ और चोट के स्थान पर बाँध दें। जितना गर्म सह पाएँ उतना ही गर्म लगाएँ, ज़्यादा गर्म न लगाएँ (दिन में दो बार प्रातः सायं)। कुछ दिन में ही आराम होगा।

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3). सूजन – अधिक चलने, खड़े रहने आदि से पैरों में सूजन और दर्द हो तो दशांग को पानी में उबालें। जब पानी थोड़ा ठंडा होकर सहने योग्य हो जाए तो पैरों को इस पानी में डालकर बैठ जाएँ। गर्म पानी की तुलना में अत्यधिक शीघ्र आराम होगा। पैरों पर दशांग लेप की पट्टी भी बाँध सकते हैं।

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4). निमोनिया – बच्चे को निमोनिया हो गया हो या बड़ों को ज्वर के कारण छाती में दर्द हो तो 5 प्रतिशत घी और पानी के साथ लेप तैयार कर, कपड़े पर फैलाकर बाँध दें, इससे बहुत आराम मिलेगा। बच्चे को लगाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

5). ज्वर – तेज़ ज्वर है तो एक पोटली में दशांग लेप को ठंडे पानी में चटनी की तरह पीसकर रखें। इस पोटली को सिर पर हल्के से रगड़ने और लेप सहित पट्टी सिर पर रखने से ज्वर शांत होगा, सिरदर्द आदि मिट जाएगा।

6). आँख में सूजन – आँख में सूजन हो जाए, इंफेक्शन से लाल हो गई हो या दर्द हो तो उपरोक्त विधि से घी, पानी में बने लेप को एक पोटली में भरकर, आँख के ऊपर रखकर हल्का सेक दें। दर्द, सूजन में आराम मिलेगा।

7). एक्जिमा – सूखे एक्जिमा में बराबर मात्रा में दशांग लेप (चूर्ण), सोनागेरू, गुलाब जल में चटनी जैसा पीसकर लगाएँ। एक सप्ताह में लाभ मिलेगा। यदि एक्जिमा गीला है (उससे पानी सा आता हो) तो दशांग लेप को गोमूत्र में लगाएँ। प्रभावित भाग को गाय के मूत्र से धोना लाभकारी है।

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8). मुँहासे – मुँहासों में दशांग लेप में पीली सरसों, मसूर दाल और चिरोंजी बराबर मात्रा में गुलाब जल के साथ पीसकर रोज़ लेप लगाएँ। कुछ ही दिन में मुँहासे और उसके निशान दूर हो जाएंगे।

9). अंडकोष में सूजन – किसी पुरुष या बालक के अंडकोष चोट या रोग किसी भी कारण से फूल गए हों, उनमें सूजन और दर्द हो तो दशांग लेप + घी 10 प्रतिशत + मेदालकडी चूर्ण 10 प्रतिशत मिलाकर पानी के साथ गर्म कर लेप बनाएँ। अब इस लेप को एक तरफ कम सिकी गेहूँ की रोटी पर फैलाकर, अंडकोष पर लपेटकर बाँध दें। प्रातः और सायं बदलते रहें। कुछ ही दिन में कष्ट ठीक हो जाता है।

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उपलब्धता : यह योग इसी नाम से बना बनाया आयुर्वेदिक औषधि विक्रेता के यहां मिलता है।

दशांग लेप के नुकसान (Dashang Lepa Side Effects in Hindi)

  • दशांग लेप चिकित्सक की देखरेख में उपयोग किया जाना चाहिए।
  • बहुत ही कम गर्मी या जलने की उत्तेजना में वृद्धि हो सकती है। ऐसे मामले में, इसे केवल 5-10 मिनट के लिए लागू करें और फिर ठंडे पानी से धो लें।
  • यह उत्पाद बाहरी अनुप्रयोग के लिए है।
  • आकस्मिक मौखिक सेवन से बचें।
  • बच्चों की पहुंच और दृष्टि से दूर रखें।
  • सीधे सूर्य की रोशनी से दूर, एक शांत सूखी जगह में स्टोर करें।

(अस्वीकरण : दवा ,उपाय व नुस्खों को वैद्यकीय सलाहनुसार उपयोग करें)

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