DESH AUR KAAL- Swami Madhavtirth- Hindi
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यह पुस्तक देश और काल नाम से प्रकाशित हुई है और लेखक स्वामी माधवतीर्थ हैं। पैमाना लगभग 392 पृष्ठ का है, जिसमें निवेदन, प्रस्तावना, पन्द्रह अध्याय और चार परिशिष्ट हैं। अध्यायों में अच्छे जीवन का प्रमाण, देशकाल की माया, नवज्ञान की खोज, छोटी उम्र का ज्ञान, चतुर्थ परिमाण, जगत और जीव का सम्बन्ध, प्रान्तमानसक सत्ता, अज्ञातसत्ता, सब घटनाओं का कारण क्या, योगवासिष्ठ में काल का निरूपण और मूल तत्त्व की खोज जैसे विषय आते हैं।
निवेदन में आधुनिक विज्ञान से जोड़कर यह बताया गया है कि देश और काल सापेक्ष हैं, और इसके लिए प्रो० आइंस्टाइन के सापेक्षवाद के सिद्धान्त तथा प्रो० हाइसेनबर्ग के तरंगवाद के सिद्धान्त का उल्लेख किया गया है; इलेक्ट्रोन, प्रोटोन और न्यूट्रॉन जैसे कणों के सम्बन्धों पर भी विचार किया गया है। परिशिष्टों में साधू निश्चलदासजी और स्वामी नचन्द्रध्वजी कृत प्रमाण-निरूपण तथा स्वामी नवद्योष्ण्यकृत बृहदारण्यक वानन्त्यक सारी में सम्बन्ध पर विचार है।
यह पुस्तक वेदान्त-दर्शन को आधुनिक विज्ञान के निकट लाने का प्रयास है, इसलिए दर्शन और विज्ञान दोनों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- देश तथा काल की अवधारणा
- दार्शनिक विवेचन
- आत्मा तथा जगत्
- प्रेरक व्याख्या
पुस्तक की मुख्य बातें
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