गुलाब के चमत्कारी उपाय और नुस्खे

गुलाब सिर्फ खुशबू और खूबसूरती ही नहीं बिखेरता, बल्कि कई प्राकृतिक गुणों को भी यह अपने में समेटे हुए है। यही कारण है कि इसे फूलोंका राजा कहा गया है। यह सौन्दर्यके साथ-साथ स्वास्थ्य के लिये भी बहुत उपयोगी है।

गुलाब के घरेलू नुस्खे और उपयोग :

1-पसीने की बदबू- यदि आपके शरीर से ज्यादे मात्रा में पसीना निकलता हो और उससे दुर्गन्ध आती हो तो घबराने की आवश्यकता नहीं, आप गुलाबका सहारा लें। गुलाब के फूल को पीसकर जल में घोल बनाकर पूरे शरीरमें लेप करें। पुनः आधे घंटे बाद स्नान करें। ऐसा एक सप्ताहतक करनेसे आपकी समस्या का समाधान हो सकता है।

2-मसूढ़ों से दुर्गन्ध- यदि आपके मसूढ़ों से दुर्गन्ध एवं मवाद आता हो एवं दाँतों की जड़ कमजोर पड़ती जा रही हो तो गुलाबका प्रयोग करें। गुलाबके ताजे फूलोंको अच्छी तरह कुचलकर नित्य प्रति खायें। ऐसा करनेसे मसूढ़ों से रक्त, मवाद एवं दुर्गन्ध नहीं आयेगी। साथ ही मसूढ़े भी मजबूत हो जायँगे।

3-दाद खाज खुजली- यदि दाद-खाज या दिनाय से आप परेशान हैं तो गुलाबके अर्क में नीबूका रस मिलाकर प्रभावित अङ्गपर इस लोशन को लगाने से दाद-खाज एवं दिनायसे छुटकारा मिलता है।

4-मुह के छाले का उपाय – यदि आपके मुँह में बार-बार छाले पड़ते हों तो घबरायें नहीं। बल्कि इससे निजात पानेके लिये गुलाबको पानीमें उबालकर ठण्डा कर लें। पुनः उस पानीसे दिनभरमें तीन बार नियमित कुल्ला करें। समस्या का समाधान हो जायगा।

5- दिल का धड़कना – यदि आपका दिल बहुत धड़कने लगे अथवा ऐसी प्रक्रिया कई दिनोंतक एवं कई महीनों तक बार-बार जारी रहे तो गुलाब के चूर्णमें बराबर मात्रामें मिस्री मिला लें। एक-एक चम्मच इस चूर्ण का सुबह-शाम सेवन करें। दिल बेवजह जोर से धड़कना बंद हो जायगा।

6- कान के दर्द में – यदि असामयिक या रात्रि में किसी बच्चे या आदमी का कान जोर-जोर से दर्द कर रहा हो तो उसमें ताजे गुलाबका रस टपकायें। ऐसा करनेसे कानका दर्द समाप्त हो जाता है।

7- हैजे के उपचार में – बरसात के दिनों में हैजे का प्रकोप काफी भयावह होता है। ऐसी स्थितिमें गुलाब काफी उपयोगी साबित होता है। इन परिस्थितियों में आधा कप शुद्ध गुलाबजल में नीबू निचोड़कर उसमें थोड़ी मात्रामें मिस्री मिला लें। अब इस घोलको हैजे से प्रभावित रोगीको तीन-तीन घंटे पर पिलायें। काफी लाभ होगा।

8- ल्यूकोरिया (सफेद पानी की शिकायत) में – स्त्रियों के लिये प्रदर या ल्यूकोरिया एक आम बीमारी हो गयी है। कई स्त्रियोंको पेशाब में जलन भी होती है। इससे छुटकारा पानेके लिये गुलाबके १० ग्राम पत्तोंको पीसकर समान मात्रामें दोसे तीन बार पीनेसे कठिनाई दूर होती है।
इसी प्रकार गुलाब अन्य अनेक रोगों में भी लाभदायक है।

9- हड्डियों की मजबूती – गुलाबमें विटामिन ‘सी’ प्रचुरतामें पाया जाता है। गुलाबके फूल खाते रहें तो जोड़ों तथा हड्डियों में विशेष शक्ति लचक रहती है, जो बुढ़ापेमें सहायक होती है।

10-दाँतों की मजबूती – स्त्री-पुरुष जो अपनेको स्वस्थ एवं सुन्दर बनाना चाहते हैं, वे गुलाबके फूलों को प्रात:काल खायें। इससे मसूढे और दाँत भी मजबूत होंगे। दाँतों से निकलनेवाली दुर्गन्ध, पीप और रक्तकी बीमारियों में भी गुलाबका सेवन लाभप्रद होता है। यदि गुलाबका निरन्तर प्रयोग किया जाय तो लंबी उम्रतक दाँतों की सुरक्षा बनी रहती है।

11-क्षय रोग में- गुलाबके फूल क्षय (ट्यूबरकुलोसिस)-रोग में लाभदायक होते हैं। यह देखने में आया है कि क्षय रोगी को जितनी ज्यादा मात्रामें गुलाबके फूल खिलाये जायँ, उतनी ही शीघ्रता से वह रोग-मुक्त होगा।

12-यकृत की कमजोरी – आमाशय, आँतों और यकृत की कमजोरियों को दूर करके इनमें शक्ति-स्फूर्तिका संचार करनेमें गुलाब काफी सहायक होता है। गर्मी में दिल धड़कनेकी. बीमारीमें यदि पाँच गुलाबके फूल प्रातः खाये जायँ तो फायदा होता है।

13-नेत्र-रोगों में – गुलाबजल के प्रयोग से नेत्र-रोगों में लाभ होता है। गुलाबजल ‘रतौंधी‘ रोगकी रामबाण औषध है।

14-चेचक रोग में – गुलाबको सुखाकर इसका चूर्ण चेचक के रोगी के बिस्तरपर डालने से दानों के जख्म शीघ्र खत्म हो जाते हैं।

15-पेट के रोग – पेटकी बीमारियों में गुलाबका गुलाबकन्द बहुत फायदेमन्द है। एक किलो गुलाबके फलोंकी पंखुड़ियोंको तीन किलो चीनी में मथ लें। इसको किसी चीनी-मिट्टीके बर्तनमें एक माह रखें, अति स्वादिष्ट गुलकन्द तैयार हो जाता है।(स्विट्जरलैंडके विख्यात सेनिटोरियम ‘फॉरन्यू’ में बूढ़े तथा शिथिल व्यक्तियोंको जब पानीमें शुष्क गुलाबके फूल डालकर दस मिनट बाद यही पानी छानकर शहदसहित पिलाया गया तो आशातीत परिणाम प्रस्तुत हुए।)

16-स्त्रियों के भयानक रोग प्रदर (ल्यूकोरिया) – में गुलाबके सूखे फूलोंका चूर्ण योनि-मार्गमें रखनेसे यह रोग शीघ्र ही समूल नष्ट होता है।

17-सिर दर्द में – यदि सिर में दर्द हो तो गुलाब को जल में पीसकर माथे पर लेप करें, तुरंत दर्द दूर होगा। प्रयोग की दृष्टि से ताजे फूलों को ही प्रयोग करना चाहिये, यदि न मिलें तो सूखे फूलोंको भी लिया जा सकता है।