गुर्दा (किडनी) खराब होना – Kidney Failure in Hindi

हमारे गुर्दे लगभग 1500 लीटर खून को साफ कर, अनावश्यक पदार्थों को 1.5 से 2.0 लीटर मूत्र में बदल देते हैं। लगभग 1200 मि.ली. रक्त प्रत्येक मिनट में दोनों गुर्दो से प्रवाहित होता है तथा प्रति मिनट 1 मि.ली. के हिसाब से मूत्र में बदल जाता है। छने मूत्र के द्वारा शरीर के गंदे एवं हानिकारक पदार्थ जैसे- यूरिया, क्रिएटिनिन, विभिन्न प्रकार के अम्ल इत्यादि बाहर निकल जाते हैं।

हमारे गुर्दे लाखों चलनियों तथा लगभग 140 मील लंबी नलिकाओं से बने होते हैं। गुर्दे की इस इकाई को नेफ्रान (Nephron) कहते हैं, जो एक गुर्दे में लगभग 10 लाख होती हैं। वास्तव में नलिकाएं उस छने हुए द्रव में से अच्छी चीजों (सोडियम, पोटेशियम इत्यादि) को दोबारा सोखकर लगभग 1.5 लीटर मूत्र के रूप में बाहर निकाल देती हैं।

क्यों होती है गुर्दे में खराबी ? (Kidney Failure Risk Factors and Causes in Hindi)

गुर्दे खराब होने के कारण क्या हैं ?

गुर्दे खराब होने के यूं तो बहुत सारे कारण हैं, लेकिन उनमें से प्रमुख हैं –

गुर्दे खराब होने के प्रकार (Types of Kidney Failure in Hindi)

गुर्दे खराब होने के प्रकार कितने हैं ?

सामान्य तौर पर गुर्दे की खराबी 3 प्रकार की होती है –

1) Acute Renal Failure ( हाल ही में गुर्दे फेल होना ) : यह रोग इलाज से ठीक हो जाता है। इसके कारणों में पानी की कमी, हैजा, ब्लडप्रेशर कम हो जाना, दवाओं का असर तथा संक्रमण (सेप्टिक) इत्यादि हैं।

2) Chronic Renal Failure (लंबे समय से गुर्दा फेल होना) : विभिन्न बीमारियों जैसे डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर, झिल्लियों की सूजन इत्यादि से यह समस्या होती है। इसमें जीवन पर्यंत डायलिसिस के सहारे रहना या गुर्दा बदलना पड़ता है।

3) गुर्दे से प्रोटीन जाना, शरीर में सूजन आना : इससे आगे चलकर गुर्दे फेल हो सकते हैं।

गुर्दे खराब होने के प्रमुख लक्षण (Kidney Failure Symptoms in Hindi)

गुर्दे खराब होने के लक्षण क्या होते हैं ?

अगर आदमी का एक गुर्दा खराब हो जाए, तो अन्य एक से भी जीवन सुचारु रूप से जिया जा सकता है। गुर्दे फेल तब होते हैं, जब बीमारी दोनों गुर्दो में हो। इसके लक्षण कई प्रकार के हो सकते हैं, जैसे-

  • शरीर में सूजन आना,
  • भूख की कमी,
  • उलटी या मतली आते रहना,
  • खून की कमी होना,
  • हड्डियां कमजोर हो जाना,
  • सांस फूलना,
  • मूत्र की मात्रा में कमी होना आदि।

गुर्दे की खराबी से बचाव के उपाय (Prevention of Kidney Failure in Hindi)

गुर्दे की सुरक्षा के उपाय क्या है ?

निम्न उपायों को अपनाकर गुर्दे खराब होने के जोखिम को कम किया जा सकता हैं –

  • पानी का अधिक सेवन करना।
  • अगर डायबिटीज या हाई ब्लडप्रेशर की बीमारी हो तो उसे नियंत्रण में रखना।
  • दर्द की दवाइयां केवल आवश्यकता के समय ही लेना, उनकी ज्यादा मात्रा का सेवन नहीं करना ।
  • अनावश्यक दवाइयों से बचना ।
  • नमक कम मात्रा में सेवन करना ।
  • गूदे वाले फलों का सेवन जैसे-सेब, अमरूद, पपीता, पत्तों वाली व हरी सब्जियां पानी में उबालकर सेवन करना।
  • प्रोटीन कम मात्रा में लेना।
  • सेम, चना, दाल व दूध का सेवन नहीं करना । आदि उपाय करने पर गुर्दो को खराब होने से बचाया जा सकता है।

गुर्दे की बीमारी की शंका होते ही विशेषज्ञ डॉक्टर से उचित परामर्श लेना चाहिए क्योंकि यह जल्दी उपचार मिलने से ठीक हो सकती है। इलाज में देर होने से गुर्दे पूरी तरह खराब होने की संभावना रहती है।

गुर्दे खराब होने का उपचार (Kidney Failure Treatment in Hindi)

गुर्दे खराब होने का इलाज कैसे किया जाता हैं ?

अगर केवल प्रोटीन की अधिक मात्रा पेशाब में जा रही हो, तो ऐसी स्थिति में परहेज व दवाइयां देकर रोग को आगे बढ़ने से रोकने के उपाय किए जाते हैं। कभी-कभी सुई से गुर्दे की जांच की जरूरत होती है ताकि सही बीमारी का पता लगाकर उसका निदान हो सके तथा गुर्दे को खराब होने से यथासंभव रोका जा सके।

अगर गुर्दे हैजा, सेप्टिक इत्यादि से हाल ही में फेल हुए हैं, तो इनके ठीक होने के आसार अधिक होते हैं और मरीज पहले की तरह स्वस्थ हो जाता है।

हीमोडायलिसिस : 1 व्यक्ति प्रति सप्ताह 2 से 3 बार हीमोडायलिसिस करवाता है। प्रत्येक डायलिसिस का समय लगभग 4 घंटे होता है।

गुर्दा प्रत्यारोपण कब करें ? (When to Get a Kidney Transplant in Hindi)

गुर्दा खराब होने पर प्रत्यारोपण के विकल्प का चयन निम्न बातों को ध्यान में रखकर करना
चाहिए।

  1. जीवनशैली : अगर मरीज का काम घूमने-फिरने का है, तो गुर्दा प्रत्यारोपण बेहतर रहता है।
  2. पारिवारिक स्थिति : धन की समस्या होने पर दूरदृष्टि से देखा जाए तो गुर्दा प्रत्यारोपण सस्ता पड़ता है।
  3. डायलिसिस केंद्र से दूरी : अगर डायलिसिस मशीन व केंद्र काफी दूर है, तो गुर्दा प्रत्यारोपण श्रेष्ठ है।
  4. दानदाता की उपलब्धि : गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए दानदाता का होना अति आवश्यक है।
  5. यदि मरीज घर में कमाने वाला मुख्य सदस्य है तो इसका तात्पर्य हुआ कि घर के सारे सदस्यों का भरण-पोषण मरीज को करना है। ऐसी स्थिति में गुर्दा प्रत्यारोपण का विकल्प बेहतर रहता है क्योंकि स्वस्थ गुर्दा लगने के बाद वह आजीविका अच्छी तरह कमा सकता है।

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