हाइपोथायरायडिज्म : कारण और उपचार (Hypothyroidism in Hindi)

Last Updated on November 30, 2020 by admin

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प्रश्न : थायराइड यानी क्या ?

जवाब : थायराइड यह एक अंत:स्रावी ग्रंथि है जो गले में श्वास नलिका के आगे की तरफ होती है।

प्रश्न : हमारे शरीर में थायराइड का कार्य क्या है ? उसके कार्य का नियंत्रण किस प्रकार से किया जाता है?

जवाब : थायराइड दो प्रकार के अंत:स्राव (हार्मोन) तैयार करती है। ये अंत:स्राव सीधे रक्त में घुल जाते हैं। खून में इनका प्रमाण अत्यंत सूक्ष्म होता है। थायराइड अंत:स्राव के रासायनिक रचना के आयोडीन अणु के संख्यानुसार उन्हें 3 टी व 4 टी कहते हैं। हाइपोथैलेमस और पिट्यूटरी ग्रंथि थायराइड ग्रंथि के कार्य का नियंत्रण करते हैं। पिट्युटरी ग्रंथी में से ही एस.एच. नामक थायराइड को चालना देनेवाला स्राव खून में आता है। 3 टी एवं 4 टी इनके निर्मिती को और स्रवण को टी.एस.एच. के निर्मिती का और स्रवण का दमन टी 3 और टी 4 करते हैं। सर्वसाधारण व्यक्ति में इन अंत:स्रावों का समतोल इस प्रकार कायम रखा जाता है।

शरीर के विविध कार्यों पर थायराइड अंत:स्राव का प्रमाण कम या ज्यादा होने पर उसका दुष्परिणाम शरीर के हर हिस्से पर कुछ न कुछ होता है। शरीर के ऊर्जा की निर्मिती और इस्तेमाल कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन्स, स्निग्ध पदार्थ, जीवनसत्व, खनिज और पानी इनका बनना और विघटन होना, रक्त निर्मिती, मानसिक व बौद्धिक कार्य, जनन कार्य का नियंत्रण थायराइड करता है।

प्रश्न : गॉइटर, थायराइड अल्पक्रियता (हाइपोथायरायडिज्म) और थायराइड अतिक्रियता (हाइपोथायरायडिज्म) यानी क्या ?

जवाब : थायराइड की आकार में वृद्धि होती है तो उसे गॉइटर कहते हैं। थायराइड अंत:स्राव की न्यूनता (कमी) हो जाए तो उसे थायराइड अल्पक्रियता कहते हैं। थायराइड अंत:स्राव की अतिरिक्त निर्मिती होने लगे तो उसे थायराइड अतिक्रियता कहते हैं।

प्रश्न : थायराइड और वजन का एक-दूसरे से क्या संबंध है ?

जवाब : शरीर में उपस्थित पानी, स्नायु, हड्डियां, चरबी इत्यादि के वजन पर व्यक्ति का वजन तय होता है। थायराइड अंत:स्राव की कमी के कारण शरीर में पानी जमा होता है, जिससे वजन कुछ किलोग्राम बढ़ जाता है। अतिरिक्त थायराइड अंत:स्राव के कारण स्नायु का विघटन होता है जिससे वजन कम होता है। थायराइड अंत:स्राव का चरबी पर ज्यादा कुछ परिणाम नहीं होता। स्थूलता (शरीर की अतिरिक्त चर्बी) का सबसे बड़ा कारण थायराइड न होकर, अतिरिक्त उष्मांक वाला आहार और व्यायाम की कमी होती है।

( और पढ़े – थायराइड का घरेलू उपचार )

प्रश्न : हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण कौन से हैं?

जवाब : थकान, उदासीनता, मंद बुद्धि, अति प्रमाण में नींद, आलस, शुष्क व मोटी त्वचा, बाल झड़ना, वजन में वृद्धि, भूख कम होना, ठंड सहन नहीं होना, कब्जियत, नपुंसकता, मासिक स्राव में बदलाव, वंध्यत्व, गॉइटर इ. हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण होते हैं।

इसकेअलावा बच्चों की शारीरिक वृद्धि, लैंगिक विकास और स्कूल की प्रगति पर विपरीत परिणाम होता है। नवजात शिशु में भट्टी आवाज, बड़े आकार की जीभ, फूला हुआ पेट, नाभि का, हर्निया, दीर्घकालीन पीलिया, शिथिल स्नायु इत्यादि लक्षण पाए जाते हैं । हर रुग्ण में सभी लक्षण होंगे ऐसा नहीं है। कई बार कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देता।

प्रश्न : हाइपोथायरायडिज्म क्यों होता है ? इसका कारण क्या है?

जवाब : शरीर में थायराइड विरोधी प्रतिद्रव्यों का निर्माण होने के कारण थायराइड आकुंचन होता है और इसके कारण उसका कार्य कम होता है । यह कारण सबसे ज्यादा प्रौढ़ रुग्णों में पाया जाता है। अपने ही अवयव के विरुद्ध प्रतिद्रव्य निर्माण करने की यह गलत प्रवृत्ति बहुत बार अनुवांशिक होती है। ऐसे व्यक्ति में दूसरे अवयवों के विरुद्ध प्रतिद्रव्यों के निर्माण करने की यह गलत प्रवृत्ति बहुत बार अनुवांशिक होती है। ऐसे व्यक्ति में दूसरे अवयवों के विरुद्ध प्रति द्रव्यों के निर्माण के कारण अन्य विकार हो सकते हैं।

  1. थायराइड विरोधी प्रतिदव्यों के निर्माण होने के कारण कभी-कभी थायराइड का आकुंचन न होकर विस्तार (गॉइटर) होता है। आकार बढ़ाकर थायराइड के मंद कार्य को फिर से सामान्य करने का यह शरीर का प्रयत्न होता है।
  2. थायराइड अंत:स्राव की निर्मिती के लिए आयोडीन की आवश्यकता होती है। आहार में आयोडीन की कमी की वजह से हाइपोथायरायडिज्म हो सकता है।
  3. संक्रमण के बाद या प्रसूति के बाद थायराइड का दाह होकर अंदर जमा थायराइड अंत:स्राव धीरे-धीरे कम होता है, कालांतर से हाइपोथायरायडिज्म होता है।
  4. कुछ दवाइयों और किरणोत्सर्ग के कारण हाइपोथायरायडिज्म हो सकता है।
  5. थायराइड अंत:स्राव की निर्मिति में सहभागी होने वाले कुछ एन्जाइम्स की न्यूनता की वजह से हाइपोथायरायडिज्म हो सकता है।
  6. शरीर में जन्म के साथ थायराइड न होने के कारण हाइपो थायराइड होता है।
  7. पिट्यूटरी ग्रंथियों से होने वाले टी.एस.एच. की कमी के कारण हाइपोथायरायडिज्म होता है।

( और पढ़े – महिलाओं में थायराइड के कारण ,लक्षण ,दवा और बचाव )

प्रश्न : हाइपोथायरायडिज्म के निदान के लिए किसे जांच करानी चाहिए ?

जवाब :

  1. हाइपोथायरायडिज्म यह मतिमंदता उपचार से ठीक होने जैसा सबसे अधिक प्रमाण में पाया जाने वाला कारण है। नवजात शिशु में हाइपोथायरायडिज्म का उपचार पहले कुछ दिनों या सप्ताह में न किया जाए तो स्थायी मतिमंदता आती है। इसलिए सभी नवजात शिशुओं की जांच करना आवश्यक है।
  2. विविध अवयवों के विरुद्ध प्रतिद्रव्यों (antibodies) को निर्माण करने की शरीर की गलत प्रवृत्ति हो उदाहरण बाल्यावस्था में होने वाला मधुमेह, सफेद दाग, कुछ प्रकार के रक्तक्षय, संधिवात इत्यादि हो तो जांच करानी चाहिए।
  3. हाइपोथायरायडिज्म के एक या अनेक प्रकार के लक्षण दिखाई दें तब जांच कराएं।
  4. प्रसूति के बाद पहले वर्ष में सभी महिलाओं में विशेषत: शरीर दर्द, उदासीनता, थकान या जिनके रिश्तेदारों (माता-पिता, भाई, खून के रिश्तेदार) को थायराइड विकार हो तब इसकी जांच कराएं।
  5. सभी मानसिक रुग्णों को विशेषतः उदासीनता आने से जांच करानी चाहिए।
  6. सतत रक्तक्षय दिखाई दे तो जाँच करानी चाहिए।
  7. सत्तर वर्ष के बाद के सभी व्यक्ति विशेषतः स्त्रियाँ।

प्रश्न : हाइपोथायरायडिज्म का निदान कैसे किया जाता है ?

जवाब : खून में टी 3, टी 4 व टी.एस.एच. इन अंतःस्रावी का प्रमाण जांच कर हाइपोथायरायडिज्म का निदान किया जाता है। यह प्रमाण अति सूक्ष्म होने के कारण जाँच अचूक और विश्वसनीय होना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न : हाइपोथायरायडिज्म यह विकार जीवन भर रहता है क्या ?

जवाब : दवाओं की वजह से, संक्रमण के कारण और प्रसूति के बाद थायराइड के दाह के कारण होने वाला हाइपोथायरायडिज्म यह अस्थायी हो सकता है किंतु बहुत से रुग्णों में यह विकार जीवन भर रहता है।

प्रश्न : क्या हाइपोथायरायडिज्म होने वाले व्यक्ति का वैवाहिक जीवन सामान्य रह सकता है ?

जवाब : हाँ, योग्य उपचार लेनेवाले रुग्णों का वैवाहिक जीवन सामान्य होता है। विशेषतः योग्य उपचार लेनेवाली हाइपोथायराइड स्त्रियों में माहवारी, गर्भधारणा, गर्भावस्था, प्रसूति सामान्य होती है। ऐसी स्त्रियों के नवजात शिशुओं को जन्म से ही कोई भी शारीरिक विकार होने का अतिरिक्त धोखा नहीं होता। हाइपोथायराइड व्यक्ति के बच्चों को यह विकार होगा ही ऐसा नहीं है।

प्रश्न : हाइपोथायरायडिज्म का उपचार किस तरह किया जाता है ? इस उपचार के अवाँछित परिणाम होते हैं क्या ?

जवाब : थायराइड अंतस्राव की शरीर में हुई न्यूनता को पूर्ण करना इतना ही उपचार से फिर से शुरू नहीं होता है। कुछ बातों को छोड़कर यह उपचार जीवन भर लेना पड़ता है। थायराइड अंत:स्राव की मौखिक (मुँह से खाने वाली) गोली दिन में एक बार सुबह खाली पेट पानी के साथ और चाय-नाश्ते से आधा घंटा पहले लेनी होती है। शुरुआत में कम डोज दिया जाता है और कुछ सप्ताह के बाद इसका प्रमाण बढ़ाया जाता है। आवश्यकता से कम डोज़ देने से थायराइड अंत:स्राव की कमी पूरी नहीं होती जिससे लक्षण कायम रहते हैं।

आवश्यकता से अधिक डोज देने से चिड़चिड़ाहट, छाती में धड़-धड़, हाथों में कंपन इत्यादि लक्षण पाए जाते हैं। इससे महत्वपूर्ण यानी अधिक डोज़ के कारण हड्डियां खोखली होती हैं। हृदय गति अनियमित होने का खतरा होता है। इसलिए इस विकार में थायराइड अंत:स्राव का कम से कम आवश्यक डोज़ देना महत्वपूर्ण होता है।

( और पढ़े – थायराइड का आयुर्वेदिक इलाज )

प्रश्न : उपचार शुरू करने के कितने दिनों बाद इसके लक्षण खत्म होते हैं ? खून में थायराइड अंत:स्राव का स्तर सामान्य होने में कितनी अवधि लगती है ?

जवाब : शरीर की सूजन और वजन की वृद्धि इन लक्षणों में उपचार के कुछ सप्ताह के बाद सुधार होता है। उसके बाद भूख और कब्जियत में सुधार होता है। आवाज, त्वचा और बालों में सुधार होने में कई माह लग जाते हैं। खून की थायराइड अंत:स्राव का स्तर सामान्य होने के लिए 4 से 8 सप्ताह लगते हैं। थायराइड अंत:स्राव का डोज निश्चित होने तक सप्ताह में एक बार इसकी जांच कराना आवश्यक होता है। बच्चों को 6 महीने में कम से कम एक बार और प्रौढ़ व्यक्ति को 8-9 महीनों में कम से कम एक बार जांच करानी चाहिए। गर्भावस्था में 2-3 महीने में कम से कम एक बार जांच कराना आवश्यक होता है।

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