मकड़ी के जाले में राम-नाम (विचित्र किंतु सत्य घटना)

भगवान् श्रीदशरथनन्दन राम और उनके परम पवित्र श्रीरामनामकी बड़ी ही अद्भुत एवं विलक्षण महिमा है जो कि वर्णनातीत है। श्रीराम-नाम में जो अद्भुत मिठास और अचिन्त्य शक्ति विद्यमान है, वह सब हमारे सनातनधर्मके शास्त्रों-पुराणों में भरी पड़ी है। हिंदुओं का तो श्रीराम-नाम प्राणधन-जीवनसर्वस्व ही है। हिंदू जन्मसे लेकर मरणपर्यन्त राम-नाम कहता हुआ ही अपना जीवनव्यतीत करता है।

हिंदू अपने घरों में दीवारों पर राम-राम अङ्कित करता है और अपने मुखसे राम-राम बोलता है एवं मालापर राम-राम जपता है तथा राम-राम का कीर्तन करता है। अपने शरीरपर रामनामी दुपट्टा ओढ़ता है, रामनामी अँगूठी पहनता है। और इस प्रकार हिंदू ‘राम-राम’ कहता हुआ राममय हो जाना चाहता है।

मृत्युके समयमें भी हिंदू राम-राम कहता हुआ ही अपने प्राणोंका परित्याग करता है। मृत्युके बाद भी शवके साथ रामधुन करने की पुरानी परम्परा है। शवयात्रा के समय ‘राम-नाम सत्य है’ की ध्वनि की जाती है। भगवान् श्रीहनुमान जी महाराजने तो अपने हृदयको चीरकर उसमें अङ्कित ‘राम’ शब्द दिखा दिया था, जिसने सबको आश्चर्यचकित कर दिया था। पुराणों में कहा गया है कि वह प्राणी परम सौभाग्यशाली है कि जिसके मुखसे अन्तिम समयमें राम-नाम निकलता है। भारत के मनुष्य ही नहीं, अपितु पशु, पक्षी, कीट, पतंग, जड़-चेतन आदि भी श्रीरामभक्ति करते देखे और सुने गये हैं।

कुछ समय पूर्व हमें श्रीराम-नाम की और दशरथनन्दन भगवान् श्रीराम की अद्भुत महिमा को डंके की चोटपर सप्रमाण सत्य सिद्ध करनेवाली महान् आश्चर्यजनक सत्य घटना देखने में आयी है, वह इस प्रकार है –

जनवरी सन् १९७४ में हमने नवभारत टाइम्स, वीर-अर्जुन आदि समाचारपत्रों में आर्यसमाज गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार के हिंदी विभागके अध्यक्ष डॉ० श्रीअम्बिकाप्रसाद वाजपेयी, डी० लिट्के निवासस्थानपर मकड़ी द्वारा राम-नाम का जाला पूरने की बात पढ़ी तो उस अद्भुत विलक्षण राम-नाम के जालेको और उस परम श्रीरामभक्ता मकड़ीको देखनेकी मनमें बड़ी उत्कण्ठा जाग्रत् हो उठी।

डॉ० श्रीअम्बिकाप्रसाद वाजपेयी, डी०लिट् महोदय श्रीरामचरितमानस तथा हिंदी-साहित्यके प्रकाण्ड विद्वान् थे। उन्होंने तो श्रीतुलसीकाव्यपर शोध किया ही था, अब एक मकड़ीने उनके घरपर जाला बनाकर उसके बीचोबीच ‘राम’ शब्द अङ्कित कर बड़े-बड़े घोर नास्तिकोंके समक्ष शोधका विषय प्रस्तुत कर दिया। डॉ० वाजपेयीजीने उत्सुक एवं जिज्ञासु लोगोंके समाधानके लिये घटनाका विवरण इस प्रकार दिया

मेरे निवासस्थान के उत्तर-पूर्व दिशाके कोनेमें मकड़ीने जाला इस प्रकार लगाया है कि उसके मध्यमें स्पष्ट शब्दों में राम-नाम अङ्कित है। यह एक बड़ी ही विचित्र बात है, किंतु यह बात बिलकुल अक्षर-अक्षर सत्य है। इसे बड़े-बड़े विद्वानोंने आकर देखा है। अप्रैल सन् १९७४ में जब हम कुम्भके परमपावन पर्वपर श्रीहरिद्वार गये तो हमें ११ अप्रैल सन् १९७४ को गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालयमें स्वयं जाकर डॉ० श्रीअम्बिकाप्रसाद वाजपेयी, डी०लिट्के निवासस्थानपर जाने तथा उस विचित्र पावन जाले में लिखे राम-नाम के दर्शन करने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ था। माननीय वाजपेयीजीने कृपाकर हमें अपने साथ अपने मकानके अंदर ले जाकर उस दीवारको दिखलाया था, जिसपर वह मकड़ीका जाला लगा हुआ था और उस जालेमें स्पष्ट अक्षरों में ‘राम-नाम’ अङ्कित था। डॉ० वाजपेयी और उनके परिवारीजन सभी इस सत्य घटनाको अलौकिक मानकर बड़े आश्चर्यचकित थे। हमने मकड़ीके उस जालेमें अङ्कित ‘राम-नाम’का चित्र श्रीवाजपेयीजीसे प्राप्त करके उसे कुम्भपर पधारे जगद्गुरु शंकराचार्य गोवर्धनपीठाधीश्वर स्वामी श्रीनिरंजनदेवतीर्थजी महाराज, पूज्यपाद जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी श्रीस्वरूपानन्द सरस्वतीजी महाराज, पूज्यपाद जगद्गुरु रामानुजाचार्य, स्वामी श्रीमाधवाचार्यजी महाराज बड़गादीश्वर बम्बई, पूज्यपाद जगद्गुरु वल्लभाचार्य गोस्वामी श्रीरणछोड़ाचार्यजी महाराज आदि बड़े बड़े धर्माचार्यो को और विद्वानोंको भी दिखाया। वे सभी देखकर बड़े आश्चर्यचकित हो गये थे।

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