ज्योतिष्मती (मालकांगनी) तेल के फायदे, गुण, उपयोग और नुकसान

Last Updated on March 30, 2023 by admin

ज्योतिष्मती (मालकांगनी) क्या है ? : Jyotishmati (malkangni) in Hindi?

ज्योतिष्मती को मालकांगनी भी कहते हैं और विभिन्न गुणों के आधार पर संस्कृत में इसे कई नामों से सम्बोधित किया गया है जैसे कबूतर के समान लता वाली होने से पारावत पदी, कौवे के अण्डे के समान फल वाली होने से काकाण्डकी, वेगपूर्वक बढ़ने वाली और उत्साह का वेग बढ़ाने वाली से वेगा आदि ।

अनेक व्याधियों को नष्ट करने वाली यह लता समस्त भारत में, विशेष कर पंजाब कश्मीर आदि पर्वतीय क्षेत्रों में 3 से 4 हजार फीट की ऊंचाई पर पैदा होती है।

यह एक बड़ी लम्बी, वृक्षारोही लता होती है। इसकी झुकी हुई शाखाओं पर सफ़ेद बिन्दु होते हैं। इसके फल मटर के समान, पीले और तीन खण्ड वाले होते हैं। इसके फूल नई पत्तियों के साथ अप्रेल-जून में आते हैं और फल अक्टूबर-जनवरी में पकते हैं। स्मृति और बुद्धि तीव्र करने वाली मेध्या रसायन के रूप में, ज्योतिष्मती का आयुर्वेद में विशिष्ट स्थान है। पर्वतीय क्षेत्रों में यह ताज़ी मिल जाती है। देश के अन्य नगरों में पंसारियों की दूकान या कच्ची जड़ी-बूटी बेचने वाली दूकान पर मिलती है। इसके तेल की प्रशंसा करते हुए भारत भैषज्य रत्नाकर (द्वितीय भाग) के तेल प्रकरणम् में, श्लोक क्रमांक 2063 के अन्तर्गत कहा गया है –

ज्योतिष्मत्याः पिबेत्तेलं पयासा च विरेचनम्।
सर्वेभ्यो जठरेभ्यस्तु शीघ्रंमुच्येत मानवः ।।

अर्थात् – मालकांगनी का तेल दूध में मिला कर पीने से विरेचन होकर समस्त उदर रोग नष्ट हो जाते हैं।

ज्योतिष्मती का विभिन्न भाषाओं में नाम : Name of Jyotishmati in Different Languages

Jyotishmati in –

  • संस्कृत (Sanskrit) – ज्योतिष्मती
  • हिन्दी (Hindi) – मालकांगनी
  • मराठी (Marathi) – मालकांगोणी
  • गुजराती (Gujarati) – मालकांगणी
  • बंगला (Bengali) – लताफटकी
  • तेलगु (Telugu) – बावंजी
  • तामिल (Tamil) – वालुलवै
  • मलयालम (Malayalam) – पालुरुवम
  • कन्नड़ (Kannada) – करिगन्ने
  • पंजाबी (Punjabi) – संखू
  • फारसी (Farsi) – काल
  • इंगलिश (English) – स्टाफ ट्री (Staff tree)
  • लैटिन (Latin) – सेलसट्रस पनिक्यूलेटस (Celastrus paniculatus willd)

ज्योतिष्मती (मालकांगनी) के औषधीय गुण :

  • मालकांगनी चरपरी, कड़वी और दस्तावर होती है ।
  • यह कफ और वायु को जीतने वाली होती है ।
  • ज्योतिष्मती अत्यन्त गर्म, वमनकारक, तीक्ष्ण, अग्निवर्द्धक, बुद्धि तथा स्मृति को तीव्र करने वाली है।

ज्योतिष्मती के रासायनिक संगठन :

इसके बीजों में एक गाढ़ा, रक्ताभ, कड़वा और गन्धयुक्त तेल , कड़वी राल, क्षार और टेनिन आदि द्रव्य पाये जाते हैं।

ज्योतिष्मती के उपयोग : Jyotishmati (Malkangni) Uses in Hindi

इसके बीज और तेल को उपयोग में लिया जाता है। घरेलू इलाज के रूप में उपयोग में लिये जाने योग्य कुछ प्रयोग यहां प्रस्तुत किये जा रहे हैं जो परीक्षित हैं और गुणकारी सिद्ध हुए हैं।

रोग उपचार में ज्योतिष्मती के फायदे : Jyotishmati Benefits in Hindi

1. अनिद्रा में ज्योतिष्मती से लाभ (Malkangni Benefits to Treat insomnia problem in Hindi) : आजकल अनिद्रा रोग से ग्रस्त स्त्री पुरुषों की संख्या बहुत बढ़ चुकी है और बढ़ती ही जा रही है। अनिद्रा की स्थिति को दूर करने के लिए यह प्रयोग गुणकारी सिद्ध हुआ है। ज्योतिष्मती के बीज, शंखपुष्पी, जटामासी और सर्पगन्धा- 25-25 ग्राम और मिश्री 100 ग्राम । सबको कूट पीस कर महीन चूर्ण करके मिला लें और शीशी में भर लें। एक चम्मच (5 ग्राम), शाम को सोने के समय से एक घण्टे पहले, कुनकुने गर्म दूध के साथ लेने से अच्छी गहरी नींद आती है। यह योग उच्च रक्तचाप को सामान्य करने में भी उपयोगी और गुणकारी है। इस योग को लगातार प्रयोग न करके जब तक आवश्यकता हो तब तक प्रयोग करना चाहिए।

2. सफेद दाग में ज्योतिष्मती का प्रयोग लाभदायक (Benefits of Malkangni in Cure Vitiligo in Hindi) : त्वचा पर सफेद दाग हो जाते हैं जिसे हिन्दी में श्वित्र और अंग्रेजी में ल्यूकोडरमा (Leucoderma) कहते हैं। इस व्याधि को दूर करने के लिए ज्योतिष्मती तेल 50 मि.लि. और बावची तेल 50 मि.लि., दोनों को मिलाकर शीशी में भर लें और दिन में 2-3 बार इस तेल को सफ़ेद दागों पर लगाएं, लाभ होगा। यह प्रयोग कण्डु, पामा आदि त्वचा रोगों के लिए भी उपयोगी है। ( और पढ़े – सफेद दाग का आयुर्वेदिक इलाज )

3. बुद्धि और स्मृति बढ़ाने के लिए ज्योतिष्मती का सेवन लाभदायक (Malkangni Beneficial to Boost Memory in Hindi) : बुद्धि व स्मृति को बढ़ाने में भी ज्योतिष्मती बहुत ही लाभप्रद है । नित्य गाय के दूध में 2 से 3 बूंद डालकर इसका सेवन करना चाहिए । ( और पढ़े – यादशक्ति बढ़ाने के सबसे शक्तिशाली 12 प्रयोग )

4. दमा मिटाए ज्योतिष्मती का उपयोग (Malkangni Cures Asthma in Hindi) : ज्योतिष्मती के बीज और छोटी इलायची के दाने- दोनों 20-20 ग्राम लेकर कूट पीस कर महीन चूर्ण कर लें और मिला कर शीशी में भर लें। इसे 2-2 रत्ती मात्रा में सुबह शाम शहद में मिला कर चाटने से दमा रोग में लाभ होता है खटाई ,खट्टे और बासे पदार्थों का सेवन बन्द रखें। ( और पढ़े – दमा (अस्थमा / श्वास) में क्या खाएं और क्या न खाएं )

5. बवासीर में ज्योतिष्मती के प्रयोग से लाभ (Malkangni Benefits in Piles Treatment in Hindi) : ज्योतिष्मती के बीजों को पानी में पीस कर गुदा के मस्सों पर लेप करने से खूनी बवासीर का रक्त गिरना बन्द हो जाता है।

6. दाद ठीक करने में मदद करता है ज्योतिष्मती (Malkangni Benefits in Ringworm Treatment in Hindi) : ज्योतिष्मती के बीज 20 ग्राम और काली मिर्च 10 ग्राम – दोनों को पीस कर महीन चूर्ण कर लें और नारियल के तेल में मिला कर दाद पर लगाने से दाद ठीक होती है। ( और पढ़े – एक्जिमा के घरेलू उपचार )

7. सिरदर्द में फायदेमंद ज्योतिष्मती तेल ( Malkangni Oil Benefits in Headache in Hindi) : ज्योतिष्मती और बादाम का तेल 25-25 मि.लि. ले कर मिला लें और शीशी में भर लें। प्रतिदिन प्रातः खाली पेट एक बताशे में 2 बूंद तेल टपका कर बताशा खा कर ऊपर से मिश्री मिला कर दूध पी लें। एक माह सेवन करने से पुराना सिर दर्द और आधा शीशी का दर्द दूर हो जाता है। बादाम का तेल (हमदर्द का बना हुआ) ‘बादाम रोगन’ के नाम से बाज़ार में मिलता है।

8. बेरी-बेरी रोग में ज्योतिष्मती तेल से फायदा (Malkangni Oil Benefits to Cure Thiamine deficiency in Hindi) : यह रोग दक्षिणी भारत में विशेष रूप से होता पाया जाता है। ज्योतिष्मती इस रोग को दूर करने वाली एक उत्तम औषधि है। इसके बीजों का चूर्ण 2-2 रत्ती ( 1 रत्ती =   0.1215 ग्राम ) सुबह शाम दूध के साथ फांकने या एक बताशे में इसके तेल की 2-2 बूंद टपका कर खाने से यह रोग दूर हो जाता है।

9.स्वास्थ्य रक्षा करने में ज्योतिष्मती करता है मदद (Malkangni Helps in Protecting Health) : ज्योतिष्मती के बीज, वचा और शुद्ध गन्धक- तीनों 50-50 ग्राम, महीन चूर्ण कर मिला लें। प्रतिदिन सुबह-शाम 2-2 रत्ती चूर्ण ताज़े मख्खन में मिला कर एक माह सेवन कर लें। यह योग शरीर और स्वास्थ्य की रक्षा करने वाला, पुष्ट और फुर्तीला करने वाला, नेत्रज्योतिवर्द्धक, स्नायविक संस्थान को बलवान बनाने वाला तथा क्षय, आंत्रशोथ और स्नायविक दौर्बल्य को दूर करने वाला योग है।

10. अफीम छुड़ाना में लाभकारी है ज्योतिष्मती का प्रयोग(Use of Malkangni is Beneficial in Ridding Opium) : ज्योतिष्मती के पत्तों का 2-2 चम्मच रस, सुबह शाम, आधा कप पानी में डाल कर पीने से कुछ दिनों में अफीम खाने के प्रति अरुचि हो जाती है। जहां ताज़े पते उपलब्ध होते हों वहां रस निकाल कर प्रयोग करें और जहां ताज़े पत्ते उपलब्ध न हों वहां इसके सूखे पत्तों का काढ़ा बना कर, रस की जगह प्रयोग करें। काढ़ा छान लें और 2-2 चम्मच सुबह शाम आधा कप पानी में डाल कर पिएं।

11. नपुंसकता नाशक ज्योतिष्मती तेल का प्रयोग : दुराचरण और कुसंगति के प्रभाव से जो युवक नाना प्रकार से वीर्य का नाश कर नपुंसकता से ग्रस्त हो जाते हैं, जिनके लिंगेन्द्रिय का विकास रुक जाता है, लिंगेन्द्रिय शिथिल और वक्र आकार की हो जाती है, उसके ऊपर नीली नसें उभर आती हैं उनके लिए ज्योतिष्मती का निम्नलिखित प्रयोग वरदान सिद्ध होता है।

ज्योतिष्मती का तेल , श्री गोपाल तेल , वाजीकरण तिला और अश्वगन्ध तेल – चारों 10-10 मि.लि. और लौंग का तेल 2 मि.लि. सबको खूब अच्छी तरह मिला कर शीशी में भर लें। रात को सोते समय, इस तेल की 4-5 बूंद हथेली पर टपका कर, अंगुलियों से लिंगेन्द्रिय की ऊपरी त्वचा पर (शिश्नमुण्ड को छोड़ कर) फैलाते हुए लगा दें फिर अंगुली से हलकी-हलकी मालिश कर तेल सुखा दें। इस प्रयोग से लिंगेन्द्रिय के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं।

यह प्रयोग करते हुए ‘ज्योतिष्मती रसायन’ 1-1 रत्ती सुबह शाम दूध के साथ लेते रहें। दोनों प्रयोग एक माह तक करना पर्याप्त है।खटाई, खट्टे पदार्थ, तले हुए और तेज़ मिर्च मसालेदार पदार्थों का सेवन न करें। ( और पढ़े – नपुंसकता के कारण ,दवा व उपचार )

12. शरीर को ताकतवर और शक्तिशाली बनाता है ज्योतिष्मती : गाय के घी में लगभग 250 ग्राम मालकांगनी को भूनकर , इसमें 250 ग्राम मिश्री मिलाकर चूर्ण बना लें। गाय के दूध के साथ सुबह-शाम इस चूर्ण को लगभग 6 ग्राम की मात्रा में खाने से मनुष्य के शरीर में बल वीर्य का विकास होता है। लगभग 40 दिनों तक इस चूर्ण का सेवन करना चाहिए।

13. नाखूनों का अन्दर की ओर बढ़ना ठीक करता है मालकांगनी का उपयोग : अच्छी तरह से मालकांगनी (ज्योतिष्मती) के बीजों को पीसकर उस लेप को नाखून पर लगाने से नाखून की जलन व दर्द से राहत मिलती है।

14. गठिया रोग में मालकांगनी का उपयोग फायदेमंद (Jyotishmati Uses to Cure Arthritis Disease in Hindi) : 10 ग्राम अजवायन और 20 ग्राम मालकांगनी के बीज को पीस लें अब इस चूर्ण को रोजाना 1 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम खाने से गठिया रोग (घुटनों का दर्द) में लाभ होता है।

15. मासिक-धर्म अवरोध ठीक करे मालकांगनी का प्रयोग (Jyotishmati Benefits in Cures Menstrual Disease in Hindi) : विजयसार की लकड़ी तथा मालकांगनी के पत्ते को गाय के दूध में पीसकर पीने से बंद हुआ मासिक-धर्म फिरसे दुबारा शुरू हो जाता है।

16. मासिक-धर्म अवरोध:

  • मालकांगनी के पत्ते तथा विजयसार की लकड़ी दोनों को दूध में पीस-छानकर पीने से बंद हुआ मासिक-धर्म दुबारा शुरू हो जाता है।
  • मालकांगनी के पत्तों को पीसकर तथा घी में भूनकर महिलाओं को खिलाना चाहिए। इससे महिलाओं का बंद हुआ मासिक-धर्म दुबारा शुरू हो जाता है।
  • मालकांगनी के पत्ते, विजयसार, सज्जीक्षार, बच को ठंडे दूध में पीसकर स्त्री को पिलाने से मासिकस्राव (रजोदर्शन) आने लगता है।

17. गोली लगने पर: गोली लगे घाव को रोजाना मालकांगनी (ज्योतिष्मती) के बीजों को पीसकर लेप करने से घाव बहुत जल्दी ही भर जाता है।

18. वीर्य रोग : 40 ग्राम मालकांगनी का तेल, 80 ग्राम घी तथा 120 ग्राम शहद को मिलाकर कांच के बर्तन में रख दें। सुबह-शाम 6 ग्राम दवा खाने से नपुंसकता और टी.बी. के रोग में लाभ मिलता है।

19. एक्जिमा: ज्योतिष्मती (मालकांगनी) के पत्तों को कालीमिर्च के साथ पीसकर लेप करने से एक्जिमा समाप्त हो जाता है।

20. दिमाग के कीड़े:

  • पहले दिन मालकांगनी का 1 बीज, दूसरे दिन 2 बीज और तीसरे दिन 3 बीज इसी तरह से 21 दिन तक बीज बढ़ायें और फिर इसी तरह घटाते हुए एक बीज तक ले आएं। इसके बीजों को निगलकर ऊपर से दूध पीने से दिमाग की कमजोरी नष्ट हो जाती है।
  • लगभग 3 ग्राम मालकांगनी के चूर्ण को सुबह और शाम दूध के साथ खाने से स्मरण शक्ति (याददाश्त) बढ़ती है।

21. गठिया रोग:

  • 20 ग्राम मालकांगनी के बीज और 10 ग्राम अजवायन को पीस-छानकर चूर्ण बनाकर रोजाना 1 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम खाने से गठिया रोग (घुटनों का दर्द) में आराम होता है।
  • 10-10 ग्राम मालकांगनी, काला जीरा, अजवाइन, मेथी और तिल को लेकर पीस लें फिर इसे तेल में पकाकर छानकर रख लें। इस तेल से कुछ दिनों तक मालिश करें। इससे गठिया रोग (घुटनों का दर्द) ठीक हो जाता है।

22. चालविभ्रम (कलाया खन्ज) : ज्योतिष्मती (मालकांगनी) के बीजों के काढ़े में 2 से 4 लौंग डालकर सेवन करना चाहिए। इसका 40 मिलीलीटर काढ़ा सुबह-शाम सेवन करने से चालविभ्रम रोग में लाभ पहुंचता है।

23. उरूस्तम्भ (जांघ का सुन्न होना): 10-15 मालकांगनी के तेल की बूंद के सेवन से शरीर की सुन्नता दूर हो जाती है और यह हड्डियों में पीव को खत्म करता है।

24. नाखूनों का अन्दर की ओर बढ़ना: ज्योतिष्मती के बीजों को अच्छी तरह से पीसकर उसका लेप नाखून पर लगाने से नाखून की जलन व दर्द में राहत मिलती है।

25. नाखूनों का जख्म: ज्योतिष्मती (मालकांगनी) के बीजों को पीसकर नाखून पर लेप करने से नाखूनों का जख्म ठीक होता है।

26. मिर्गी (अपस्मार): मालकांगनी के तेल में कस्तूरी को मिलाकर रोगी को चटाने से मिर्गी का दौरा आना बंद हो जाता है।

27. शरीर का सुन्न पड़ जाना: 10 से 15 बूंद मालकांगनी के तेल का सेवन करने से शरीर की सुन्नता दूर हो जाती है।

28. लिंग वृद्धि: भुने सुहागे को पीसकर मालकांगनी के तेल में मिलाकर लिंग पर सुबह-शाम मालिश करने से लिंग में सख्तपन और मोटापन बढ़ता है।

29. शरीर का ताकतवर और शक्तिशाली बनाना: लगभग 250 ग्राम मालकांगनी को गाय के घी में भूनकर, इसमें 250 ग्राम शक्कर मिलाकर चूर्ण बना लें। अब इस चूर्ण को लगभग 6 ग्राम की मात्रा में गाय के दूध के साथ सुबह-शाम खाने से मनुष्य के शरीर में ताकत का विकास होता है। इसका सेवन लगभग 40 दिनों तक करना चाहिए।

30. सफेद दाग: मालकांगनी और बावची के तेल को बराबर मात्रा में मिलाकर एक शीशी में रख लें, इसको सफेद दागों पर रोजाना सुबह-शाम लगाने से लाभ मिलता है।

31. अफीम की आदत छुड़ाने के लिए: मालकांगनी के पत्तों का रस एक चम्मच की मात्रा में 2 चम्मच पानी के साथ दिन में 3 बार रोगी को पिलाते रहने से अफीम की गन्दी आदत से छुटकारा पाया जा सकता है।

32. दाद: मालकांगनी को कालीमिर्च के बारीक चूर्ण के साथ पीसकर दाद पर मालिश करने से कुछ ही दिनों में दाद ठीक हो जाता है।

33. खूनी बवासीर: इसके बीजों को गोमूत्र (गाय के पेशाब) में पीसकर खुजली वाले अंग पर नियमित लगाने से खूनी बवासीर में आराम मिलता है।

34. खुजली: मालकांगनी के बीजों को गोमूत्र में पीसकर खुजली वाले अंग पर नियमित लगाने से खुजली में लाभ मिलता है।

35. बेरी-बेरी:

  • 1 बताशे में मालकांगनी के बीजों को पानी में पीसकर बनी लुगदी (पेस्ट) को मस्सों पर लगाते रहने से खून का बहाव कम होता है।
  • शुरुआती बेरी-बेरी रोग में ज्योतिष्मती (मालकांगनी) तेल की 10 से 15 बूंद, दूध या मलाई के साथ मिलाकर सुबह-शाम पीने से यह रोग दूर हो जाता है।
  • ज्योतिष्मती (माल कांगनी) के बीजों को सोंठ के साथ खाने से लाभ होता है। शुरुआत में 1 बीज और इसके बाद रोजाना 1-1 बीज की संख्या बढ़ाते हुए 50 बीज तक, सोंठ के साथ 50 दिन तक खायें। इसके बाद 50 वें दिन से प्रत्येक दिन इसके बीजों की 1-1 संख्या कम करते हुए 1 बीज तक, सोंठ के साथ खायें। ज्योतिष्मती (मालकांगनी) को खाने से पहले पेशाब की मात्रा बढ़ती है फिर धीरे-धीरे यह सूजन कम करती है। धीरे-धीरे संवेदनशीलता वापस आ जाती और शरीर की नसे स्वस्थ्य हो जाती हैं। ध्यान रहे : ज्योतिष्मती तेल या ज्योतिष्मती बीज में से किसी एक का ही प्रयोग करें।

36. दमा, श्वास: मालकांगनी के बीज और छोटी इलायची को बराबर मात्रा में पीसकर आधा चम्मच की मात्रा में शहद के साथ सुबह-शाम खाने से दमा के रोग में आराम मिलता है।

37. बुद्धि और स्मृति बढ़ना: मालकांगनी के बीज, बच, देवदारू और अतीस आदि का मिश्रण बना लें। रोज सुबह-शाम 1 चम्मच घी के साथ पीने से दिमाग तेज और फूर्तीला बनता है। मालकांगनी तेल की 5-10 बूंद मक्खन के साथ सेवन करने से भी लाभ मिलता है।

38. अनिद्रा (नींद का कम आना): मालकांगनी के बीज, सर्पगन्धा, जटामांसी और मिश्री को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें। इसे 1 चम्मच की मात्रा में शहद के साथ खाने से अनिद्रा रोग (नींद का कम आना) में राहत मिलती है।

39. नेत्र ज्योतिवर्द्धक: मालकांगनी के तेल की मालिश पैर के तलुवों पर रोजाना करते रहने से आंखों की रोशनी बढ़ जाती है।

40. सिर में दर्द: मालकांगनी का तेल और बादाम के तेल को 2-2 बूंद की मात्रा में सुबह खाली पेट एक बताशे में डालकर खा लें और ऊपर से 1 कप दूध पियें। मालकांगनी का लगातार सेवन करने से पुराने सिर का दर्द और आधासीसी (माइग्रेन) के दर्द में आराम मिलता है।

41. जीभ और त्वचा की सुन्नता: मालकांगनी (ज्योतिष्मती) के बीज पहले दिन 1 बीज तथा दूसरे रोज से 1-1 बीज बढ़ाते हुए 50 वें दिन में 50 बीज खायें तथा 50 वें दिन से 1-1 बीज कम करते हुए 1 बीज की मात्रा तक खायें। इसके प्रयोग से मूत्र की मात्रा बढ़ जाती है लेकिन इससे किसी भी प्रकार की हानि नहीं होती है तथा जीभ और त्वचा की सुन्नता ठीक होती है।

42. नपुंसकता:

  • मालकांगनी के तेल की 10 बूंदे नागबेल के पान पर लगाकर खाने से नपुंसकता दूर हो जाती है। इसके सेवन के साथ दूध और घी का प्रयोग ज्यादा करें।
  • मालकांगनी के तेल को पान के पत्ते में लगाकर रात में शिश्न (लिंग) पर लपेटकर सो जाएं और 2 ग्राम बीजों को दूध की खीर के साथ सुबह-शाम सेवन करें। इससे नपुंसकता के रोग में लाभ मिलता है।
  • 50 ग्राम मालकांगनी के दाने और 25 ग्राम शक्कर को आधा किलो गाय के दूध में डालकर आग पर चढ़ा दें। जब दूध का खोया बन जाये तब इसे उतारकर मोटी-मोटी गोली बनाकर रख लें और रोज 1-1 गोली सुबह-शाम गाय के दूध के साथ खाये। इससे नपुंसकता दूर होती है।
  • मालकांगनी के बीजों को खीर में मिलाकर खाने से नपुंसकता मिट जाती है।

43. बंद माहवारी: मालकांगनी के बीज 3 ग्राम की मात्रा में लेकर गर्म दूध के साथ सेवन करने से अधिक दिनों का रुका हुआ मासिक-धर्म भी जारी हो जाता है।

44. कमजोरी:

  • मालकांगनी के बीजों को दबाकर निकाला हुआ तेल, 2 से 10 बूंद को मक्खन या दूध में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से दिमाग तेज होता है और कमजोरी मिट जाती है।
  • मालकांगनी के बीज को गाय के घी में भून लें। फिर इसमें इसी के समान मात्रा में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम एक कप दूध के साथ सेवन करें। इससे शरीर की कमजोरी दूर हो जाती है।

ज्योतिष्मती से नुकसान : Side Effect of Jyotishmati in Hindi

  • ज्योतिष्मती के उपयोग से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें ।
  • ज्योतिष्मती (मालकांगनी) के बीजों को अधिक मात्रा में सेवन करने से उल्टी व दस्त जैसी परेशानी हो सकती है।
  • गर्म प्रकृति के व्यक्तियों के लिए मालकांगनी का सेवन हानिकारक हो सकता है।

(अस्वीकरण : ये लेख केवल जानकारी के लिए है । myBapuji किसी भी सूरत में किसी भी तरह की चिकित्सा की सलाह नहीं दे रहा है । आपके लिए कौन सी चिकित्सा सही है, इसके बारे में अपने डॉक्टर से बात करके ही निर्णय लें।)

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