मांसपेशियों का तनाव और जकड़न दूर करने के लिए सरल व्यायाम

Last Updated on October 28, 2020 by admin

मांसपेशियों की अकड़न को दूर करने के लिए सरल व्यायाम करना एक उत्तम और समझदार उपाय है।

शुरुआत करें, बैठकर :

लेटकर शिथिलीकरण करने से बेहतर है हम बैठकर करने का अभ्यास करें। बैठकर करना ज़्यादा आसान भी है और इसे हम दिन में किसी भी वक्त, काम के बीच में आसानी से कर सकते हैं। इसमें ना विशेष वातावरण, विशेष अवस्था, विशेष समय की आवश्यकता होती है और ना किसी विशेष तज्ञ के मार्गदर्शन की। इसे हम थोड़ी सूझ-बूझ से समझकर कर सकते हैं।

सबसे पहले अपनी पीठ को सीधा रखकर ऐसी कुर्सी पर बैठें, जो आपके मुताबिक आरामदायक हो। अपने पैरों को ज़मीन पर ठीक से रखें ताकि आपको बैठने में आराम महसूस हो (पैरों को मोड़कर या ज़मीन पर से ऊपर न रखें)। अब अपने हाथों को अपने गोद में रखें। अपनी आँखों को बंद करें ताकि आप अपने अंदर की संवेदना को समझ पाएँ। अपने आपको जितना रिलैक्स करना चाहें कर लें। अब हम धीरे-धीरे एक-एक शिथिलीकरण की क्रिया के बारे में जानेंगे।

( और पढ़े – व्यायाम कब ,कैसे और क्यों करें ? )

मांसपेशियों में जकड़न दूर करे शिथिलीकरण क्रिया (Manspeshiyo ki jakdan kaise dur kare)

1) हाथों का व्यायाम : सबसे पहले अपने गोद में रखे हाथों पर ध्यान दें। उन्हें वहीं रहने दें और अपनी मुट्ठियों को कसकर जकड़ें। केवल मुट्ठी जकड़े हाथों की बाकी मांसपेशियों को तनाव न दें। अब अपने हाथ और हथेलियों के तनाव को महसूस करें । देखें कि कहाँ की मांसपेशियों पर तनाव आया है। अब फिर से पूरी तरह शिथिल (Relax) हो जाएँ। अब इस बात का अभ्यास करें कि जब मुट्ठी बंद थी तब का तनाव कैसा महसूस हुआ और शिथिलीकरण के बाद क्या महसूस हुआ।

2) भौंहो का व्यायाम : अब अपने भौंहो को तनाव दें (Raise करें) और उन मांसपेशियों को महसस करें जिन पर तनाव आय है। अब माथे पर आए बल को आधा ही कम करें, बाकी आधे को तना रहने दें। कुछ क्षणों बाद केवल थोड़ा सा ही तनाव रहने दें, बाकी शिथिल कर लें। जागरूकता बढ़ाने के लिए यह एक उत्तम व्यायाम है। अब भौहों को पूरी तरह शिथिल कर लें और शिथिल होने के बाद के अच्छे फिलींग को महसूस करें। इस तरह 3 बार दोहराएँ, हर बार आप महसूस करेंगे कि आपको जो भी तनाव है, वह अंदर से कम-कम हो रहा है।

आप दिनभर में कितनी बार तनाव से अपने माथे पर बल लाते हैं, जिससे आपके साँसों पर भी दुष्पप्रभाव होता है। यह व्यायाम उस दुष्प्रभाव को खत्म करने में सहायक होगा।

3) आँखों का व्यायाम : अपनी आँखों को जोर से बंद करें। अब आप अपने आँखों के सर्कल पर तनाव महसूस करेंगे। रिलैक्स हो जाएँ, पूरा तनाव खत्म करें। आँखों को बंद रखते हुए अपने eyelids को धीरे से शिथिल करें।

manspeshiyo ki jakdan kaise dur kare

आँखों को बंद रखते हुए आँखों की पुतलियों को दाईं तरफ गोल घुमाएँ। इससे आँखों पर दबाव आ सकता है इसलिए अपनी आँखों को अच्छी तरह घुमाएँ ताकि मांसपेशियों का तनाव महसूस हो। किंतु बहुत ज़्यादा जोर न लगाएँ। मांसपेशियों के तनाव को महसूस करें। इसी प्रकार आँखों की पुतलियों को बाएँ, ऊपर-नीचे घुमाएँ । अब फिर से दाईं तरफ घुमाएँ।

इस व्यायाम को 3 बार दोहराएँ। तनाव को महसूस करें और धीरे-धीरे हर मांसपेशियों को शिथिल कर आँखें खोलें। इससे दिनभर आँखों पर जो अनचाहा तनाव आता है, उससे छुटकारा मिलता है। नियमित करने से आँखों का स्वास्थ्य सही बना रहता है।

4) होठों का व्यायाम : अब अपने होठों को सिकुड़ लें। मुँह के मांसपेशियों पर आए तनाव पर ध्यान दें। धीरे से शिथिल करें।

5) जबड़े का व्यायाम : अपने दाँतों को भींच लें। दाँतों को भींचते समय होठों को तनावरहित रहने दें। जबड़े के मांसपेशियों पर आए तनाव को महसूस करें, इसके अलावा मस्तिष्क पर आए तनाव को भी देखें । अब अपने जबड़े को धीरे से रिलैक्स करें और दाँत सामान्य दशा में लाएँ।

6) गरदन का व्यायाम : अब ऐसी कल्पना करें कि आप बहुत आराम से गले से आवाज निकाल रहे हैं, जिसका कंपन पूरे शरीर में महसूस हो रहा है। अब गले की मांसपेशियों को तनाव दें, जिससे आपकी गरदन पीछे की तरफ झुके । इसी तरह मांसपेशियों को भींचकर सिर को आगे की तरफ झुकाने की कोशिश करें जैसे आप एक मांसपेशी को दूसरे के विरूद्ध तनाव दे रहे हों। इसी के साथ अपनी गरदन को दाएँ, बाएँ घुमाएँ। अब रुकें। अपने गरदन के पूरे मांसपेशियों को शिथिल करें। अपने गरदन को इतनी गहराई से शिथिल करें कि यदि हवा का मंद झोंका भी आए तो आपकी गरदन दाएँ, बाएँ झूल सके।

7) कंधों का व्यायाम : अपने कंधों के दोनों कोनों को इस तरफ सामने झुकाएँ मानो आप उन्हें एक-दूसरे से स्पर्श करना चाहते हों। अब रिलैक्स हो जाएँ और अपने कंधों को पीछे की तरफ इस तरह ढकेलें मानो आप उन्हें पीछे से एक-दूसरे से छूना चाहते हैं। रिलैक्स हो जाएँ, सिर्फ यह महसूस करें कि आपके कंधे और पीठ का ऊपरी हिस्सा पूर्ण तनाव रहित शिथिल हो गया है।

हम दिन रात जिस बोझ के तले अपने आपको दबाते हैं जैसे चिंता, काम का बोझ, ज़िम्मेदारी का बोझ, पैसे कमाने का बोझ इत्यादि सभी बोझ उतर जाएँगे। कंधों के स्वास्थ्य के लिए यह सरल व्यायाम अत्यंत कारगर होता है।

8) पैरों का व्यायाम : अपने पैरों के मांसपेशियों पर इतना तानें कि घुटने जुड़ जाएँ। उसी प्रकार मांसपेशियों पर इस तरह दबाव डालें कि आपको thighs ऊपर-नीचे हो और बाद में पैरों को एक दूसरे पर क्रॉस करें।

सारे तनावों का अभ्यास करें। रिलैक्स हो जाएँ और अब उन मांसपेशियों को तानें और ढीला छोड़ दें। महसूस करें कि जैसे-जैसे हम मांसपेशियों पर धीरे-धीरे दबाव डालते हैं हमें और आराम महसूस होते जाता है।
अब अपने तलुओं के अग्रभाग को नीचे की तरफ खिंचाव दें ताकि वे आपके पैरों के समकक्ष सीधे आएँ। अब अपने पिंडलियों पर आए तनाव को महसूस करें और रिलैक्स हो जाएँ।
अब अपने पैरों को उठाकर जाँघों पर स्पर्श करने का प्रयत्न करें। जाँघों के मांसपेशियों पर आए तनाव को देखें। रिलैक्स और शिथिल हो जाएँ।

जब आपका शरीर पूरा शिथिल हो जाए तब सबसे महत्वपूर्ण होता है उसका फिर से कार्यान्वित होना। अपने पैरों को ज़मीन पर ठीक से जमा लें । 5 लंबी साँसे लें और अपने आपको पूरी तरह तरोताज़ा और जागरूक महसूस करें। अपनी अंगुलियों और पैरों के अग्रभाग को हिलाएँ। इस तरह शिथिलीकरण सीखना एक अभ्यास है। अभ्यास हमें परफेक्ट बनाता है।

शिथिलीकरण (व्यायाम) कब करें ? :

  • जब आपका पेट खाली हो तब यह शिथिलीकरण की टेक्निक करें।
  • इसे करना महत्वपूर्ण है, कैसे होगा इसकी चिंता न करें।
  • अभ्यास आपकी सहायता करेगा।

शिथिलीकरण (व्यायाम) के फायदे :

  1. शारीरिक, मानसिक तनाव खत्म होता है।
  2. मांसपेशियाँ लचीली बनती हैं।
  3. अनावश्यक चरबी का संचय नहीं होता।
  4. तन-मन तरोताज़ा होता है।
  5. मस्तिष्क की पेशियों को ऑक्सीजन पहुँचता है, सकारात्मक संदेश पहुँचता है।

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