मासिक धर्म (पीरियड्स) के समय क्या करें क्या न करें

Last Updated on January 26, 2023 by admin

मासिक धर्म (पीरियड्स) क्या है ? : 

        सामान्य भाषा में इसे पीरियड (डेट) के नाम से जाना जाता है। इसे रजोदर्शऩ भी कहते हैं। इस अवस्था में गर्भाशय से योनिमार्ग द्वारा हर महीने लाल रंग का रक्त का स्राव होता है। यह शुरू होना ही लड़की की युवावस्था का चिन्ह होता है।

इसके आने से इस बात का भी पता लग जाता है कि लड़की में डिम्ब का पकना तथा डिम्ब का निष्कासन होना शुरू हो गया है। अब यदि ऐसी लड़की से कोई पुरुष मैथुन क्रिया करता है तो वह गर्भवती हो सकती है। लेकिन हम आपको यह बता देना चाहते हैं कि जब तक पुरुष का शुक्राणु स्त्री के डिम्ब से मिला नहीं होता है तब तक स्त्री में हर महीने पकने वाला डिम्ब अपने आप ही नष्ट हो जाता है तथा योनि द्वारा रक्त व थक्कों के रूप में शरीर से बाहर निकल जाता है, इसी क्रिया को मासिक धर्म कहते हैं जो चार से पांच दिनों तक आता है।

मासिक धर्म (पीरियड या माहवारी) आने की सही उम्र क्या है ? : 

जब कोई लड़की 12 से 14 वर्ष की हो जाती है तो उसका मासिक धर्म आना शुरू हो जाता है। हमारे देश में यह अधिकतर 14 वर्ष की आयु की लड़कियों में शुरू हो जाता है। ठंडे देशों में इसका अधिकतर शुरू होने का समय 16 वर्ष की आयु होता है। जो लड़कियां युवावस्था की शुरुआत में बहुत अधिक खटाई, चूर्ण, अंडा, मांस, मछली या गर्म पदार्थों का भोजन में उपयोग करती हैं या जो लड़कियां कामोत्तेजक अधिक बाते सोचती हैं या बाते सुनती है या उत्तेजित फिल्मे देखती हैं और कामुक उपन्यास पढ़ती हैं, उनका मासिक धर्म जल्दी ही आरम्भ हो जाता है। 

मासिक धर्म (पीरियड) कितने उम्र में बंद होता है ? : 

किसी-किसी लड़की को यह एक बार आता है और फिर कुछ महीने बाद आता है, लेकिन कुछ समय के बाद यह अपने आप ही नियमित रूप से प्रत्येक महीने आने लगता है। यह प्रायः 14 से 45 वर्ष की आयु तक नियमित रूप से हरेक महीने या कुछ दिन घट बढ़कर अनियमतता से आता रहता है। गर्भ की स्थिति के समय में और बच्चा जब तक दूध पीता रहता है तब तक यह अधिकतर आना बंद ही रहता है।

        कई अवस्थाओं में तो यह भी देखा गया है कि दूध पिलाने वाली स्त्री को यह आ जाया करता है। 40 से 50 वर्ष से अधिक आयु पर यह अपने आप ही धीरे-धीरे दो तीन वर्ष में बंद हो जाता है और फिर कभी नहीं आता है।

मासिक धर्म (पीरियड) कितने दिन का होता है ? : 

        दो मासिक-धर्मों के बीच के समय में 28 दिन का अंतर होता है। किसी-किसी को दो-तीन दिन कम या ज्यादा हो सकता है। इसके होने का समय तीन से चार दिन का होता है। इससे अधिक या कम समय होने या नियमपूर्वक उचित दिनों के अंतर से न आना, थोड़ी या अधिक मात्रा में आना इत्यादि अनियमितता रोग कहलाता है। यदि इस प्रकार की स्थिति प्रकट हो तो तुरंत ही किसी स्त्री चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। नियम से दो या चार दिन अधिक या दो, चार दिन कम अंतर रहना रोग नहीं होगा। इसका रंग लाल तथा थोड़े थक्के के रूप में जमा होता है।

मासिक धर्म (पीरियड) आने से पूर्व दिखने वाले लक्षण  : 

        मासिक-धर्म आने के एक से दो दिन पहले ही स्त्री में इस प्रकार के लक्षण दिखाई देने लगते हैं- शरीर का भारी लगना, आलस्य़ होना, भूख की कमी आदि। कुछ स्त्रियों को सिर में दर्द भी होता है और साधारण बुखार भी रहता है।

        जो स्त्री कोमल अंगों वाली, मोटी, आराम अधिक करने वाली, कामुक बाते सुनने वाली, सेक्सी फिल्मे देखने वाली या यौन उत्तेजक उपन्यास पढ़ने वाली होती है या जो स्त्री कब्ज या अजीर्ण रोग से पीड़ित होती है, उनका जब मासिक-धर्म आता है तो उनकी कमर, कूल्हे तथा पेडू पर दर्द होता है तथा हाथ-पैर टूटते हैं और जब तक खुलकर मासिक-धर्म नहीं आ जाता है तब तक उसे इस प्रकार के कष्ट होते रहते हैं।

        स्त्रियों की अधिकतर बीमारियां मासिक धर्म  में किसी प्रकार की गड़बड़ी हो जाने के कारण होती हैं जिसके कारण से कई प्रकार के कष्ट सहने पड़ते हैं।

मासिक धर्म के समय क्या करें क्या न करें : 

मासिक धर्म  के समय में क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए –  

  • स्त्रियों को कभी भी मासिक धर्म  के समय में अधिक चलना-फिरना, चिंता, दुःख, शोक, घर का काम-काज करना, झाड़ू लगाना, ठंडे पानी से चौका लगाना, मुंह-हाथ धोना तथा स्नान नहीं करना चाहिए।
  • ठंडी या बादी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • स्त्री को ठंडी हवा या वर्षा में नहीं निकलना चाहिए।
  • कोई भी मेहनत वाला काम नहीं करना चाहिए।
  • मासिक धर्म  आने पर स्त्री को अधिक से अधिक आराम करना चाहिए जितना हो सके लेटकर समय का गुजारा करना चाहिए।
  • इस समय में स्त्री को कभी भी शर्म नहीं करनी चाहिए क्योंकि शर्म के मारे कोई ऐसा काम करें जिससे अधिक कष्ट हो तो इससे शरीर के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा।
  • इन दिनों में स्त्री यदि चूल्हा-चौका न करें तो अधिक लाभ होगा।
  • मासिक धर्म  के समय में स्त्री को इसलिए नहीं स्नान करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से श्वेत प्रदर रोग होने का खतरा होता है तथा अधिक कष्ट भी होने का डर लगा रहता है।
  • जब लड़की 11 से 12 वर्ष की होने वाली हो तो उसकी माता, भाभी, बड़ी बहन या कोई जानकार स्त्री जो उसके नजदीक रहती हो उसे बता देना चाहिए कि मासिक धर्म  क्या होता है। उन्हें यह भी बताना चाहिए कि साफ कपड़े से यौनांगों की सफाई कैसे करें।
  • लड़की को मासिक धर्म  में क्या-क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए यह भी अच्छी तरीके से बता देना चाहिए क्योंकि जब भी लड़की को मासिक धर्म  शुरू होता है तो घबराकर हैरान परेशान हो जाती है।

मासिक धर्म  के बारे में माता, बड़ी बहन या भाभी आदि को बताने में संकोच नहीं करना चाहिए क्योंकि यदि वे घर में ही अपनी लड़की को मासिक धर्म  के बारे में सही व विस्तार रूप से जानकारी दे देंगे तो उसका भविष्य व स्वास्थ्य मानसिक व शारीरिक रूप से पूरी तरह से ठीक रहेगा।

2 thoughts on “मासिक धर्म (पीरियड्स) के समय क्या करें क्या न करें”

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