पंचनिम्बादि वटी के फायदे ,घटक द्रव्य ,गुण ,उपयोग और नुकसान | Panchanimbadi Vati ke Fayde aur Nuksan in Hindi

पंचनिम्बादि वटी क्या है ? : Panchanimbadi Vati in Hindi

पंचनिम्बादि वटी टैबलेट के रूप में उपलब्ध एक आयुर्वेदिक दवा है। इसका उपयोग सभी प्रकार के त्वचारोग ,दाद, खाज-खुजली, त्वचा में जलन के साथ खुजली होना, एक्जीमा (सूखा या गीला), चकत्ते होना आदि चर्म रोगों के उपचार में किया जाता है ।

त्वचा रोग होने का एक कारण रक्त में खराबी होना भी होता है। स्वच्छ वातावरण, स्वच्छ वायुमण्डल और स्वच्छ शुद्ध पदार्थों का सेवन करने से त्वचा रोग और रक्त विकार पैदा ही नहीं होते। किसी भी कारण वश त्वचा रोग हो ही जाए तो उस रोग को दूर करने के लिए एक सफल सिद्ध उत्तम आयुर्वेदिक योग है-पंचनिम्बादि वटी।

पंचनिम्बादि वटी के घटक द्रव्य : Panchanimbadi Vati Ingredients in Hindi

व्याधि हरण रसायन – 25 ग्राम
रजत(चांदी) भस्म – 10 ग्राम
गन्धक रसायन – 100 ग्राम
प्रवाल पिष्टी – 50 ग्राम
पंच निम्ब चूर्ण – 50 ग्राम
आरोग्यवर्द्धिनी वटी – 50 ग्राम

भावना द्रव्य –

सारिवा -100 ग्राम
मंजिष्ठा -100 ग्राम
चोपचीनी -100 ग्राम
खैर – 50 ग्राम
कांचनार – 50 ग्राम

पंचनिम्बादि वटी बनाने की विधि :

पहले व्याधि हरण रसायन आदि सभी छः द्रव्यों को खरल में डाल कर खूब घुटाई करके, सब द्रव्यों को एक जान कर लें। इस के बाद भावना द्रव्यों को मोटा मोटा जौकुट कूट कर मिला लें। सब द्रव्यों की मात्रा से चौगुनी मात्रा यानी 1600 मि.लि. पानी में पांचों द्रव्य डाल कर उबालें और काढ़ा करें फिर घनसत्व बना कर खरल में डाल कर खूब घुटाई करें। खूब अच्छी घुटाई करके चार-चार रत्ती (आधा-आधा ग्राम) की गोलियां बना कर सुखा लें।

उपलब्धता : यह योग इसी नाम से बना बनाया आयुर्वेदिक औषधि विक्रेता के यहां मिलता है।

मात्रा और सेवन विधि : Dosage of Panchanimbadi Vati

2-2 गोली सुबह शाम पानी के साथ लें। लाभ हो जाने यानी त्वचा रोग दूर हो जाने के बाद भी एक
मास तक सेवन करते रहें ताकि रोग जड़ से नष्ट हो जाए और पुनः वापिस न लौट सके।

पंचनिम्बादि वटी के उपयोग : Panchanimbadi Vati Uses in Hindi

☛ पंचनिम्बादि वटी त्वचा रोगों को नष्ट करने के लिए यह आयुर्वेद की उत्तम महान औषधि है।
☛ इस औषधि के सेवन से मुंह पर होने वाले मुंहासे, त्वचा की खुजली, त्वचा पर होने वाली फुसियां या दानें, पित्ती उछलना, दाद, एक्ज़ीमा आदि त्वचा रोग नष्ट होते हैं, त्वचा मुलायम, स्वच्छ और कान्तिमय होती है।
☛ पंचनिम्बादि वटी बालों में होने वाली फियास (रूसी) को दूर करता है ।
☛ उपदंश, पूयमेह और भगन्दर जैसे रोगों की चिकित्सा में भी यह औषधि लाभ करने में सहायक सिद्ध होती है।
☛ त्वचा में किसी भी प्रकार की एलर्जी से कष्ट होता हो तो इस औषधि के सेवन से यह एलर्जी दूर हो जाती है। कुछ त्वचा रोगों में, इस वटी के प्रयोग के बारे में उपयोगी विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं।

रोग उपचार मे पंचनिम्बादि वटी के फायदे : Panchanimbadi Vati Benefits in Hindi

खुजली में पंचनिम्बादि वटी से फायदा (Benefits of Panchanimbadi Vati in Itching Disease Treatment in Hindi)

शरीर के किसी भी अंग में खुजली हो सकती है। खुजली चलने पर व्यक्ति खुजा-खुजा कर परेशान हो जाता है, जितना खुजाता है, खुजली उतनी ही बढ़ती जाती है और व्यक्ति खुजाए चला जाता है। आहार में ज्यादातर गर्म, रूखे और खट्टे पदार्थों का सेवन करना प्रायः खुजली रोग होने का कारण होता है। खुजाने से त्वचा पर दाने उभर आते हैं। फोड़े फुसी होने से पहले खुजली होती है। शरीर की ठीक से साफ़ सफ़ाई न करने , रोज़ाना स्नान न करने और गन्दे पानी व धूल मिट्टी की गन्दगी आदि कारणों से खुजली होने लगती है। इन व्याधियों को दूर करने के लिए पंचनिम्बादि वटी का सेवन करते हुए, भोजन के बाद खदिरारिष्ट और रक्त-शोधान्तक या रक्त दोषान्तक 2-2 बड़े चम्मच, आधे कप पानी में डाल कर पीना चाहिए और त्वचा पर चर्म रोग नाशक तेल लगाना चाहिए।

( और पढ़े – खुजली के घरेलू उपचार  )

एक्जिमा मिटाए पंचनिम्बादि वटी का उपयोग (Panchanimbadi Vati Cures Eczema in Hindi)

खाद-खुजली की तरह एक त्वचा रोग है-एक्ज़ीमा। इस रोग की उत्पत्ति विशेष प्रकार के जीवाणुओं के संक्रमण (Infect ion) से होती है। शरीर के विभिन्न भागों में गन्दगी बनी रहने , तेज़ मिर्च मसालेदार व खट्टे पदार्थों का अति सेवन करने और रोग के जीवाणुओं के संक्रमण होने से एक्ज़ीमा रोग हो जाता है । रोग को दूर करने के लिए, पंचनिम्बादि वटी 2-2 गोली सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करना चाहिए।

( और पढ़े – एक्जिमा के आयुर्वेदिक इलाज )

पंचनिम्बादि वटी के इस्तेमाल से दाद में लाभ (Panchanimbadi Vati Cures Ringworm in Hindi)

गन्दगी के कारण शरीर में कहीं भी होने वाला एक रोग है दाद। दाद संक्रमण (Infection) के कारण होने वाला संक्रामक रोग है। घर के किसी व्यक्ति को अगर दाद हो जाए तो परिवार के किसी अन्य व्यक्ति को भी यह रोग हो सकता है। यह रोग होने पर त्वचा पर कहीं भी खुजली होने लगती है, जोर-जोर से खुजाने पर भी खुजली खत्म नहीं होती बल्कि जितना खुजाया जाता है खुजली उतनी ही बढ़ती जाती है, त्वचा लाल हो जाती है और गोलाई के आकार में सूजन आ जाती है। इस गोलाई के कारण ही इसे अंग्रेज़ी भाषा में Ringworm कहते हैं। इन गोल चकत्तों को ही दाद कहते हैं जो कुछ दिन बाद छोटी छोटी फुसियों में परिवर्तित हो जाते हैं।

यदि यह रोग जल्दी ठीक न किया जाए तो इन फुंसियों पर सूजन आ जाती है और मवाद आने लगता है फिर छोटे-छोटे गड्डे हो जाते हैं। ये चकत्ते धीरे धीरे परस्पर जुड़ कर फैलते जाते हैं। इन चकत्तों पर पतली पपड़ियां जम जाती हैं जिनके नीचे मवाद भरी रहती है। यह रोग ज्यादातर जांघों की जड़ में, जननेन्द्रिय के आस पास या गर्दन पर कान के नीचे या कमर में होता पाया जाता है। अगर दाद सिर की त्वचा में हो जाए तो बाल उड़ने लगते हैं। हाथ या हाथ की अंगुलियों में दाद होने पर बहुत कष्ट होता है, काम करने में असुविधा होती है और रोग के कीटाणु खाने पीने के साथ शरीर में पहुंच कर रक्त को दूषित कर देते हैं जिससे रोग पूरे शरीर में फैल जाता है।

इस रोग को नष्ट करने में पंचनिम्बादि वटी सफल सिद्ध हुई है। इस वटी के साथ ‘गन्धक रसायन 64 भावना’ की 2-2 गोली सुबह शाम लेना चाहिए। दाद के स्थान पर चर्म रोग नाशक तेल या दद्रहर अर्क लगाया जाए तो रोग जल्दी ठीक हो जाता है।

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कुष्ठ रोग में पंचनिम्बादि वटी का उपयोग लाभदायक (Panchanimbadi Vati Uses to Cures Leprosy in Hindi)

त्वचा पर जगह-जगह लाल-लाल चकत्ते होना ,सफेद दाग होना, बेवची होना, दाद और कुष्ठ रोग का प्रभाव होना आदि शिकायतों को दूर करने के लिए, पंचनिम्बादि वटी 2-2 गोली सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करना चाहिए।

( और पढ़े – कुष्ठ(कोढ) रोग मिटाने के आयुर्वेदिक उपाय )

चर्म रोगों के उपचार में पथ्य अपथ्य :

किसी भी रोग की चिकित्सा करने के साथ ही रोगी को पथ्य का पालन और अपथ्य का त्याग करना आवश्यक होता है। चर्म रोगों की चिकित्सा करते हुए भी पथ्य अपथ्य का पालन करना चाहिए।-

1) रात को सोते समय ताम्बे के बर्तन में पानी भर कर रखें। सुबह यह पानी पीकर शौच जाएं।
जिसे यह उपाय सुविधा जनक न लगे वह । एक गिलास कुनकुने गर्म पानी में नींबू निचोड़ कर पिए। दोनो में से कोई भी एक उपाय शौच जाने के पहले ही करना चाहिए।
2) रात को सोने से पहले पांच मिनिट शौचालय में जरूर बैठना चाहिए भले ही शौच की
हाजत होया न हो। धीरे-धीरे मल विसर्जन होने लगेगा। त्वचा रोगों को दूर करने के लिए पेट और त्वचा को स्वच्छ, साफ़ रखना ज़रूरी होता है।
3) तेज़ मिर्च मसालेदार तले हुए और नमकीन पदार्थों का सेवन रोग दूर न होने तक बन्द रखें,
4) खट्टे पदार्थों का सेवन न करें और नमक का सेवन कम मात्रा में करें।
5) शरीर को वर्षा ऋतु के पानी और अपने पसीने से बचा कर, सूखा रखें।

पंचनिम्बादि वटी के नुकसान : Panchanimbadi Vati Side Effects in Hindi

1- पंचनिम्बादि वटी लेने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें।
2- पंचनिम्बादि वटी को डॉक्टर की सलाह अनुसार ,सटीक खुराक के रूप में समय की सीमित अवधि के लिए लें।