रीढ़ की हड्डी का ट्यूमर (स्पाइन ट्यूमर) – Spinal Tumor in Hindi

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई इतना व्यस्त हो गया है कि छोटे-मोटे दर्द को अनदेखा किया जा रहा है। सामान्यतया कोई भी घरेलू उपचार कर उस दर्द से निजात पाने की कोशिश की जाती है। उपयुक्त निदान एवं उपचार नहीं होने के कारण कालांतर में वह साधारण-सा प्रतीत होने वाला दर्द भयंकर रूप भी ले सकता है। अतः इसे नजरअंदाज न करें।

क्या है रीढ़ की हड्डी का ट्यूमर (स्पाइन ट्यूमर) ? (What is Spinal Tumor in Hindi)

हड्डियों के बिना शरीर की कल्पना ही मुश्किल है। हड्डियां ही हमारे शरीर को आकार और आधार प्रदान करती हैं। शरीर में सबसे महत्वपूर्ण है रीढ़ की हड्डी। आजकल अधिकांश लोगों को कमरदर्द की शिकायत करते देखा जा रहा है। यह रीढ़ की हड्डी में आई समस्या के कारण होता है, जिसके ट्यूमर असामान्य कोशिकाओं के ढेर होते हैं, जो इसकी परतों या रीढ़ को आवरित करने वाली परत की सतह पर विकसित होते हैं। ये रीढ़ की हड्डी में अपेक्षाकृत बहुत ही कम पाए जाते हैं।

सामान्यतः नियोप्लाज्म (नया ऊतक) 2 तरह के होते हैं – बिनाइन (जो कैंसरग्रस्त नहीं होते) और मैलिग्नेंट (जो कैंसरग्रस्त होते हैं)।

बिनाइन ट्यूमर – बिनाइन ट्यूमर भले ही हड्डी के सामान्य ऊतकों को नष्ट करने वाले हों, लेकिन वे दूसरे ऊतकों को प्रभावित नहीं करते हैं।

मैलिग्नेंट ट्यूमर – मैलिग्नेंट ट्यूमर रीढ़ की कोशिकाओं के अवयवों पर तो हमला करते ही हैं, अन्य अवयवों तक भी उनके फैलने की आशंका रहती है।

अधिकांश नॉन-कैंसर ट्यूमर शरीर के अन्य भागों में फैलने की बजाय रीढ़ की हड्डी में ही विकसित होते हैं। इन्हें प्राइमरी ट्यूमर भी कहा जाता है और ये प्रायः नॉन-कैंसरस होते हैं।

रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर सेकंडरी होते हैं, जिसका अर्थ यह है कि यह शरीर के अन्य भागों से फैलते हैं। ये अधिकतर फेफड़ों के कैंसर या स्तन कैंसर के परिणाम होते हैं। रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर हर आयु के लोगों को प्रभावित करते हैं, परंतु अधिकांशतः युवा और माध्यम आयु वर्ग के वयस्कों में देखे जाते हैं।

रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर के लक्षण (Spinal Tumor Symptoms in Hindi)

स्पाइन ट्यूमर के क्या लक्षण होते हैं ?

स्पाइन ट्यूमर के लक्षण कई तत्वों पर निर्भर होते हैं, जैसे वह रीढ़ की हड्डी के किस स्थान पर है, कितनी जल्दी बढ़ रहा है, रीढ़ के अन्य तत्वों तक फैल चुका है या नहीं, क्या रीढ़ की हड्डी और तंत्रिकाओं पर उसका असर हुआ है और रीढ़ की स्थिरता पर कितना प्रभाव हुआ है।

  • पीठ का दर्द प्रायः सबसे प्रबल लक्षण होता है, जो रीढ़ की हड्डी पर दबाव पैदा कर सकता है। ऐसा महसूस होता है जैसे वह शरीर के विभिन्न भागों से आ रहा हो।
  • यह दर्द गंभीर और प्रायः लगातार होता है और साथ में जलन का एहसास भी हो सकता है।
  • इसका असर दिमाग पर भी होता है, जिसके कारण चेतनाशून्यता, चुभन और तापमान या ठंड का एहसास कम होना जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
  • स्नायु संपर्क को बाधित करने वाला ट्यूमर मांसपेशियों से संबंधित लक्षण भी उत्पन्न कर सकता है जैसे- प्रगतिशील मांसपेशियों की कमजोरी या आंत्र या मूत्राशय पर नियंत्रण खोना।
  • जैसे-जैसे ट्यूमर फैलता है, शरीर की शक्ति भी क्षीण होती है और आदमी कमजोर हो जाता है।
  • कई बार तो हाथों से वस्तुएं उठाने में भी दिक्कत होने लगती है।

रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर का उपचार (Spinal Tumor Treatment in Hindi)

स्पाइन ट्यूमर का इलाज कैसे करें ?

नॉन-सर्जिकल ट्रीटमेंट ट्यूमर के अनुसार होता है, जिसमें यह देखते हैं कि वह बिनाइन है या मैलिग्नेंट।

ब्रेसिंग : ब्रेस या कॉसेंट से रीढ़ की हड्डी को सहारा मिलता है और दर्द कम होता है। मरीज की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप खास ब्रेस तैयार करने में ऑर्थोटिस्ट की सहायता ली जा सकती है।

केमोथेरेपी : कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि और प्रजनन क्षमता को केमोथेरेपी के जरिए रोका जाता है। उन्हें नष्ट करने वाली दवाओं के प्रयोग से कैंसर का इलाज और उस पर नियंत्रण किया जाता है। केमोथेरेपी में ऐसी कई प्रकार की दवाएं हैं, जिन्हें अन्य उपचारों के साथ भी समन्वित किया जा सकता है।

रेडियेशन थेरेपी : रेडियेशन थेरेपी के जरिए कैंसर की कोशिकाओं को समाप्त किया जा सकता है। ट्यूमर को छोटा करके या उसका बढ़ना रोककर बीमारी पर काबू पाने में सहायता मिल सकती है। रेडियेशन मैलिग्नेंट कोशिका के डीएनए को निशाना बनाता है।

स्पाइन ट्यूमर का सर्जिकल ट्रीटमेंट –

सर्जरी का लक्ष्य दर्द कम करना और तंत्रिकाओं का कामकाज सुचारु करके उनकी क्रियाशीलता बरकरार रखकर, रीढ़ की हड्डी को स्थिरता प्रदान करना है। सर्जरी से आंशिक रूप से या पूरी तरह हटा दिए जाने के बाद भी कुछ ट्यूमर्स को रेडियेशन या केमोथेरेपी जैसे गैर-सर्जिकल इलाज की जरूरत पड़ती है। मेडिकल साइंस ने इस क्षेत्र में एक अनोखा विकास किया है। खासतौर से पीठ दर्द की तकलीफ के उपचार के लिए यह अब काफी आसान व संतोषजनक हो गया है।

अब यह सत्य से परे नहीं है कि एंडोस्कोपी और माइक्रोस्कोपी सर्जरी के माध्यम से रोगियों को किसी तरह का दर्द महसूस नहीं होगा और यहां तक कि वे कुछ दिनों में घर भी वापस जा सकेंगे। अब इससे बड़ी तकलीफ तक का उपचार आसानी से हो सकेगा। रक्त बहाव, इंफेक्शन और अस्पताल में लंबे समय तक रहने से अब आसानी से बचा जा सकेगा। अतः अब हमारे पास एक ऐसा मेडिकल प्रचलित उपचार मौजूद है, जो कि बहुत ही न्यूनतम खतरे में मुमकिन होगा।

रीढ़ की हड्डी के कैंसर से बचाव (Prevention of Spinal Cancer in Hindi)

स्पाइन कैंसर की रोकथाम कैसे करें ?

व्यस्तता भरी जिंदगी में शरीर की देखभाल करने का वक्त नहीं मिल पाता, जिसके कारण आदमी कैंसर जैसे भयानक रोगों का शिकार हो जाता है। खानपान में अनियमितता, पौष्टिक आहारों की कमी, फास्ट फूड के ज्यादा प्रयोग करने के कारण इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है, जिससे कई बीमारियां हो जाती हैं। इसमें कैंसर भी शामिल है।

  • स्पाइनल कैंसर से बचने के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव लाएं।
  • सिगरेट पीने से फेफड़ों का कैंसर, हार्ट अटैक और कई दूसरे कैंसर होने के चांस बढ़ रहे हैं। सिगरेट का धुआं इंसान के डीएनए को भी नुकसान पहुंचाता है। बाद में कैंसर के यही सेल्स रीढ़ की हड्डी को भी प्रभावित करते हैं। इसलिए स्पाइनल कैंसर से बचने के लिए सिगरेट व तंबाकू के सेवन से बचना चाहिए।
  • कैंसर के सेल्स को रोकने में पौष्टिक आहार का महत्वपूर्ण योगदान है। खाने में ज्यादा से ज्यादा पत्तेदार सब्जियां, चना और फल लें। सब्जियों और फलों में फाइबर मौजूद होता है, जो रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है और कई प्रकार के कैंसर का प्रतिरोध करने में मददगार होता है।

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