सौंदर्य प्रसाधन के उपयोग से पहले जान लीजिए ये खास बातें

सौंदर्य प्रसाधन का सच :

नारी के मन में हमेशा एक चाह होती है कि वह दुनिया में सबसे सुंदर महिला दिखे। सब उसके रूप की तारीफ करें, लोग उसे देखकर ईर्ष्या करें, कोई उसे देखे तो बस देखता ही रह जाए। यह मन की चाह बड़ी से बड़ी अफसर या ओहदेदार महिलाओं के मन में भी होती है और यही चाह एक झाडू-पोंछा करने वाली महिला के मन में भी होती है। वह अपने सौंदर्य को बढ़ाने के लिए हर तरह के बलिदान देने को तैयार रहती है। इसी चाह को भाँपकर कुछ पैसा कमाऊ पूँजीवादियों ने बाजार में कॉस्मेटिक अथवा सौंदर्य प्रसाधनों की एक पूरी श्रृंखला उतार दी, जिसे अत्यंत लुभावने विज्ञापनों द्वारा हर महिला तक पहुँचाया और उनसे कुर्बानी माँगी गई सिर्फ पैसों की और भविष्य में होने वाले दुष्प्रभावों की। यह नारी के मन की रूपवान बनने की चाह ही है कि नीम और निशा (हल्दी) जैसी जीवनदायिनी औषधियों को उबटनों में बर्बाद किया जाता है। आइये, हम जानते हैं। इन बाजारू सौंदर्यवर्धक पदार्थों की वास्तविकता तथ्यों के साथ :

1.गोरा करने वाले क्रीम-पाउडर का सच –

भारतीय उपमहाद्वीप में यदि सबसे ज्यादा किसी सौंदर्य उत्पाद की माँग है तो वह है गोरा बनाने वाले क्रीम की। यह सर्वमान्य सत्य है कि दुनिया की कोई भी ऐसी क्रीम नहीं है जो स्थायी रूप से किसी सांवले या काले को गोरा बना दे। आयुर्वेद में कहीं भी वर्ण परिवर्तक (रंग बदलने वाली) औषधि का उल्लेख नहीं है, आयुर्वेद में केवल वर्ण प्रसादक (रंग को निखारने वाली) औषधियों का वर्णन मिलता है। मैंने मेरे सारे जीवन में तो आज तक किसी भी काले या सांवले व्यक्ति को गोरा होते नहीं देखा। लेकिन आजकल विज्ञापनों में पलभर में या कुछ मिनटों में या 7 दिन में गोरा बनाने का वादा किया जाता है। विश्वास कीजिए, यह सारे वादे झूठे हैं।

मेरी एक मित्र जो कि मॉडलिंग करती है, उसने कुछ समय पूर्व एक कंपनी के कॉस्मेटिक प्रोडक्ट का T.V. विज्ञापन किया था। उस विज्ञापन में वह काफी गोरी और खूबसूरत दिख रही थी। मैंने पूछा कि तुम इतनी गोरी दिख रही थीं क्या वाकई वह क्रीम इतनी असरकारक है? उसका जवाब बड़ा चौंकाने वाला था। उसने कहा कि, “वह विज्ञापन करवाने के लिये मेरा एक फेमस ब्यूटीशियन से मेकअप करवाया गया था और उस पूरी मेकअप किट में वह प्रोडक्ट कहीं भी नहीं था जिसका वह विज्ञापन था।’ मतलब यह कि जिसको विज्ञापन किया जा रहा है वह उत्पाद उपयोग में लाया ही नहीं गया। अब जब हम इन उत्पादों को खरीदते हैं तो इनमें प्रयुक्त केमिकल्स हमें कुछ देर के लिये एक संगमरमरी आभा जरूर देते हैं, लेकिन इनके कुछ समय तक लगातार प्रयोग से त्वचा का काला होना, हल्के सफेद रंग के धब्बे, सफेद दाग जैसी समस्याएं आने लगती हैं। अत: इन विज्ञापनों के फेर में पड़कर अपना सौंदर्य न आँवाएं।

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2-चिपचिपापन या तैलीय त्वचा से छुटकारा दिलाने वाले उत्पाद का सच –

कई विज्ञापनों में सहेलियाँ या लड़के अपनी मित्र को चिढ़ाते हैं कि इसकी त्वचा कितनी चिपचिपी है। यह विज्ञापन तैलीय त्वचा वाली महिलाओं में हीन भावना पैदा करके उन्हें यह प्रोडक्ट खरीदने पर विवश करता है।

वास्तव में ईश्वर ने हम सभी इंसानों को उनकी जरूरत के अनुसार शरीर की क्रियाविधि संचालित की है। किसी को पसीना ज्यादा आता है तो किसी को कम, किसी को भूख अधिक लगती है तो किसी को कम। अब हमारी त्वचा अगर तैलीय है तो यह हमारे लिए अच्छा है। इस तेल को आने से रोकना हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होगा। अब इससे बचने के लिये हम यह करें कि दिन में 5 से 6 बार अपने चेहरे को साफ पानी से धोएँ और वसायुक्त वस्तुओं का सेवन कम करें। जिससे कि आप बिना दुष्प्रभाव के अपनी त्वचा को साफ रख सकते हैं।

3-मुहाँसे मिटाने वाले क्रीम का सच –

लगभग सभी पैथियों के डॉक्टरों के लिये मुहाँसे का इलाज करना अत्यंत जटिल माना जाता है। अंग्रेज़ी दवाएँ तो इस पर लगभग बेअसर हैं। आयुर्वेदिक डॉक्टर को भी कई सारे पहलुओं पर विचार करना पड़ता है जैसे- पाचन तंत्र, हार्मोनल लेवल, रक्त की स्थिति आदि। इन सबको समझने के बाद ही मुहाँसों का इलाज किया जाता है, लेकिन इसके ठीक विपरीत कॉस्मेटिक
उद्योग इसे कुछ ही दिनों में ठीक करने का दावा करते नजर आते हैं। कुछ कम्प्यूटराइज्ड ग्राफिक्स के द्वारा वे इन्हें परत दर परत ठीक होते हुए दिखाते हैं और भोली-भाली महिलाएँ इनके फेर में पड़कर उन्हें तुरत-फुरत खरीद लेती हैं। इससे एक तो उनका पैसा बरबाद होता है दूसरा यह कि कई बीमारियों को मुहाँसों के लक्षणों से पहचानकर (जैसे PCOS, हार्मोनल डिस्टर्बस, माहवारी की समस्या, पाचनतंत्र की समस्या) जिनका जल्द से जल्द उपचार शुरू जो जाना चाहिये था, उसमें देरी होती है। इससे वे समस्याएँ और जटिल हो जाती हैं इसलिए मुहाँसों का उपचार किसी बाजारू क्रीम से न करते हुए अपने चिकित्सक से करवाएँ। जिससे कि आपको सही समय पर सही उपचार मिल सके।

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4-बालों को संवारने वाले प्रोडक्ट्स का सच –

खूबसूरत, लम्बे, मोटे और चमचमाते बाल अच्छे स्वास्थ्य की पहचान हैं और इसके विपरीत लक्षणों वाले बालों का होना रोगी होने की निशानी है। अब हम खुद सोचें कि कोई शैम्पू, जैल या तेल हमारे स्वास्थ्य को कैसे ठीक करेगा ? वह तो केवल बाह्य उपयोग के लिये है। इन शैम्पू या तेलों में प्रयुक्त होने वाले रसायन कुछ समय के लिये जरूर एक छद्म आभा का अहसास करवाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद यह आभा खत्म हो जाती है और अपने पीछे कई दुष्परिणाम छोड़ जाती है। बालों की समस्या की मुख्य वजह हार्मोनल डिस्टरबेंस, लिवर की समस्या, हड्डियों की कमज़ोरी, थायरॉइड की समस्या, पाचनतंत्र की कमजोरी, पोषक पदार्थों की कमी आदि है। अब आप स्वयं विचार करें क्या आपका शैम्पू, तेल या जैल इन बीमारियों या समस्याओं को ठीक कर सकता है? नहीं ना। इसलिए अपने झड़ते बालों की वजह का पता अपने चिकित्सक से लगवाएँ और उसका निदान होने पर उपचार करवाएँ तभी तो आपको पूर्ण लाभ होगा।

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5-एंटी एजिंग प्रोडक्ट्स का सच –

कई सारे प्रोडक्ट्स आपको सदा युवा रखने का वादा करते दिखाई देंगे। वह 50 साल की महिला को 30 साल का बना देने का वादा करते हैं, लेकिन वास्तविकता हम सब जानते हैं कि सदा युवा दिखने के लिये आपको स्वस्थ होना आवश्यक है। ऊपरी लीपा-पोती से सदा युवा बने रहना कोरी बकवास है और मृगमरीचिका के समान है, जिन्हें अपनाते-अपनाते आप और भी ज्यादा उम्रदराज़ होती जाएंगी।

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6-डार्क सर्कल्स मिटाने वाले क्रीम का सच –

डार्क सर्कल्स के कई कारण होते हैं जिनमें प्रमुख हैं- रक्त की कमी, तनाव, नींद की कमी, थायरॉइड की समस्या, लिवर की समस्या, पोषण की कमी आदि। अब जब तक ये कारण मौजूद रहेंगे तब तक डार्क सर्कल्स ठीक नहीं होंगे। लेकिन अब ज़रा विज्ञापनों पर नज़र डालें तो एक अभिनेत्री डार्क सकर्क्स मिटाने वाली एक क्रीम का विज्ञापन करती है जिसमें वह पल भर में डार्क सर्कल्स को मिटा देने का दावा करती है। लेकिन जब अभिनेत्री का बिना मेकअप के अख़बार में फोटो छपता है तब वह खुद डार्क सर्कल्स से पीड़ित नज़र आती है। अत: डार्क सर्कल्स को किसी क्रीम से ठीक करने का सपना न देखें इसे उपचार द्वारा ठीक करवाएँ।

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सौंदर्य में कमी आना एक रोग है। इसका इलाज करवाएँ और दवाई लें। यह दोनों कार्य सही व्यक्ति और सही स्थान पर करवाएँ। यदि आप विज्ञापनों में काम करने वाले कलाकारों को डॉक्टर का स्थान देंगी तो रूपवान होने के बजाए कुरूप होती जाएँगी। इसलिये सर्वोत्तम यही होगा कि आप अपनी समस्याओं को अपने डॉक्टर को बताएँ, जिससे कि सही समय पर सही उपचार मिल सके। विश्वास कीजिए आपका यह कदम आपकी सुंदरता के लिए एक वरदान साबित होगा।