बैठने का सही ज्ञान और तरीका । जानिये यह 8 खास बातें

बैठने का सही तरीका :

1) बैठते समय सिर, गर्दन, रीढ़ और कूल्हे सीधी रेखा में होना चाहिए।

2) कुर्सी की बैठक समतल हो तथा ज्यादा नर्म या गद्देदार न हो, पुश-बैक न हो, कमर को सहारा देने वाला हिस्सा एकदम सही हो।

3) कुर्सी पर बैठते समय ध्यान रखें कि आपके कूल्हे कुर्सी के बैक से टच हो। यदि आपका जॉब ऐसा है जिसमें कई घण्टे बैठने का काम रहता है, जैसे- ऑफिस, दुकान या ड्रायविंग तो आप आधे या एक घण्टे में कुछ कदम अवश्य चलें या अपने पैरों की पिण्डलियों की हल्के हाथों से मसाज करें। ऐसा करने से हमारे पैरों में रक्त का प्रवाह (Circulation) ठीक हो जाता है।

4) क्रॉस लैग करके न बैठे इससे आपके शरीर का भार कूल्हों पर असमान हो जाएगा और इससे कूल्हे के जोड़ और रीढ़ की हड्डी पर बुरा असर पड़ेगा।

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5) जब आप बैठे तो ध्यान रखें कि आपके शरीर का पूरा भार दानों कूल्हों पर समान आए।

6) बटुआ (Wallet) पीछे की जेब में रखा होने से बैठते वक्त कूल्हे के असंतुलित हो जाने से रीढ़ पर गलत प्रभाव पड़ता है और लम्बे समय तक ऐसा करने से आप कमर दर्द से पीड़ित हो सकते हैं।

7) यदि आप कम्यूटर या पेपर वर्क अधिक करते हैं तो आपके कम्प्यूटर का की-बोर्ड और स्क्रीन इतनी ऊँचाई पर हो कि आपके कंधे और गर्दन झुके हुए या बहुत ज्यादा तने हुए न हों। अन्यथा आपको कुछ समय में सर्वाइकल स्पाँडिलाइटिस (गर्दन एवं कंधों का दर्द) हो जाएगा।

8) आपकी टेबल और कुर्सी की ऊँचाई का अनुपात सही हो जिससे कि आपकी गर्दन और रीढ़ पर कोई रचनात्मक (Anatomical) विकार न हो।

उसे डॉक्टर नहीं कुर्सी बदलने की ज़रूरत थी :

एक कम्पनी में कार्यरत् रोगी मेरे पास कमर दर्द की समस्या लेकर आया। मेरे पास आने से पहले वह कुल सोलह चिकित्सकों से उपचार ले चुका था और वे सभी चिकित्सक उसे बहुत ही अच्छा इलाज दे रहे थे, लेकिन उसके कमर दर्द में कोई स्थाई आराम नहीं हो रहा था। जब मैंने उस रोगी से उसके जॉब के बारे में पूछा तो उसने बताया कि वह एक कम्पनी में कार्य करता है तथा उसका अधिकांश समय ऑफिस में ही गुज़रता है। मैंने पूछा, “आपकी कुर्सी कैसी है?” उसका उत्तर था कि, “वह एक आधुनिक शैली की रिवॉल्विंग चेयर है, जो कि आरामदायक व नर्म है।” मैंने कहा, “बधाई हो, हमें आपके लिए उपचार मिल गया, आप बस अपनी कुर्सी बदल दीजिए, आधुनिक की जगह पुरातनकाल की लकड़ी की समतल कुर्सी का उपयोग करें, जिस पर कोई कुशन या गद्दा भी न लगा हो।” उसने ऐसा ही किया, थोड़े दिन की दवाएँ और कुछ व्यायाम से उसकी कमर अच्छी अवस्था में आ गई और उसका दर्द भी चला गया।

तात्पर्य यह है कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम खुद ही अपने आपको मरीज़ बना लेते हैं और अस्वस्थता का पूरा आरोप डॉक्टर पर धर देते हैं। जबकि उपचार स्वयं हमारे पास ही होता है। यदि आप भी कमर दर्द से पीड़ित हैं तो अपनी शानदार और आधुनिक कुर्सी को बदलकर लकड़ी की सपाट कुर्सी का उपयोग अभी से शुरू कर दें। मैंने देखा है कि कई लोग यह सोचते हैं कि ऑफिस का मैनेजमेंट उन्हें कुर्सी बदलवाकर दे। हो सकता है ऐसा हो भी जाए, लेकिन यदि इसमें देरी हो तो आप स्वयं ही कुर्सी को बदल दें क्योंकि यदि आपकी कमर टेढ़ी हुई तो दर्द का एहसास सिर्फ आपको ही होगा, बाकी लोग केवल सहानुभूति ही प्रदर्शित कर सकते हैं।

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