विश्वेश्वर रस के फायदे और नुकसान – Vishweshwar Ras in Hindi

विश्वेश्वर रस क्या है ? (What is Vishweshwar Ras in Hindi)

विश्वेश्वर रस टेबलेट के रूप में उपलब्ध एक आयुर्वेदिक दवा है। इस आयुर्वेदिक औषधि का विशेष उपयोग हृदय तथा फेफड़ों संबंधी विकारों के उपचार के लिए किया जाता है। यह आयुर्वेदिक औषधि हृदय तथा फेफड़ों को बल प्रदान करती है ।

वृद्धावस्था में होने वाले सामान्य रोग जैसे – शिर हस्त कम्पन, कमर दर्द, कमजोरी, चलने में असमर्थता, अनिद्रा, खांसी इत्यादि सभी रोगों में विश्वेश्वर रस एक उत्तम औषधि है। विश्वेश्वर रस एक पूर्ण निरापद रसायन है। इसके सभी के सभी घटक रसायन गुणयुक्त है।

घटक और उनकी मात्रा :

  • स्वर्ण भस्म – 10 ग्राम,
  • अभ्रक भस्म शतपुटी – 10 ग्राम,
  • लोह भस्म शतपुटी – 10 ग्राम,
  • वङ्ग भस्म – 10 ग्राम,
  • शुद्ध पारद – 10 ग्राम,
  • शुद्ध गंधक – 10 ग्राम,
  • वैक्रान्त भस्म – 10 ग्राम,
  • अर्जुन त्वक (छाल) – आवश्यकतानुसार, भवना के लिए

प्रमुख घटकों के विशेष गुण :

  1. कजली : जन्तुघ्न (कृमिनाशक), योगवाही, रसायन ।
  2. स्वर्ण भस्म : विषघ्न (विषनाशक), हृद्य (ह्रदय के लिए लाभप्रद), बल्य (बलकारक), मेध्य (बुद्धि बढ़ानेवाला), रसायन।
  3. अभ्रक भस्म : मज्जा प्रसादक, वातनाड़ी बलवर्धक, बल्य, रसायन।
  4. लोह भस्म : रक्त वर्धक, बल्य, रसायन।
  5. वैक्रान्त भस्म : ओजोवर्धक, बल्य रसायन।
  6. अर्जुन त्वक : हत्पेशी बलदायक, अस्थिसंधानक, हृद्य ।

विश्वेश्वर रस बनाने की विधि :

पारद गंधक की निश्चन्द्र कज्जली में सभी भस्में मिलाकर एक दिन अर्जुन त्वक क्वाथ (अर्जुन छाल काढा) में मर्दन करके 100 मि.ग्रा. की वटिकायें बनवा कर छाया में सुखा कर सुरक्षित कर लें।

विश्वेश्वर रस की खुराक (Dosage of Vishweshwar Ras)

एक वटिका प्रातः सायं भोजन से पूर्व

अनुपान : अर्जुन क्षीरपाक, आमले का मुरब्बा, खमीरा गावजवान।

विश्वेश्वर रस के फायदे और उपयोग (Benefits & Uses of Vishweshwar Ras in Hindi)

विश्वेश्वर रस के कुछ स्वास्थ्य लाभ –

1). फेफड़े संबंधी रोगों में विश्वेश्वर रस के इस्तेमाल से फायदा

खांसी, श्वास, यक्ष्मा, कांस्य क्रोड़, फेफड़े संबंधी कर्कटावुर्द (कैंसर की गाँठ) इत्यादि फुफ्फुस (फेफड़े) के सभी जीर्ण रोगों में विश्वेश्वर रस का प्रयोग सफलता पूर्वक होता है।

जाठराग्निवर्धक, धात्वाग्निवर्धक, रक्तवर्धक, वीर्य वर्धक, ओजो वर्धक, और रसायन होने के कारण यह उपरोक्त सभी रोगों का नाश करके व्याधि निरोधक क्षमता बढ़ा कर रोगों की पुनरोत्पत्ती को असम्भव बना देता है। रोगों के अनुसार उनकी विशेष औषधियों का प्रयोग भी अवश्य करना चाहिए। चिकित्सावधि एक मास से एक वर्ष । सावधानी और परहेज अनिवार्य।

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2). हृदय रोग मिटाए विश्वेश्वर रस का उपयोग

विश्वेश्वर रस हृदय रोगों की सुप्रसिद्ध औषधि है अपने रसायन प्रभाव से यह हृदपेशी का बल बढ़ाकर हृदयगति को सामान्य बनाती है। धमनियों के अवरोधों को खोलकर उनकी स्थिति स्थापकत्व की वृद्धि करती है, रक्त परिभ्रमण को सूक्ष्म धमनियों के स्तर तक पहुँचाना सुनिश्चित करती है । रक्त में बढ़े हुए आम (लिपिड) को कम करके, रक्त का थक्का बनने से रोकती है। बने हुए थक्के को विलीन कर देती है। हृदय के शोथ, वृद्धि, क्षीणता को नष्ट करके हृदय के कार्य को सुचारु और सामान्य बनाती है। अतः सभी प्रकार के हृदय रोगों में विश्वेश्वर रस का प्रयोग अवश्य करवाना चाहिए ।

एक वटिका प्रातः सायं अर्जुनक्षीर पाक, मुरब्बा आमला, खमीरा गाव जवान में से किसी एक से देने से प्रथम दिवस से लाभ दृष्टिगोचर होने लगता है। पूर्ण सेवन काल छ: मास का है।

सहायक औषधियों में – प्रभाकर वटी, शंकरवटी, बृहद्वातचिन्तामणि रस, सूक्ष्मैलादि चूर्ण, कुकुभादि चूर्ण इत्यादि में से किसी एक या दो का प्रयोग कर सकते हैं।

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3). शुक्राणु अल्पता में विश्वेश्वर रस के सेवन से लाभ

वीर्य में शुक्राणुओं की अल्पता से सन्तानोत्पत्ती बाधित होती है। जीवन की एक ऐषणा पुत्रैषणा भी है। बच्चों की किलकारी के बिना घर सूना होता है। अतः विवाह होने के उपरान्त जब दो तीन वर्ष के भीतर सन्तान नहीं होती तो रोगी चिकित्स से सम्पर्क करते हैं। विश्वेश्वर रस अण्ड कोषों को शक्ति प्रदान कर नवीन शुक्राणुओं की उत्पत्ती को सुनिश्चित करता है। इसका प्रयोग प्रातः सायं एक वटिका भोजन से पूर्व धारोष्ण दूध से सेवन करवानी चाहिए।

सहायक औषधियों में – गोक्षुरादि चूर्ण, मूसल्यादि चूर्ण, अश्वगंधादि चूर्ण, कौंचपाक, मूसलीपाक, पुष्पधन्वा रस, वृहद्पूर्ण चन्द्र रस, वृहद् लक्ष्मी विलास रस में से किसी एक का प्रयोग भी करवाएं। चिकित्सावधि चालीस दिन।

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4). स्मृति ह्रास में लाभकारी विश्वेश्वर रस

वृद्धों के स्मृति ह्रास में विश्वेश्वर रस से लाभ मिलता है। स्मृति भ्रंश वृद्धावस्था का एक लक्षण है। शरीर में काल व्यवस्था के अनुसार कफ का ह्रास और वायु की वृद्धि से होने वाली क्षीणता से शरीर के सभी अंग प्रत्याङ्ग क्षीण होते हैं। उनमें स्मृति से क्षीणता आ जाना भी स्वाभाविक है। विश्वेश्वर रस अपने रसायन प्रभाव से जरा जन्य सभी व्याधियों का निवारण करता है।

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5). बहरापन दूर करे विश्वेश्वर रस का उपयोग

सुनने की शक्ति में कमी का होना भी एक ऐसी ही प्रक्रिया है। विश्वेश्वर रस के सेवन से श्रवण शक्ति का विकास होकर बहरापन दूर होता है । शब्द स्पष्ट सुनाई देने लगते हैं।

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6). दृष्टि दौर्बल्य में लाभकारी है विश्वेश्वर रस का सेवन

शरीर में काल प्रभाव के कारण वृद्धों की दृष्टि प्रायशः मंद होने लगती है। आँखों में तिमिर उतर आता है। तिमिर के परिपक्व होने से पूर्व यदि विश्वेश्वर रस का प्रयोग किया जाए तो तिमिर उत्पन्न ही नहीं होता, थोड़ा-बहुत हो तो भी विलीन हो जाता है।

7). वृद्धावस्था के अन्य रोग मिटाए विश्वेश्वर रस का उपयोग

वृद्धावस्था के रोग जैसे – शिर हस्त कम्पन, कटिशूल (कमर दर्द), अशक्ति, चलने में असमर्थता, अनिद्रा, खांसी इत्यादि सभी रोगों में विश्वेश्वर रस एक उत्तम औषधि है। इसका प्रयोग यदि पचास वर्ष की आयु से रसायन विधि से किया जाए तो वृद्धावस्था जन्य आपत्तियों को पर्याप्त ढंग से दूर किया जा सकता है।

सहायक औषधियों में च्यवनप्राश अवलेह, हरीतकी रसायन, विडंग तण्डुल रसायन, त्रैलोक्य चिन्तामणि रस का प्रयोग करवाया जा सकता है।

आयुर्वेद ग्रंथ में विश्वेश्वर रस के बारे में उल्लेख (Vishweshwar Ras in Ayurveda Book)

स्वर्णाभ्र लौह वङ्गाना रसगंधक योरपि ।
वैक्रान्तस्य च संगृह्य भागांस्तोलक सम्मितान्॥
पार्थस्य सलिलेनाथ भाववित्वा यथा विधि।
रक्तिकै क प्रमाणेन विदध्यावटिका स्ततः ॥
अयं विश्वेश्वरोनाम रसः फुफ्फुसान् गदान्।
हृदरोगांश्च जयेत सर्वान् संशयोऽत्र विद्यते ॥

  • भैषज्यरत्नावली (हृदयरोगाधिकार 60-61)

विश्वेश्वर रस के दुष्प्रभाव और सावधानीयाँ (Vishweshwar Ras Side Effects in Hindi)

  • विश्वेश्वर रस लेने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें।
  • विश्वेश्वर रस को डॉक्टर की सलाह अनुसार ,सटीक खुराक के रूप में समय की सीमित अवधि के लिए लें।
  • विश्वेश्वर रस में स्वर्ण, रौप्य, वंग, लोह, पारद, गंधक और अभ्रक भस्मों का समावेश है अतः भस्म सेवन में अपनाए जाने वाले पूर्वोपाय इसमें भी अवश्य अपनाए जाने चाहिए।

(अस्वीकरण : दवा ,उपाय व नुस्खों को वैद्यकीय सलाहनुसार उपयोग करें)

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