अष्टाध्यायी सूत्रपाठ – Ashtadhyayi Sutra Paath
इस किताब के बारे में
अष्टाध्यायी सूत्रपाठ पुस्तक के लेखक डॉ० रमाशंकर मिश्र हैं। वे पं० (संस्कृत), विद्यालय-प्राध्यापक (पी-एच.डी.) और वेदान्त के विद्वान हैं, तथा वाराणसी से संबंधित हैं। प्रकाशन मॉतीलाल बनारसीदास, दिल्ली ने किया है। पुस्तक में लगभग २८४ पृष्ठों का पाठ है। अष्टाध्यायी संस्कृत व्याकरण का सबसे आदिम और प्रामाणिक ग्रंथ माना जाता है।
पुस्तक में अष्टाध्यायी के सूत्रों का विस्तृत पाठ केवल नहीं, बल्कि वर्तिक, गण, पद, धातु, विकल्प, लिङ्ग और सूत्र-सूची जैसे व्याकरणिक अंगों की व्याख्या भी दी गई है। प्रत्येक अध्याय में सूत्र का अर्थ, उसका प्रयोग और उदाहरण दिए गए हैं, जिससे पाठक व्याकरण को सूक्ष्मता से समझ सकता है। संस्कृत के विद्यार्थियों के लिए यह ग्रंथ एक अनमोल संदर्भ है।
संस्कृत-व्याकरण, भाषा-शास्त्र और पाणिनीय परंपरा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी है। संस्कृत के विद्यार्थियों और अध्यापकों के लिए यह एक आधार-पुस्तक है। व्याकरण के मूल सिद्धांतों को समझने के लिए आज भी इसे पढ़ा जाता है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- पाणिनि की अष्टाध्यायी के सूत्र
- सूत्रों का पाठ तथा क्रम
- व्याकरण के नियम तथा उदाहरण
- अभ्यास तथा कंठस्थ करने के लिए
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
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