भक्त कुसुम | Bhakt Kusum By Gita Press
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भक्त-कुसुम सम्प्रदाय-कुसुमावली पीठर से संबंधित पुस्तक है, जिसे शीर्ष पृष्ठ पर भक्त-कुसुम नाम से अंकित किया गया है। मुद्रणालय पीतरोड़, गोरखपुर से हुआ है, जो गीताप्रेस का प्रकाशन-स्थल है। पहली बार यह १९७० में प्रकाशित हुआ और उसका मूल एक चार पैसा रखा गया था। पुस्तक लगभग एक सौ आठ पृष्ठ की है।
पुस्तक में भक्ति-काव्य के पद और भजन संकलित हैं, जिन्हें सम्प्रदाय की परंपरा में साधुओं के बीच गाया जाता था। भक्ति-रस के साथ नैतिक और सामाजिक संदेश भी इन पदों में व्यक्त हुए हैं। शैली सगुण भक्ति-काव्य की है, जिसमें विनम्रता और सेवा-भाव की प्रधानता दिखती है। पद छोटे हैं, इसलिए पढ़ने में बोझ नहीं लगता और वे स्मरणीय भी रहते हैं।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो सम्प्रदाय-कुसुमावली की परंपरा और उसके भक्ति-साहित्य को जानना चाहते हैं। अन्य संप्रदाय के पदों की तरह यह भी सगुण-भक्ति की सरल भाषा में लिखा गया है, इसलिए अधिकांश पाठक इसे आसानी से समझ सकते हैं। सस्ती और छोटी पुस्तक होने के कारण यह निजी संग्रह के लिए भी उपयुक्त है। संगीत और कीर्तन में रुचि रखने वालों के लिए यह एक अच्छा संदर्भ है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- भक्तों के प्रसंग तथा कथाएँ
- भक्ति का महत्व
- प्रेरक उपदेश
- गीता प्रेस संकलन
पुस्तक की मुख्य बातें
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