ब्रह्मांड पुराण – I (Brahamand Puran)
इस किताब के बारे में
ब्रह्माण्ड पुराण अठारह पुराणों में से एक है और यह पुस्तक उसका प्रथम खण्ड है। शीर्ष पृष्ठ पर इसे "(प्रथम खण्ड)" अंकित किया गया है। पुस्तक के प्रारंभ में खण्ड-पठन की सूची दी गई है, जिसमें देव-मुनि और पौराणिक पात्रों से जुड़े अध्यायों के नाम दर्ज हैं। पुस्तक लगभग चार सौ सोलह पृष्ठ की है।
पुस्तक में दुर्गा और प्रजापति से संबंधित अध्यायों के साथ सप्त-पुत्र, दक्ष, इन्द्र, विराट पुरुष और ब्रह्मा जैसे देवताओं के वर्णन मिलते हैं। पितर, पुत्र और वंश-परंपरा से जुड़े प्रसंग इसमें आते हैं। कश्मीर, भद्रावली तथा अन्य तीर्थों का उल्लेख भी मिलता है, जिसमें उनके महत्व का वर्णन है। अनुक्रमणिका में अनेक श्लोक-निर्देश अंकित हैं, इसलिए किसी भी प्रसंग तक सीधे पहुँचा जा सकता है।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो पुराण-साहित्य और भारतीय धार्मिक-कथाओं में रुचि रखते हैं। ब्रह्मा, दक्ष और सप्त-पुत्रों की कथाएँ वैदिक और पौराणिक परंपरा की समझ बनाने में महत्वपूर्ण होती हैं। प्रथम खण्ड होने के कारण शेष सामग्री अन्य खण्डों में उपलब्ध होगी। पुराणों को इतिहास या विज्ञान का प्रमाण नहीं, बल्कि धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा के दस्तावेज़ के रूप में पढ़ा जाना चाहिए।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- ब्रह्मांड पुराण की कथाएँ
- सृष्टि तथा वंश-वर्णन
- तीर्थ तथा व्रत
- धर्म तथा मोक्ष के उपदेश
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
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