ब्रह्म वैवर्त पुराण – Brahm Vaivart Puran
इस किताब के बारे में
ब्रह्मवैवर्तपुराण भागवत पुराण के अठारह पुराणों में गिना जाने वाला एक प्राचीन ग्रंथ है। प्रस्तुत प्रति में मूल पुराण के साथ श्रीललितसूरि की श्रीवचनामृत टीका भी दी गई है, जिससे कठिन संस्कृत पंक्तियों का अर्थ हिन्दी-वाचकों को सरलता से समझ आता है। संपादन पंडित श्रीजगन्नाथ शर्मा “वेदालंकार” ने किया है और प्रथम भाग प्रकाशित किया गया है। पुस्तक में लगभग ७९६ पृष्ठों का पाठ है।
पुस्तक में पौराणिक कथाओं के साथ-साथ उपदेश और संवाद भी संकलित हैं। प्रथम भाग में मुख्यतः उद्धव-विलास और ज्ञानखण्ड जैसे अंश आते हैं, जहाँ भगवान से साधकों के प्रश्न और उनके उत्तर वर्णित हैं। टीकाकार ने पंक्ति-पंक्ति पर टिप्पणी देते हुए गूढ़ बातों का सीधा भावार्थ प्रस्तुत किया है।
पुराण-अध्येताओं, हिन्दू-दर्शन के विद्यार्थियों तथा वैदान्तिक साहित्य से जुड़े शोधकर्ताओं के लिए यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी है। संस्कृत पढ़ने में कठिनाई आने वाले सामान्य पाठक भी टीका-सहायता के कारण इसे आसानी से समझ सकते हैं। धार्मिक जिज्ञासा रखने वाले पाठकों के लिए यह ग्रंथ एक पूर्ण आध्यात्मिक संदर्भ है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- ब्रह्म वैवर्त पुराण की कथाएँ
- राधा-कृष्ण तथा शक्ति-उपासना
- सृष्टि तथा वंश-वर्णन
- भक्ति, व्रत तथा पूजा-विधि
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
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