ब्रह्मण महिमा क्यों और कैसे – Brahman Mahima Kyun Aur Kaise
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ब्रह्मण महिमा क्यों और कैसे पुस्तक का मुद्रित शीर्षक है। आवरण पर ब्रह्मण महिमा क्यों और कैसे ? बड़े अक्षरों में अंकित है और उसके नीचे -रामस्वरूप वर्मा लिखा है। भीतर के शीर्षक-पृष्ठ पर भी यही शीर्षक दोहराया गया है और उसके नीचे लेखक : महामना रामस्वरूप वर्मा, संस्थापक अर्जुनक संघ लिखा है। उसके नीचे मूल्य : 50/- और प्रकाशक अर्जुन सैनी का नाम दिया गया है। पुस्तक बहुत छोटी है — पैंसठ पृष्ठ से भी कम।
शीर्षक-पृष्ठ के बाद प्रकाशकीय से पुस्तक का परिचय दिया गया है। उसमें अर्जुनक संघ के संस्थापक श्री रामस्वरूप वर्मा का बार-बार उल्लेख है और वेग से यह भी बताया गया है कि मयंदा पुरुषोत्तम या ब्राह्मण गुलाम जैसे विवादात्मक लेख के चर्चे के बीच उन्हें देश भर में यह पुस्तक भेंट में दी गई। साथ ही ८ अगस्त १९७४ को क्या रामचरित मानस धार्मिक ग्रंथ है? शीर्षक लेख का भी ज़िक्र है। पुस्तक का मुख्य भाग प्रश्नोत्तर शैली में लिखा गया है और अध्यायों के शीर्षक ही प्रश्न हैं, जैसे सबसे बड़ा सवाल यही है कि जो ब्रह्म है, उसकी प्रकृति क्या है?, कर्म क्यों होता है? और श्रद्धा और संकल्प के बिना साधना कभी सफल नहीं होती।
यह पुस्तक ब्रह्म और उसकी प्रकृति पर जिज्ञासा रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी है। लेखक महामना रामस्वरूप वर्मा अर्जुनक संघ के संस्थापक हैं, और पुस्तक में उनकी अपनी साधना-आधारित समझ मिलती है। प्रश्न-उत्तर शैली के कारण गूढ़ बातें भी सीधी होकर समझ आती हैं। कम दाम की यह छोटी पुस्तक संस्कृत और अध्यात्म पर जिज्ञासु पाठक के लिए अच्छी शुरुआत है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- आत्मा तथा ब्रह्म का स्वरूप
- जगत् की उत्पत्ति, माया तथा अद्वैत
- साधना, ध्यान तथा आत्मज्ञान के सोपान
- उपनिषद् तथा गीता का सार
पुस्तक की मुख्य बातें
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