बृहन्नारदीय पुराण (भाग 1) – Brihannaradiya Purana
बटन दबाते ही डाउनलोड अपने आप शुरू हो जाएगा — बस इंतज़ार कीजिए।
⬇ मुफ़्त PDF डाउनलोड करें📖 डाउनलोड नहीं हो रहा? निर्देश और मदद यहाँइस किताब के बारे में
आवरण-पृष्ठ पर बड़े अक्षरों में बृहन्नारदीयपुराणम् अंकित है और उसके ऊपर यह लिखा है कि यह ग्रन्थ कृष्णद्वैपायनमहर्षि व्यासदेव विरचित है। नीचे मूल तथा भाषानुवाद लिखा है और सम्पादक के रूप में एम. एम. खण्डेलवाल का नाम आया है। आवरण पर एक देवी का चित्र बना हुआ है। प्रकाशक चौखम्बा कृष्णदास अकादमी, वाराणसी तथा चौखम्बा प्रेस, वाराणसी है। संस्करण प्रथम और वर्ष दो सौ त्रहतर अंकित है तथा अन्तर्राष्ट्रीय पुस्तक-क्रमांक भी मुद्रित है। गोपाल मन्दिर लेन और गोलघर का पता भी दिया गया है।
पुस्तक का आरंभ निवेदन से होता है जिसमें बताया गया है कि प्रत्येक मन्वन्तर में व्यास होते हैं और कर्तमान चतुर्वुग में व्यास की ही प्रधानता है। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि बृहन्नारदीय पुराण व्यासदेव की ही कृति है और यह भाषानुवाद सहित दो खण्डों में प्रस्तुत है। फलट रूप में इसमें अड़तीस अध्याय और तीन हजार छह सौ श्लोक मिलते हैं जबकि वेंकटेश्वर प्रेस का संस्करण दो भागों में है और दूसरे भाग में पाँच हजार से अधिक श्लोक हैं। द्वितीय खण्ड में एकादशी तत्त्व की महिमा पर तथा प्रथम भाग में सांख्य और योग पर विस्तृत वर्णन है। तीर्थवर्णन और भूगोल का भी वर्णन मिलता है। कुल पृष्ठ एक हजार तीन सौ अड़तालीस हैं।
भारतीय पुराण-साहित्य, धर्मशास्त्र और मध्यकालीन पुराण-परम्परा के अध्ययन के लिए यह पाठ अत्यंत उपयोगी माना जाता है, क्योंकि इसमें मूल पाठ के साथ हिन्दी अनुवाद और संपादक की व्याख्या एक साथ मिलती है। पहले खंड में सांख्य और योग तथा दूसरे में तीर्थ और एकादशी पर जोर दिया गया है, इसलिए दोनों परम्पराओं का अध्ययन करने वालों के लिए यह पाठ बड़ा महत्वपूर्ण है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- मूल ग्रंथ का परिचय तथा महत्व
- श्लोकों का सरल हिंदी अनुवाद व अर्थ
- मुख्य पात्रों तथा प्रसंगों का वर्णन
- जीवन में अपनाने योग्य शिक्षाएँ
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
डाउनलोड के बाद फ़ाइल “Downloads” फ़ोल्डर में मिलेगी — वहीं से कभी भी दोबारा पढ़ सकते हैं। कोई दिक्कत हो? हमें बताएँ
🙏 यह पुस्तक साझा करें
इस पुस्तक का लिंक मित्रों को भेजिए — इसी तरह ज्ञान सब तक पहुँचेगा।
इसी श्रेणी की और किताबें
उपनयन विधि – Upanayan Vidhi
सूर्यसहस्रनामावली – Surya Sahasra Namavali
श्री महिम्न स्तोत्रम् (कश्मीरी) – Shri Mahimna Stotram
अमृत वाणी (भाग 1) – Amrit Vani
यजुर्वेद संहिता (आर्य समाज परोपकारिणी सभा) – Yajurveda Samhita
श्री महानारायण सहस्रनामावली स्तुति – Shri Maha Narayan Sahasra Namavali
ज्ञान रेह (कश्मीरी) – Gyan Reh Kashmiri
गणेश दुर्गा स्तोत्रावली (1935, श्रीनगर) – Ganesh Durga Stotravali