देव शास्त्र और गुरु – Dev Shastra Aur Guru
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देव, शाला और गुरु पुस्तक के लेखक डॉ. सुदर्शन लाल जैन हैं, जिन्होंने एम.ए. और पी-एच.डी. के अतिरिक्त आचार्य की उपाधि प्राप्त की है। वे संस्कृत, जैनदर्शन और साहित्य के विद्वान हैं और बराती विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग के अध्यक्ष रह चुके हैं। पुस्तक का प्रकाशन अखिल भारतीय दिगंबर जैन विद्यालय ने किया है। प्रस्तुत पुस्तक में लगभग १६० पृष्ठों का पाठ है।
पुस्तक का शीर्षक ही इसके विषय की ओर संकेत कर देता है — देव, शाला और गुरु, अर्थात वेद, शिक्षा और आचार्य की परंपरा। जैन दर्शन में देव और गुरु को सर्वोपरि माना गया है, और इसी भाव से ग्रंथ में इन तीनों अवयवों का संबंध स्पष्ट किया गया है। जैन-दर्शन के इतिहास, तत्त्व-चर्चा और परंपरा के अध्याय इसमें मिलते हैं।
जैन-दर्शन के अध्येताओं, संस्कृत-विद्वानों तथा धार्मिक-परंपरा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक उपयोगी है। दिगंबर जैन परंपरा के शोधकर्ताओं के लिए यह एक सार्थक ग्रंथ है। समग्र जैन-दर्शन को एकत्र देखने की इच्छा रखने वालों के लिए यह पुस्तक काफ़ी महत्वपूर्ण है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- देव-शास्त्र तथा गुरु का महत्व
- गुरु-परंपरा तथा शिष्य के कर्तव्य
- उपासना तथा श्रद्धा की बातें
- प्रेरक प्रसंग
पुस्तक की मुख्य बातें
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