गणेश दुर्गा स्तोत्रावली (1935, श्रीनगर) – Ganesh Durga Stotravali
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गणेश दुर्गा स्तोत्रावली देवी-देवताओं के स्तोत्रों का संकलन है, जिसमें गणेश और दुर्गा दोनों के स्तोत्र प्रमुख हैं। शीर्ष पृष्ठ पर इसे स्तोत्रावली-माला का भाग बताया गया है और इसके निबन्ध-सम्पादन श्री केशव भट्ट ने किया है। प्रकाशन श्रीनगर (कश्मीर) के एरणलाल प्रकाशन, नीडा से हुआ और यह संस्करण १९३५ का है। पुस्तक लगभग छत्तीस पृष्ठ की है।
पुस्तक में सर्वप्रथम अथ गणेशस्तोत्रम् आता है, जिसमें मूल श्लोक के साथ उनकी टीका और मातृका-अनुक्रमणिका की व्याख्या भी दी गई है। इसके बाद सोन्दर्यलहरी जैसे प्रश्नोत्तर-शैली के स्तोत्र, देवी-पूजा संबंधी रात्रि-स्तुति, नमो नारायण तथा रुद्र-पंचकम् जैसे स्तोत्र आते हैं। हर स्तोत्र के आरंभ में श्रीगणेशाय नमः या इसी प्रकार का आवेशन दिया गया है। मूल पाठ संस्कृत श्लोकों में है और व्याख्या हिन्दी में मिलती है।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो देवी-देवताओं के स्वरूपों के स्तोत्र-पाठ में रुचि रखते हैं, और जिन्हें श्लोक-अर्थ समझने के लिए टीका के साथ पढ़ने की आदत है। कश्मीर में छपा होने के कारण इसकी मुद्रण-शैली और लिपि अलग दिखती है, जो पुराने साहित्य-संग्रहों के लिए रुचिकर है। कम पृष्ठ-संख्या के कारण इसे कुरान-पाठ की तरह बार-बार पढ़ा जा सकता है। साधना और पाठ-अभ्यास में रुचि रखने वालों के लिए यह एक सुंदर और सस्ता संदर्भ है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- स्तोत्र/पाठ का मूल पाठ तथा हिंदी अर्थ
- पाठ करने की विधि तथा समय
- पाठ का फल तथा महत्व
- सरल उच्चारण के लिए सहायक निर्देश
पुस्तक की मुख्य बातें
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