Kalyan Shivanka -Gita Press Gorakhpur
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यह पुस्तक कल्याण शिवांकू नामक शिव-विशेषांक है, जिसकी भीतर श्रीशिवांकू अथवा परिशिष्टपूजा नामक शीर्षक की सामग्री दी गई है। आवरण पर इसे आठवें वर्ष का विशेषांक बताया गया है। प्रकाशक गीताप्रेस, गोरखपुर है। पृष्ठ पर सम्पादक-पूजाकार के रूप में शेखर का नाम दिया गया है, संपादक भागवत-विज्ञान गोपाल के रूप में और मुख्य अध्यक्ष के रूप में श्री नृसिंहजी महाराज, वैदिक विद्वान का नाम आया है।
एक प्रति का मूल्य एक सौ रुपये अंकित है। पुस्तक के आरम्भ में कीर्तन रूपा पंक्तियाँ दी गई हैं, जिनमें समय समाप्ति, जय शंकर, हर हर शंकर दुखहर, हरे कृष्ण, जय मा तारा, जय गणेश, जययति शिवा-शिव जानकीराम, गौरी-शंकर सीताराम और जय रघुनन्दन जय सियाराम जैसे मन्त्र-पद जल हैं।
विषय-सूची में शिव-पूजा से जुड़े अनेक प्रकरण दिए गए हैं, जिनमें नित्य-निमित्त, शिव-पुराण वर्णन सहित, व्रत-पंचकला, नवग्रह-मन्त्राक्षर और कल्याणकल्पलता जैसे विषय स्पष्ट हैं, और पूजा-संस्कार तथा हवन-विधान के अध्याय भी दिए गए हैं। पैमाना लगभग 786 पृष्ठ का है, जो दर्शाता है कि यह अनेक अंकों का संकलित संस्करण है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- शिव पर लेख तथा कथाएँ
- शिव-उपासना तथा व्रत
- पूजा-विधि तथा मंत्र
- आध्यात्मिक मार्गदर्शन
पुस्तक की मुख्य बातें
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