लहसुन और उसके उपयोग | Lahsun Aur Uske Upyog
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शीर्षक-पृष्ठ पर पुस्तक का नाम लहसुन और उसके उपयोग अंकित है और पृष्ठ पर छत्रपुर संवत् २९७२ भी उल्लिखित है। लेखक के रूप में डॉ० गंगाप्रसाद मौद नाहर, एम० डी० का नाम दिया गया है, जो भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा एवं विज्ञानात्मय विश्वविद्यालय, बरेला के प्रधानाचार्य एवं प्रधान वैज्ञानिक बताए गए हैं। प्रकाशन तेजकुमार बुक डिपो प्राइवेट लिमिटेड, नवल किशोर बुक डिपो, मिलीनियम रोड, लखनऊ से कराया गया है। पञ्चम संस्करण जून २००० का है और कीमत पाँच रुपये दर्ज है।
विषय-सूची में लहसुन के गुण और दोष, उसका अग्नि-रसायन होना, खाद्य-विलेखन, दोष, निर्मिता की विधि, चिकित्सा-सम्बन्धी उपयोग तथा भोजन-सम्बन्धी उपयोग अलग-अलग अध्यायों में दिए गए हैं। पहला पाठ श्लोकों से शुरू होता है, जिनमें कहा गया है कि लहसुन का जन्म अमृत से हुआ है और संसार में शायद ही कोई ऐसा रोग हो जो लहसुन के प्रयोग से न अच्छा किया जा सके। आगे अतुलोद्भवमूलं जैसे श्लोकों में लहसुन को रसायन और बलवर्धक बताया गया है तथा चिकित्साशास्त्र के अनुसार उसे शीतल, पित्तक, कटु, दीपनीय और कफहर माना गया है।
लहसुन एक सामान्य खाद्य पदार्थ है, पर इसके औषधीय गुणों का दावा करने वाले ग्रन्थ पढ़ते समय यह समझ लेना आवश्यक है कि शास्त्रों में दर्ज गुण आधुनिक वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। बढ़ा हुआ लहसुन खाना या कच्चा सेवन करना कुछ लोगों में पेट तथा हृदय-संबंधी समस्याएँ उत्पन्न कर सकता है। किसी भी बीमारी में लहसुन को दवा के रूप में लेने से पहले योग्य आयुर्वेद चिकित्सक या आधुनिक चिकित्सक से अवश्य परामर्श लें और बिना सलाह के किसी भी औषधि का सेवन न करें।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- लहसुन के गुण तथा चिकित्सकीय उपयोग
- अनेक रोगों में प्रयोग
- विधि तथा मात्रा
- सावधानियाँ
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
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