मैथिली तथा संस्कृत साहित्य में गौरी शंकर – Maithili Tatha Sanskrit Sahitya Mein Gauri Shankar
इस किताब के बारे में
मैथिली तथा संस्कृत साहित्य में गौरी-शंकर पुस्तक के लेखक नीरजा रेणु हैं, जो एक वैदानिक लेखक और गणितज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। पुस्तक का विषय साहित्य है — विशेषकर मैथिली और संस्कृत दोनों परंपराओं में गौरी और शंकर की रस-भाषा काव्य-रचना। प्रस्तुत पुस्तक में लगभग २६० पृष्ठों का पाठ है।
पुस्तक में बताया गया है कि मैथिली और संस्कृत साहित्य दोनों में गौरी और शंकार की चर्चा का एक पूरा इतिहास मिलता है। साहित्यिक इतिहास, धार्मिक पृष्ठभूमि और साहित्यिक सरस्वती की रचनाएँ — तीनों दृष्टिकोणों से विषय को समझाया गया है। यह साहित्य-इतिहास की दृष्टि से शोध का महत्वपूर्ण कार्य है।
साहित्य-अध्येताओं, साहित्य-प्रेमियों और मैथिली-भाषा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक बहुत उपयोगी है। शोधकर्ताओं के लिए भी यह एक सार्थक संदर्भ है। जो पाठक ऐसे विषयों में गहराई से जाना चाहें, उनके लिए यह पुस्तक एक अच्छा आरंभ है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- साहित्यिक अध्ययन तथा शोध
- गौरी शंकर की रचनाएँ
- मैथिली तथा संस्कृत साहित्य
- समीक्षात्मक दृष्टि
पुस्तक की मुख्य बातें
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