नारी की महानता (पं. श्रीराम शर्मा आचार्य) – Nari Ki Mahanta
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आवरण पर इस पुस्तक का नाम नारी की महानता छपा है और लेखक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य हैं। प्रकाशक युग निर्माण योजना, गायत्री तपोभूमि, मथुरा है और मुद्रक भी वहीं का युग निर्माण योजना प्रेस है। पन्ने पर मूल्य २.०० रुपया और सन् २००३ दिया है। पुस्तक का पाठ २२ पन्नों का है।
पुस्तक में नारियों के उत्थान की समस्या, नारी धर्म का प्राचीन आदर्श, गृहणी पद, नारी जागरण और वर्तमान सामाजिक स्थिति, भावी युग में नारी का स्थान तथा राष्ट्रीयता में नारियों का स्थान जैसे शीर्षकों के नीचे बात रखी गई है। आरंभ में कहा गया है कि घर की शांति स्त्री और पुरुष दोनों के सहयोग पर टिकी है और नारी को अपना भला-बुरा समझने योग्य शिक्षा मिलनी चाहिए। नारी धर्म के आदर्श के रूप में सत्यभामा और द्रौपदी का संवाद है, जिसमें द्रौपदी पति-सेवा, संतोष और इंद्रिय-संयम की बात कहती है।
गृहणी और माता के पद पर लेखक ने स्त्री को परिवार का केंद्र बताया है और कहा है कि बच्चों के पालन-पोषण तथा घर के वातावरण का असर उनकी आदतों पर पड़ता है। आगे के अध्यायों में तत्कालीन सामाजिक स्थिति, शिक्षा की कमी और रूढ़ियों की आलोचना है, साथ ही यह आशा जताई गई है कि आने वाले युग में नारी अपने विशिष्ट भाग का निर्वाह करेगी। पुस्तक छोटी है और सीधी भाषा में लिखी गई है। पन्नों पर उस समय के सामाजिक विचार झलकते हैं, इसलिए इसे उसी परिप्रेक्ष्य में पढ़ें।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- इस विषय की उपयोगी तथा ज्ञानवर्धक सामग्री
- सरल हिंदी भाषा में लिखा गया पाठ
- साधक तथा सामान्य पाठक — दोनों के लिए उपयोगी
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पुस्तक की मुख्य बातें
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