नाव चली | NAV CHALI
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नाव चली एक कविता है, जिसके लेखक वी. सुरोजेव हैं और जिसे चित्र तथा कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक एकलव्य का प्रकाशन है और इसे एजुकेशन एसोसिएशन, नई दिल्ली से प्रकाशित किया गया है। ISBN 978-81-87171-92-8 अंकित है और दूसरा संस्करण नवम्बर 2008 में निकला, जब इसका मूल्य 15 रुपये रखा गया था।
कविता 10 वर्ष के बच्चों के लिए लिखी गई है और कल्पना-सा दृश्य सामने रखती है — एक चार शब्द, एक चुगली, एक चूहा, एक बीली और एक गुजरला सब साथ चल पड़ते हैं। कविता चलते-चलते वे एक झील के किनारे पहुंचते हैं। बाल-सुलभ पात्रों और रहस्यमय झील की दुनिया बनाते हुए यह कविता कल्पनाशक्ति को प्रेरित करती है।
यह किताब छोटे बच्चों के लिए चित्र-कविता के रूप में बहुत सुंदर है। पढ़ने के साथ-साथ बच्चे इसकी चित्र-सज्जा और रंगों में भी आनंद लेते हैं। छोटी सी पुस्तिका होने के बावजूद यह शब्द-चयन और तात्पर्य के कारण आज भी उपयोगी है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- कहानी तथा प्रेरक प्रसंग
- जीवन से मिलने वाली सीख
- पात्र तथा घटनाएँ
- सरल भाषा
पुस्तक की मुख्य बातें
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