नीतिशतकम् – Neeti Shataka
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शीर्षक-पन्ने पर यह ग्रन्थ श्रीभर्तृहरिविरचित नीतिशतकम् छपा है और साथ में अन्वय, हिन्दी अनुवाद, हिन्दी व्याख्या तथा व्याकरणात्मक टिप्पणी लिखी है। व्याख्याकार डॉ० राकेश शास्त्री, संस्कृत-विभाग, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, लांसवाडा (राजस्थान) हैं। यह परिमल संस्कृत ग्रन्थमाला का छियालीसवाँ ग्रन्थ है। प्रकाशक परिमल पब्लिकेशन्स, २७/२८ शक्ति नगर, दिल्ली है। द्वितीय संस्करण १९९८ और तृतीय संस्करण २००३ का है; मूल्य ६० रुपये रखा गया है और मुद्रक हिमांशु लेजर सिस्टम, दिल्ली है।
विषय-सूची के अनुसार पुस्तक खंडों में बँटी है। शुरुआत में दो शब्द और विस्तृत भूमिका है, जिसमें गीतिकाव्य का स्वरूप, उद्भव और विकास, भर्तृहरि का जीवन-चरित, स्थितिकाल, कृतियाँ और भाषा-शैली पर बात है। इसके बाद अथ नीतिशतकम् आता है, जिसमें श्लोक मूर्ख, विद्वत्, मानशौर्य, अर्थ, दुर्जन, सज्जन, परोपकार, धैर्य, दैव और कर्म — इन दस पद्धतियों में बाँटे गए हैं।
हर श्लोक के साथ अन्वय, हिन्दी अनुवाद, व्याख्या और व्याकरण की टिप्पणी दी गई है, इसलिए विद्यार्थी श्लोक को शब्दशः समझकर आगे बढ़ सकता है। परिशिष्ट में संस्कृत व्याख्या और हिन्दी व्याख्या के उदाहरण, विद्वत्पद्धति का सारांश, अकारादि क्रम में शब्दार्थ तथा श्लोकानुक्रमणिका है। यह पुस्तक विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और संस्कृत नीति-काव्य के अध्येताओं के लिए उपयोगी है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- इस विषय की उपयोगी तथा ज्ञानवर्धक सामग्री
- सरल हिंदी भाषा में लिखा गया पाठ
- साधक तथा सामान्य पाठक — दोनों के लिए उपयोगी
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