रत्न व रुद्राक्ष रहस्य – Ratna Evan Rudraksha Rahasya
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आवरण-पृष्ठ पर पुस्तक का नाम रत्न व रुद्राक्ष रहस्य अंकित है और उसके ऊपर रत्न व रुद्राक्ष की पहचान, गुण व धारण विधि होने का उल्लेख है। शीर्षक-पृष्ठ पर इसे व्याख्या व रत्न की पूर्ण जानकारी का अद्वयुत संकलन बताया गया है और लेखक के रूप में विचयनकुमार ब्रजवास का नाम आया है। प्रकाशक असलोमल्ट विचयनकुमार है और रमजीनी की दुकान, बड़ा बाजार, हरिद्वार का पता दिया गया है। साथ ही केदार पुरा, वाराणसी तथा केनरा और गोस्वामी शोरूम के पते भी मुद्रित हैं। मूल पचास रुपये अंकित है।
पुस्तक के आरंभ में उद्देशय एवं निवेदन अध्याय आता है जिसमें विजय कुमार अग्रवाल ने लिखा है कि रत्नों का प्रयोग दैवी साधना और परंपरागत पूजा-पाठ का अंग है, इसलिए उनका विधिपूर्वक प्रयोग आवश्यक है। इसके बाद भूमिका और रत्नों का इतिहास अध्याय आते हैं, जिनमें प्राचीन भारतीय और पाश्चात्य विद्वानों के उद्धरण भी दिए गए हैं। इसके बाद विषय-सूची आती है जिसमें साठ प्रविष्टियाँ पृष्ठ-संख्याओं के साथ दर्ज हैं, जिनमें रत्न-गुण, कुबेर-लाभ, दशहरा-धारणा, रुद्राक्ष-विधि, रुद्राक्ष-ज्ञान, गोमेट और निमित्त शर्मा जैसे विषय प्रमुख हैं।
यह पुस्तक रत्नों की पहचान, गुण और धारणा-विधि पर एक संदर्भ-पुस्तिका है जिसमें रूढ़ परंपरा के आधार पर अनेक सूत्र दिए गए हैं। ज्योतिष, वास्तु-शास्त्र और रत्न-परीक्षण के इतिहास के अध्ययन के लिए यह पाठ उपयोगी माना जाता है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- रत्नों तथा रुद्राक्ष का रहस्य
- उनके गुण तथा प्रभाव
- धारण करने की विधि
- ग्रह-उपाय
पुस्तक की मुख्य बातें
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