The Hymns of the Rigveda – Ralph T. H. Griffith (English Translation)
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यह पुस्तक ऋग्वेद का अंग्रेज़ी अनुवाद है, हिन्दी नहीं। शीर्ष पृष्ठ पर इसे The Hymns of the Rigveda नाम से और Book the First के रूप में अंकित किया गया है, और पाठ पूरी तरह अंग्रेज़ी भाषा में छपा है। अन्त के प्रकाशन-विवरण में स्पष्ट लिखा है — Translated from the Rig-Veda by Ralph T. H. Griffith, Benares, E. J. Lazarus। पहला सूक्त अग्नि की स्तुति से आरंभ होता है। पुस्तक लगभग एक हज़ार छह सौ छत्तीस पृष्ठ की है।
पुस्तक में दो भाग साथ-साथ दिए गए हैं — पहला अंग्रेज़ी अनुवाद है और उसके साथ संस्कृत मूल पाठ, जो IAST वैज्ञानिक लिपि में लिप्यंतरित रूप में दिया गया है। हर सूक्त के नीचे टिप्पणियाँ और संदर्भ दिए गए हैं, जिनमें उन्नीसवीं शताब्दी के विद्वानों — राल्फ़ ग्रिफ़िथ, मैक्स मूलर, रोथ और बोह्लिंग्क आदि — के कार्यों का उल्लेख मिलता है। TRANSLATION AND NOTES नामक अलग भाग भी जोड़ा गया है, जिसमें अनुवादक की विवेचनात्मक टिप्पणियाँ हैं। अथर्व-अरण्यक का भी वर्णन पाया जाता है।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो ऋग्वेद का अंग्रेज़ी अनुवाद पढ़ना चाहते हैं। ग्रिफ़िथ का अनुवाद वैदिक साहित्य का प्रामाणिक अंग्रेज़ी रूप माना जाता है और आज भी विद्वान इसे संदर्भ के रूप में देते हैं। संस्कृत मूल का IAST रूप साथ होने से भाषा जानने वाले पाठक मूल पाठ की जाँच भी कर सकते हैं। हिन्दी पाठकों के लिए यह सीधे पठनीय नहीं, पर अध्ययन और अनुवाद-कार्य में संदर्भ के रूप में अत्यंत उपयोगी है। इसे हरिसालग्रन्थ की हिन्दी अनुवाद-पुस्तक समझकर न खरीदें।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- आत्मा तथा ब्रह्म का स्वरूप
- जगत् की उत्पत्ति, माया तथा अद्वैत
- साधना, ध्यान तथा आत्मज्ञान के सोपान
- उपनिषद् तथा गीता का सार
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
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