रुहानी सत्संग एवं श्रद्धा भजन माला – Ruhani Satsang Evam Shraddha Bhajan Mala
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शीर्षक-पृष्ठ पर पुस्तक का नाम रुहानी सत्संग एवं श्रद्धा भजन माला अंकित है और उसके ऊपर रचयिता व संग्राहक का नाम दिया गया है, जिसमें श्री मैत्रे 1008 स्वामी श्रद्धानन्द पुरी जी महाराज का उल्लेख है। उसी पृष्ठ के नीचे श्री अर्जुन स्वरूप आश्रम का नाम लिखा है और भेड़ा नगर, शाहपुर कण्डी, पठानकोट का पता दिया गया है।
पुस्तक का आरंभ एक प्रार्थना-अनुभाग से होता है और उसके बाद भूमिका नामक अनुभाग आता है, जिसमें सत्संग से मिलने वाली आन्तरिक शान्ति और तत्त्वज्ञान प्राप्ति पर विचार व्यक्त किए गए हैं। इसके बाद श्री गुरु-वन्दना का अनुभाग है, जिसमें लेखक ने अपने गुरु के चरण-स्पर्श और उनके प्रवचनों की प्रेमपूर्वक स्मृति व्यक्त की है। पुस्तक के आगे विषय-सूची में लगभग तीस प्रविष्टियाँ दस भागों में बँटी हुई हैं, जिनमें भक्ति का स्वरूप, भक्त की स्थिति, स्वप्न, ईश्वर दर्शन, गुरु भक्ति, उपदेश, चेतावनी और प्रेरणा जैसे प्रकरण प्रमुख हैं।
यह पुस्तक आध्यात्मिक सत्संग की प्रवचन-शैली में लिखी भजन-माला और सत्संग-संग्रह है, जिसमें श्रद्धा और भक्ति के साथ जीवन-दर्शन भी मिलता है। भक्ति-साहित्य और आध्यात्मिक प्रवचन के अध्ययन के लिए यह पाठ उपयोगी माना जाता है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- स्तोत्र/पाठ का मूल पाठ तथा हिंदी अर्थ
- पाठ करने की विधि तथा समय
- पाठ का फल तथा महत्व
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पुस्तक की मुख्य बातें
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