श्री चक्र चरितम् — श्री सुदर्शन सिंह ‘चक्र’ जी
बटन दबाते ही डाउनलोड अपने आप शुरू हो जाएगा — बस इंतज़ार कीजिए।
⬇ मुफ़्त PDF डाउनलोड करें📖 डाउनलोड नहीं हो रहा? निर्देश और मदद यहाँइस किताब के बारे में
श्री चक्र चरितम् नामक ग्रंथ का लेखन बहन सौभाग्य कुँवर राणावत ने किया है और संकलन-संपादन डॉ० बालचन्द्रिका पाठक (डी० लिट्टो) ने किया है। शीर्षक-पृष्ठ पर "श्रीचक्रचरितम्" बड़े अक्षरों में अंकित है और नीचे "संकलन", "संयोजन" शब्द दिए गए हैं। प्रकाशक "हनुजद्याम, श्रीराम आध्यात्मिक प्रन्यास, शुकतोड़, जिला गुजरतनगर (उ०प्र०)" है। आवरण पर एक विरक्त साधु का चित्र दिया गया है। पुस्तक लगभग चार सौ पचासी पृष्ठों की है।
यह ग्रंथ श्री चक्रजी का चरित्र है। पुस्तक में बताया गया है कि उनका पूर्वनाम सुदर्शन था और उनके पिता ठाकुर रामकिशोर सिंह थे; बाल्यकाल में माँ सरूपा ने शिशु को श्री चक्रजी के चरणों में रख दिया था, और बड़े होकर उन्होंने "चक्र" यह उपनाम धारण कर लिया। आरंभ में मंगलाचरण और समर्पण के पृष्ठ हैं, जिनमें श्रीराधाकृष्ण और नन्द की चर्चा तथा एक छत्तीसगढ़ शिवपीठ का चित्र दिया गया है। इसके बाद बाल्यकाल की पौराणिक कथाएँ, गो-स्नेह, यात्रा-वृत्त और गुरु के प्रति अनन्य भक्ति जैसे प्रसंग क्रमशः आते हैं। पाठ में उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर हुए शोध-प्रबंध का भी उल्लेख मिलता है।
जिस तरह पुराणों के रूप के चरित्र-ग्रंथ किसी आदि संत की जीवन-यात्रा को सहज भाषा में सामने रखते हैं, वैसा ही यह पुस्तक श्री चक्रजी के जीवन को उपस्थित करता है। बाल्यकाल के प्रसंग और गुरु-सद्भाव के बीच बीती उनकी आत्मा-यात्रा पाठक को केवल जानकारी नहीं, बल्कि एक पूरा चरित्र देती है। यह पुस्तक पढ़ने और समझने के लिए है; इसे पूजा-पाठ, आचार-नियम या साधना-विधि न मानें, और धार्मिक आस्था के स्थान पर केवल पढ़ने के उद्देश्य से ही इसे देखा जाना चाहिए।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- योगासन तथा उनकी विधि
- प्राणायाम के प्रकार तथा लाभ
- ध्यान तथा साधना के सोपान
- अभ्यास में सावधानियाँ
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
डाउनलोड के बाद फ़ाइल “Downloads” फ़ोल्डर में मिलेगी — वहीं से कभी भी दोबारा पढ़ सकते हैं। कोई दिक्कत हो? हमें बताएँ
🙏 यह पुस्तक साझा करें
इस पुस्तक का लिंक मित्रों को भेजिए — इसी तरह ज्ञान सब तक पहुँचेगा।
इसी श्रेणी की और किताबें
उपनयन विधि – Upanayan Vidhi
सूर्यसहस्रनामावली – Surya Sahasra Namavali
श्री महिम्न स्तोत्रम् (कश्मीरी) – Shri Mahimna Stotram
अमृत वाणी (भाग 1) – Amrit Vani
यजुर्वेद संहिता (आर्य समाज परोपकारिणी सभा) – Yajurveda Samhita
श्री महानारायण सहस्रनामावली स्तुति – Shri Maha Narayan Sahasra Namavali
ज्ञान रेह (कश्मीरी) – Gyan Reh Kashmiri
गणेश दुर्गा स्तोत्रावली (1935, श्रीनगर) – Ganesh Durga Stotravali