श्री प्रेम सुधा सागर | Shri Prem Sudha Sagar By Gita Press
इस किताब के बारे में
श्री प्रेम-सुधा-सागर एक आध्यात्मिक प्रबन्ध-संग्रह है, जिसके रचयिता कल्याणकारी श्रीगुरुश्री के हृदय के वशीभूत महात्माजी हैं। प्रकाशन गीता प्रेस, गोरखपुर से हुआ है और पुस्तक का मूल्य ₹१० रखा गया है। पुस्तक में लगभग ३४४ पृष्ठों का पाठ है। शीर्षक-पृष्ठ पर स्पष्ट रूप से “प्रबंध-समग्र” अंकित किया गया है।
संग्रह में श्रीगुरुश्री के आध्यात्मिक प्रबन्धों का संकलन है। प्रेम, भक्ति, साधना और जीवन-दर्शन से जुड़े विषयों पर ये प्रबन्ध लिखे गए हैं। भाषा इतनी सरल है कि अनुभवी और अनभवी दोनों पाठक इसे समझ सकते हैं। पृष्ठ-सूची में प्रत्येक प्रबन्ध अलग से दर्ज है, जिससे रुचि के अनुसार पढ़ा जा सकता है।
आध्यात्मिक साधकों, भक्ति-मार्गी पाठकों तथा गीता प्रेस के प्रिय पाठकों के लिए यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी है। श्रीगुरुश्री के अनुयायियों के लिए यह एक मूलभूत ग्रंथ है। कम मूल्य में उपलब्ध होने के कारण यह बहुत अधिक पाठकों तक पहुँची है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- भक्ति तथा प्रेम का संकलन
- भगवन्नाम तथा सत्संग
- संत-वाणी तथा उपदेश
- आत्म-कल्याण के उपाय
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
डाउनलोड के बाद फ़ाइल “Downloads” फ़ोल्डर में मिलेगी — वहीं से कभी भी दोबारा पढ़ सकते हैं। कोई दिक्कत हो? हमें बताएँ
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