श्याम का स्वभाव — श्री सुदर्शन सिंह ‘चक्र’ जी
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श्याम का स्वभाव भगवान श्रीकृष्ण के स्वभाव पर आधारित पुस्तक है। शीर्षक-पृष्ठ पर शीर्षक श्याम का स्वभाव बड़े अक्षरों में अंकित है और उसके नीचे लेखक के रूप में सुदर्शन सिंह चक्र का नाम दिया गया है। प्रकाशक का नाम राजदीप नारायण शंखधर है और पता १/२६७ रिफाइनरी नगर, मधुरा (३० प्र०) दर्ज है। प्रकाशन तिथि अप्रैल कृष्ण एकादशी, संवत् २०६७ बताई गई है और यह तृतीय संस्करण है। पुनर्मुद्रण-पुनःप्रकाशन लखनऊ में हुआ है और मुद्रक गोपारा ऑफसेट डिप्स, दिल्ली है। पुस्तक लगभग बयासी पृष्ठ की है।
पुस्तक की शुरुआत अपनी बात नामक अध्याय से होती है, जो लेखक ने स्वयं लिखा है और जिसमें अपने जीवन-दर्शन पर बात की गई है। आगे भगवान श्याम के स्वभाव पर चर्चा है — उनकी लीला, उनका मन और भक्तों से उनका व्यवहार। पाठ में किसान और ग्वाल-गीत जैसी जन-परंपरा से जोड़कर कृष्ण-भाव को समझाने का प्रयास किया गया है। आत्मकथा और भक्ति-चर्चा के बीच संवाद जैसा ढंग बनाया गया है। अंतिम पृष्ठों में लेखक का हस्ताक्षर सुदर्शन सिंह चक्र अंकित मिलता है।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो भगवान कृष्ण के भाव को गहराई से समझना चाहते हैं। अपनी बात अध्याय लेखक के अपने अनुभव से जुड़ा है, इसलिए पाठ निजी और सीधा लगता है। मधुरा से प्रकाशित यह पुस्तक उस युग निर्माण-परंपरा से जुड़ी किताबों में आती है, जिसका अपना अलग पहचान वाला शैली है। भक्त-साहित्य में रुचि रखने वालों के लिए यह पुस्तक अध्ययन और उपासना दोनों में सहायक है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- योगासन तथा उनकी विधि
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