सांख्य एवं काश्मीर शैव दर्शन में सृष्टि – डॉ० विजय शंकर द्विवेदी
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सांख्य एवं काश्मीर शैव दर्शन में सृष्टि दर्शनशास्त्र की पुस्तक है जो मूलतः सृष्टि की समस्या पर केंद्रित है। शीर्ष पृष्ठ पर इसे इसी नाम से अंकित किया गया है। लेखक डॉ० विजय शंकर द्विवेदी हैं और सम्पादन डॉ० कृष्णकान्त शर्मा ने किया है। पुस्तक लगभग दो सौ अठाईस पृष्ठ की है।
पुस्तक में सांख्य दर्शन और काश्मीर शैव दर्शन — दोनों ही मतों में सृष्टि को कैसे समझा गया है, इसका तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। सृष्टि-प्रक्रिया, उसके कारण, प्रकृति तथा ईश्वर के सम्बन्ध जैसे प्रश्नों पर दोनों दर्शनों के सिद्धान्तों की व्याख्या दी गई है। काश्मीर शैव दर्शन के प्रवर्तक सोमचन्द्र और शंकराचार्य जैसे आचार्यों के मत का भी उल्लेख मिलता है। शैली विद्वानों जैसी है, पर तर्क स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया है।
यह पुस्तक दर्शन, धर्म और इतिहास के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है, विशेषकर उन लिए जो सृष्टि-विवाद पर पक्ष-विपक्ष समझना चाहते हैं। भारतीय दर्शन में यह प्रश्न केवल धार्मिक माना जाता है, जबकि यह पुस्तक इसे एक तार्किक समस्या के रूप में उठाती है। दो भिन्न दर्शनों की तुलना एक ही पुस्तक में मिलना दुर्लभ है। अतः दर्शनशास्त्र में रुचि रखने वाले सामान्य पाठक भी इसे लाभपूर्वक पढ़ सकते हैं।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- सृष्टि तथा ब्रह्मांड की रचना
- विज्ञान तथा धर्म की दृष्टि
- प्राकृतिक नियम
- सरल व्याख्या
पुस्तक की मुख्य बातें
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