तर्कसंग्रह – Tarka Sangraha
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शीर्षक-पन्ने पर यह ग्रन्थ श्रीमदन्नम्भट्टविरचित तर्कसंग्रह छपा है। व्याख्याकार डॉ० राजेश्वर शास्त्री मुसलगोंवकर हैं। यह काशी संस्कृत ग्रन्थमाला का ग्रन्थ है, जो चौखम्भा संस्कृत संस्थान, वाराणसी से छपा। प्रथम संस्करण वि० सं० २०६९ (२०१३) का है और मूल्य १५५ रुपये रखा गया है।
पातनिका में कहा गया है कि तर्कशास्त्र का अध्ययन चार पुरुषार्थों का हेतु है और तर्कसंग्रह संक्षिप्त होकर भी समस्त न्यायशास्त्रीय तत्त्वज्ञान कराने वाला है। इस पर अनेक टीकाएँ लिखी गईं, पर ग्रन्थ दुर्बोध होता गया। इस कठिनाई को देखकर व्याख्याकार ने तर्कमीमांसा नाम की हिन्दी टीका लिखी, जिसमें ग्रन्थकार का हृदय छूने का प्रयत्न किया गया और विषयों को सरल ढंग से समझाया गया।
ग्रन्थ का ढाँचा द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय और अभाव, इन सात पदार्थों के क्रम पर है। भूमिका में बताया गया है कि न्याय के प्रमाण आदि सोलह पदार्थों का अन्तर्भाव इन्हीं सात पदार्थों में हो जाता है और पदार्थों का एक रेखाचित्र भी दिया गया है। मूल पाठ के साथ अन्नम्भट्ट की अपनी दीपिका, चन्द्रसिंह का पदकृत्य और तर्कमीमांसा नाम की हिन्दी व्याख्या साथ-साथ चलती है। परिशिष्ट में यू० जी० सी० नेट परीक्षा में आए वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तरों की सूची है। यह संस्कृत विद्यार्थियों, न्यायशास्त्र के अध्येताओं और प्रतियोगी परीक्षा देने वालों के लिए उपयोगी है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- ज्योतिष के मूल सिद्धांत
- ग्रह-राशि-भाव की गणना तथा स्थिति
- दशा तथा फलादेश की विधि
- जन्मपत्री तथा मुहूर्त
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