विवेकी विभीषण — श्री सुदर्शन सिंह ‘चक्र’ जी
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विवेकी विभीषण रामायण-विषयक कथा-संग्रह है। शीर्षक-पृष्ठ पर शीर्षक विवेकी विभीषण बड़े अक्षरों में अंकित है और नीचे लेखक के रूप में श्री सुदर्शन सिंह जी का नाम दिया गया है। शीर्षक-पृष्ठ के ऊपर प्रकाशक का नाम भी अंकित है। पुस्तक में प्रारंभ में मानस-चर्चा नामक अध्याय है जो मानस स्वामी के हस्ताक्षर से प्रकाशित हुआ है। पुस्तक लगभग पैंसठ पृष्ठ की है।
पुस्तक में रामायण के पात्र विभीषण के माध्यम से किए गए विचार-विवेक पर केंद्रित है। आरंभ में परिचय अध्याय में मानस और रामचरितमंजरी से लिए गए श्लोक उद्धृत किए गए हैं। आगे मानस-चर्चा में भक्ति, सेवा, वात्सल्य और ज्ञान जैसे भावों पर टिप्पणी की गई है। कई स्थानों पर X और Y शीर्षक वाले अलग-अलग मत रखे गए हैं, जिनमें दोनों पक्षों की बातें आमने-सामने दी गई हैं। पाठ में प्रश्न-उत्तर शैली का प्रयोग भी हुआ है, जिससे विचार-मंथन स्पष्ट होता है।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो रामायण को केवल कथा नहीं बल्कि विचार-साहित्य की तरह पढ़ना चाहते हैं। विभीषण जैसे गौतम पात्र के माध्यम से किए गए प्रश्न आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। लेखक ने मानस के भावों को आसान हिन्दी में समझाने का प्रयास किया है। छोटी पृष्ठ-संख्या के बावजूद पुस्तक में कई गंभीर विचार दिए गए हैं। राम-कथा को गहराई से समझने वाले पाठकों के लिए यह छोटी पुस्तक बहुत काम आएगी।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- योगासन तथा उनकी विधि
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- अभ्यास में सावधानियाँ
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