दादी माँ के गुप्त सिद्ध प्रयोग | Dadi Maa Ke Nuskhe Hindi Mein

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दादी माँ के गुप्त सिद्ध प्रयोग | Dadi Maa Ke Nuskhe Hindi Mein

(१) आधासीसी-नाशक तेल-
शतावरकी ताजी जड़ कूटकर उसका अर्क निचोड़ ले, फिर उसके बराबर तिल का तेल मिला कर मंदी आँचपर पकने दे। तेल मात्र रहने पर प्रात:समय उससे सिर में मालिश करे और सुँघे। दो दिनके प्रयोगसे आधासीसी दूर हो जाती है। स्वानुभूत प्रयोग है।

(२) मुख की झाँइयाँ –
मूली पानी में पीसकर चार-पाँच दिन लगानेसे त्वचा के भीतर की स्याही को खींचकर दूर करता है। इसके बाद चावल पीसकर मुँहपर मर्दन करे ताकि त्वचा की रंगत बराबर हो जाय। लाभदायक सरल सिद्ध प्रयोग है।

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(३) सभी प्रकारके बुखार तथा मलेरिया में-
फिटकरी-भस्म को पिसी हुई मिस्त्री या शक्कर में मिलाकर जिस समय बुखार न हो उस समय देकर फिर दूध पिला दे। ऐसा दो-तीन दिन करने से बुखार उतर जाता है तथा शरीर छः माह तक नीरोग हो जाता है, उसे बुखार का भय नहीं रहता है। अगर बुखारकी हालत में यह दवा दे दी तो दवाई लेने पर बुखार तेज हो जाता है, परंतु बुखार उतरने पर अपना पूर्ण प्रभाव दिखाता है। इसे डॉक्टरोंने भी आजमाते हुए सराहा है।

(४) एग्जीमाकी अचूक दवा-
करेले के पत्तों का रस निकालकर गरम करे, साथ ही तेल भी उसी अनुपात में गरम करे। फिर दोनोंको मिलाकर गरम करे। पानी को मात्रा कम हो जानेपर तेल को छानकर शीशी में सुरक्षित रख ले। इसे एग्जीमापर लगाये, अवश्य लाभ होगा।

(५) एग्जीमा का शर्तिया इलाज-
जमीनमें १ फिट गड्डा खोदकर चूल्हा बना ले, उसमें ऊँट की सूखी मीगनी (लेंडी) डालकर आग लगा दे, पीतल की थाली में पानी भरकर चूल्हे पर रखे, धीरे-धीरे थालीके पेंदे में धुएँका काजल इकट्ठा हो जायगा। आग बुझनेपर सफाईके साथ थालीसे काजल खरोचकर इकट्ठा कर ले और साफ डिब्बीमें रख ले। उसे एग्जीमापर लगाये, इससे पुराने-से-पुराना एग्जीमा भी ठीक हो जाता है।

(६) अंगुलबेड़ा वंशाली (Unit low) की चमत्कारी दवा-
नख छोटा काटनेसे, चोट लगने से, जल जाने से या विषैली वस्तु के खून में आ जानेसे उँगलियों में भयानक जलन-पीड़ा तथा सूजन हो जाती है। इसका देशी, सरल घरेलू प्रयोग इस प्रकार आजमाया हुआ है।
आक जहाँ तक मिले सफेद फूलवाला या समयपर जो भी उपलब्ध हो, उसके दूधको अंगुलबेड़ा पर लगा दे तथा उसके ऊपर सर्पकी केंचुली चिपका दे। लगाते ही जलन और पीड़ा शान्त हो जायगी। एक-दो बार लगानेसे बीमारी दूर हो आराम हो जायगा।

(७) हृदय-रोग के साथ दिल की धड़कन तथा जीर्ण ज्वर के लिये अमृततुल्य चूर्ण –
१-वंशलोचन १० ग्राम,
२-रूमी मुस्तगी ५ ग्राम,
३-गिलोयसत १० ग्राम,
४-हरी इलायची ५ ग्राम,
५-प्रवालभस्म ५ ग्राम,
६-मिस्री ५० ग्राम
इन्हें – पीसकर अच्छी तरह मिलाकर साफ शीशी में रख ले। एक-एक चम्मच दूधके साथ लेते रहे। यह महिलाओं के – लिये भी विशेष लाभप्रद है।

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(८) शिरोभ्रमकी उत्तम औषधि-
काली मिर्च १ तोला दरदराकर घृत में तल ले। उतारकर निकाल ले तथा बचे हुए घी में ५ तोला गेहूँ का आटा डालकर सेक ले। सिक जाने पर नीचे उतार ले और उसमें गुड़ या शक्कर जो पसन्द हो, मिला ले। इसमें उस काली मिर्चको भी मिलाकर रख ले तथा तीन-चार दिन – प्रात:काल भोजन से पूर्व लेता रहे। लाभ होगा।

(९) हल्दी का प्रयोग-
जीर्ण ज्वर में देह में कफ की वृद्धि हो जाती है। सभी प्रकार के कफ के लिये दादी माँ यह प्रयोग करती थी | काली मिर्च, पीपल, तुलसी-पत्र, बिल्व-पत्र, दालचीनी करीब ४-४ रत्ती पानीमें पीसकर कांस्यकी कटोरी या अभावमें पीतल की कलई वाली कटोरी में २ रत्ती पिसी हुई हल्दी डालकर गरम कर पिलाते रहनेसे कफ-वृद्धि रुककर ज्वरमें राहत होती है।

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(१०) अफारा (Flatulence)-
३ ग्राम अजवायन,
१ ग्राम काला नमक,
३ ग्राम सेंधा नमक
मिलाकर गरम पानी से दें, तुरंत आराम मिलता है। इसे आवश्यकतानुसार लगातार प्रयोग भी किया जा सकता है।

(११) सर्दी, जुकाम, खाँसी-
अदरक रस २ मिली०, तुलसीरस १ मिली०, शहद ५ मिली० मिलाकर प्रत्येक ५ घंटेपर लें, ऊपर से गुन गुना पानी लें। २४-४८ घंटे में सर्दी-जुकाम ठीक हो जाता है अथवा देशी घी १० ग्राम, अदरक-रस २ मिली०, २-३ नग काली मिर्च, गुड़ ५ ग्राम पकाकर खाली पेट सुबह लगातार तीन दिनोंतक लें। अन्य किसी दवा की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

(१२) दाँत दर्द के लिए दादी माँ का नुस्खा-
आक का दूध और शहद बराबर मात्रा में मिलाकर रूई के फाहे में लगाकर दाँत पर रखें, कैसा भी दर्द हो गायब हो जाता है।

(१३) दस्त-
दालचीनी तथा कत्था बराबर मात्रा में (कुल १३ ग्राम) पीस लें, फिर १० ग्राम धानका लावा (खील) पीसकर सबको पानी में घोल लें। चीनी तथा नमक अन्दाज से मिलायें। दस्त शर्तिया बंद हो जायगा।

(१४) अनिद्रा-
३ लीटर भैस के दूध के साथ ५ ग्राम अश्वगन्धा का चूर्ण नियमितरूप से लें। अनिद्रा की अचूक दवा है।

(१५) बच्चों के दाँत निकलते समय होने वाली उल्टी, हरे-पीले दस्त-
दाँत की तकलीफ सबको दूर करने के लिये तवे पर सुहागा का खील बनायें, फिर बारीक पीसकर शहद मिलाकर दाँत निकलनेवाले मसूड़ेपर लेप करें। बच्चा अंदर चाट जायगा तथा उसकी तकलीफ दूर हो जायगी।

(१६) मासिक न आनेपर –
१० ग्राम मँगरैला (कलौंजी) का पाउडर सुबह पानी से लें। गर्भिणी इसका प्रयोग न करें। किसी-किसी को इससे पेट में दर्द होता है तो थोड़ी मात्रा में हींगका प्रयोग करें।

(१७) ज्वर में –
चिरायता का काढ़ा पिलायें, कैसा भी ज्वर हो उतर जाता है।

(१८) प्रवाहिका या रक्तातिसार में –
दो-चार जपापुष्प पीसकर मिश्री के साथ चावल के पानी में घोलकर दें। बहुत फायदा होता है।

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नोट :- ऊपर बताये गए उपाय और नुस्खे आपकी जानकारी के लिए है। कोई भी उपाय और दवा प्रयोग करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह जरुर ले और उपचार का तरीका विस्तार में जाने।

2019-02-11T10:14:37+00:00By |Disease diagnostics|0 Comments

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