मानव-शरीरमें नाभि का अत्यधिक महत्त्व है। नाभि मानव-शरीरका गुरुत्वाकर्षण-केन्द्र है। अतः स्वस्थ शरीरके लिये नाभिका अपने स्थानपर रहना आवश्यक है। झटकेसे उठने, भारी सामान उठाने या अन्य किसी कारणसे नाभि अपने स्थानसे हट सकती है। नाभि के अपने स्थानसे ऊपर, नीचे या दायें, बायें हटनेपर क़ब्ज़, दस्त या पेटदर्द की शिकायत हो सकती है, जिनको दवाइयों से ठीक करना अत्यन्त कठिन है। विशेषज्ञ डॉक्टरों को भी ऐसे रोगी की चिकित्सा में भ्रमित होते देखा गया है। कारण है कि एलोपैथिक चिकित्सामें नाभि के महत्त्व के बारे में नहीं बताया जाता। नाभिके अपने स्थानसे हटनेको जाननेके लिये

नाभि खिसकने के लक्षण व पहचान :

१. रोगीको सीधा लिटाये। इस स्थितिमें अपने हाथकी दो अँगुलियों पर तथा अँगूठे को नाभि पर रखकर नाभिका चलना अनुभव किया जा सकता है और पता लगाया जा सकता है कि नाभि अपने स्थानपर है या ऊपर, नीचे, दायें, बायें हट गयी है।

२. रोगीको सीधा लिटा दे। यदि रोगी पुरुष है, तब एक मोटा धागा लेकर उसका एक सिरा नाभिमें दबाकर रखे और दूसरे सिरेसे दोनों निप्पलोंकी दूरी बारी-बारी नापे। एक ही दूरी आनेपर नाभि अपनी जगहपर और अलग-अलग दूरी आनेपर हटी हुई समझनी चाहिये। जब रोगी स्त्री हो तब उसे पलंगपर सीधा लिटाये। पलंगपर हाथ सीधा, पैर सीधा, एड़ी मिली हुई और पंजा खुला हुआ तथा ढीला रखे। अब धागेका एक सिरा नाभिमें दबाकर रखे और दूसरेसे पैरके दोनों अँगूठोंकी दूरी बारी-बारी नापे। अलग अलग नाप आनेपर नाभिको अपने स्थानसे हटी हुई जानना चाहिये।

नाभि को अपने स्थानपर लाने की विधियाँ :

१. रोगीको दरी बिछे पलंगपर सीधा लिटा दे। हाथ सीधे रहें। अब हाथ पुट्ठोंपर लगाये और दोनों पैर मिलाकर पैरों तथा सिरको एक साथ धीरे-धीरे उठाते हुए शरीरको एक नावके रूपमें लाये, कमर पलंगसे लगी रहे। कुछ समय बाद सिर तथा पैर धीरे-धीरे नीचे लाये और हाथ पलंगपर सीधे रखे। फिर धागेसे पुनः नापकर नाभिकी स्थितिमें हुए सुधारको देख ले।

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२. एक वृत्ताकार उठी हुई पेंदीका लोटा लेकर उसे पलंगपर उलटा रखे। लोटेपर मोटा तौलिया रखे।
अब रोगीको इस प्रकार उलटा लिटाये कि नाभि लोटेकी वृत्ताकार पेंदीके अंदर रहे। टाँगें सीधी रखे तथा दोनों हाथ सिरके पीछे मोड़कर रखे। कुछ समय बाद सीधा लिटाये तथा नाभिकी स्थितिमें आये सुधारकी परीक्षा करे।

३. रोगीको पलंगपर सीधा लिटाये, हाथ सीधे हों। रोगी स्त्री हो तब जिस पैरका धागा छोटा हो, उस टाँगको मोड़कर पेटपर रखे और चार-पाँच बार घुटनेको पलंगपर लगानेका प्रयास करे। ध्यान रहे, जोर न लगाये, आरामसे जितना पलंगके पास आ सके, लाये। फिर नाभिकी स्थितिमें हुए सुधारको नापे।
यदि रोगी पुरुष हो तब जिस निप्पलकी तरफका धागा बड़ा हो, उस टाँगको मोड़कर ऊपरकी तरह करे।