नौकासन की विधि व इसके 8 जबरदस्त फायदे | Naukasana Steps and Health Benefits

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नौकासन की विधि व इसके 8 जबरदस्त फायदे | Naukasana Steps and Health Benefits

इस आसन के अभ्यास के समय व्यक्ति का आकार नाव के समान हो जाता है, इसलिए इसे नौकासन (Naukasana) कहते हैं। इस आसन के अभ्यास से नाभि पर बल अधिक पड़ता है तथा शरीर का पूरा भार नाभि पर रहता है।

नौकासन के फायदे : Naukasana ke Fayde / Benefits in hindi

★ नौकासन पेट की चर्बी को कम करके मोटापे को घटाता है।
★ यह आसन मोटे व्यक्तियों के लिए अत्यंत लाभकारी है।
मधुमेह (डायबटीज) दूर करने, पाचनक्रिया को ठीक करने, शरीर में स्फूर्ति लाने तथा भूख को बढ़ाने में भी यह आसन लाभकारी है।
★ नौकासन को करने से कब्ज दूर होता है।
★ यह आसन फेफड़े व सांस से सम्बन्धित बीमारियों को दूर कर फेफड़ों में शुद्ध ऑक्सीजन को पहुंचाता है।
★ ये आसन शरीर के सभी अंगों में खून के बहाव को तेज करता है, जिससे मांसपेशियां लचीली बनती है।
★ यह आसन जिगर व तिल्ली के दोषों को दूर कर शारीरिक शक्ति को बढ़ाता है।
★ इससे कमर व गर्दन का दर्द ठीक होता है।

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नौकासन की विधि : Naukasana Steps in Hindi / Naukasana ki Vidhi

★ नौकासन के अभ्यास के लिए जमीन पर चटाई या दरी बिछाकर पेट के बल लेट जाएं।
★ अपने दोनों हाथों को आपस में नमस्कार की स्थिति में जोड़कर सिर की सीध में आगे की ओर करके रखें। एड़ियों व पंजों को मिलाकर व तानकर रखे।
★ अब सांस लेते हुए धीरे-धीरे पैर तथा शरीर के अगले हिस्से को जितना सम्भव हो ऊपर उठाएं। इस तरह शरीर को इतना उठाएं कि शरीर का पूरा भार नाभि पर रहें तथा पैर व सिर ऊपर की ओर रहें। इस स्थिति में शरीर का आकार ऐसा हो जाना चाहिए, जैसे किसी नाव का आकार होता है।
★ इसके बाद पहले हाथों को हिलाएं फिर पैरों को भी हिलाएं। परंतु शरीर का आकार नाव की तरह ही बनाएं रखें। सांस को जितनी देर तक अंदर रोक सकते हैं, रोक कर इस स्थिति में रहे
★ और फिर शरीर को धीरे-धीरे नीचे सामान्य स्थिति में लाकर सांस को छोड़ते हुए पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें। इस तरह से इस क्रिया को 3 बार करें।

विशेष :
★ जब पूरे शरीर का भार केवल नाभि पर हो और शरीर की आकृति नाव की तरह बन गई हो तो इस स्थिति में तब तक रहें, जब तक आमाशय की मांसपेशियों में कंपन का अनुभव न हो।

सावधानी :
★ इस आसन का अभ्यास अल्सर, कोलाइटिस वाले रोगियों को नहीं करना चाहिए।
★ शुरुआत में शरीर को पूर्ण रूप से ऊपर उठाने में कठिनाई हो सकती है इसलिए शुरू में अपनी क्षमता के अनुसार ही शरीर को ऊपर की ओर उठाएं।

 

2017-12-11T14:50:28+00:00 By |Yoga & Pranayam|0 Comments