परवल के फायदे और 16 लाजवाब औषधीय गुण | Parwal ke Fayde Gun aur Upyog

परिचय :

परवल रूप व आकार में- “कुन्दरू” के समान होता है। अन्य फलों की अपेक्षा परवल का साग विशेष पथ्य है। असम, पश्चिम बंगाल, बिहार, और उत्तर प्रदेश में यह अधिक मात्रा में होता है।
परवल की 2 किस्में होती है। (1) मीठे परवल और (2) कडुवे परवल । रंग-भेद से भी परवल की 2 अन्य किस्में होती है। भूरे (आसमानी) और पतले परवल तथा हरे रंग के बड़े परवल ।

परवल के औषधीय गुण : parwal ke gun in hindi

परवल का उपयोग पित्तप्रधान रोगों में विरेचन के लिए होता है । पित्तज्वर, जीर्णज्वर, पीलिया, सूजन और उदररोगों में इससे विरेचन होकर पाचन क्रिया सुधरती है। परवल पाण्डु रोगी के लिए पथ्य, कृमि रोग में अत्यन्त हितकर, बलवर्धक एवं काम-शक्तिवर्धक है । परवल का साग खाने से पाचनशक्ति बढ़ती है एवं खाँसी, बुखार और रक्तविकार मिटते हैं। बीमार लोगों के लिए यह अत्यन्त ही गुणकारी है। घी में तलकर बनाया हुआ परवल का साग पौष्टिक होता है।
आसमानी व पतले कटु परवल का क्वाथ विष को उतारता है। सिर गंजेपन के रोग पर भी इस को लगाया जाता है। ग्रामीण अंचलों में उन्हें “पंडोले” या पटोले के नामों से जाना जाता है। इनके फल और बेल भी ज्वरनाशक माने जाते हैं। कडुवे परवलों को काटकर अच्छी तरह निचोड़कर, कडुआपन निकालकर लौकी की तरह उनकी तरकारी बन सकती है।

परवल के फायदे / रोगों का इलाज : parwal ke fayde / rogo ka ilaj

1-रक्तविकार- परवल पाचक, हृदय के लिए हितकारी, वीर्यवर्धक, हल्के, अग्निप्रदीपक, स्निग्ध और गर्म है। यह खाँसी, रक्तविकार, बुखार, कृमि, और त्रिदोषनाशक है। ( और पढ़ेखून की खराबी का इलाज और  नुस्खे )

2-खाँसी- कडुवे पवल चरपरे और गर्म होते हैं। ये रक्तपित्त, वायु, कफ, खाँसी, खुजली, कुष्ठरोग, रक्तविकार, बुखार और दाहनाशक होते हैं । इसके गर्भ का चूर्ण 1-2 रत्ती की मात्रा में इलायची, लौंग आदि के साथ दिया जाता है। ( और पढ़ेखांसी का रामबाण इलाज )

3-पित्तनाशक-परवल का मूल सुखपूर्वक रेच लगाने वाला, इसके बेल की टहनी कफ को हरने वाली, इसके पत्ते पित्तनाशक और फल त्रिदोषनाशक होते हैं।

4-ज्वर- कडुवे परवल, वच और चिरायते का काढ़ा समस्त प्रकार से ज्वरों में लाभकारी है। ज्वर के साथ यदि कब्ज हो तो यह अधिक गुणकारी है। ( और पढ़ेबुखार के घरेलू नुस्खे )

5-कफ ज्वर- मीठे परवल की टहनी सहित पत्ते 6 माशा और सोंठ 6 माशा का क्वाथ बनाकर उसमें शहद मिलाकर सुबह-शाम पीने से कफ ज्वर मिटता है । कफ सरलता से निकलता है। आम का पाचन होता है और मलावरोध मिटता है।

6-पित्त ज्वर- कडुवे परवल और जौ का काढ़ा शहद डालकर सेवन करने से पित्त ज्वर, तृषा और दाह को मिटता है । कडुवे परवल के मूल का पानी शर्करा के साथ देने से भी पित्तज्वर में लाभ होता है।

7- कडुवे परवल के पत्ते और धनिये का काढ़ा भी पित्त ज्वर में दिया जाता है । बुखार के रोगी के शरीर पर उसके पत्तों के रस का मर्दन भी किया जाता है।

8- कडुवे परवल, कडुवा नीम और अडूसा के पत्तों का चूर्ण ठण्डे पानी में देने से उल्टी होकर पित्त-विकार दूर होता है।

9-पेट के रोग – कडुवे परवल का क्वाथ यकृद्राल्युदर (एक उदर रोग), प्लीहोदर, पीलिया, और अन्य उदर रोगों में दिया जाता है।

10-विष चिकित्सा – कडुवे परवल को पीसकर पिलाने से वमन होकर पेट का विष बाहर निकल जाता है।

11- गंजेपन- कडुवे परवल के पत्तों का रस सिर के गंजेपन का रोग ‘इन्द्रलुप्त” पर लगाने से लाभ होता है। ( और पढ़ेगंजेपन का इलाज )

12-फोड़ा – कडुवे परवल और कडुवे नीम के क्वाथ से फोड़ों को धोने से फोड़ों का शोधन होता है।

13-कृमि- कडुवे परवल के पत्ते और धनिया 1-1 तोला लेकर रात को 10-12 तोला पानी में भिगोकर रखें । प्रातः छानकर उसमें शहद मिलाकर 3 हिस्से बनाकर दिन में 3 बार देने से कृमि मिटते हैं।

14- त्वचा रोग- परवल का सेवन करने से त्वचा रोग में लाभ होता है। त्वचा रोगों में परवल के साथ गिलोय का उपयोग अत्यन्त हितकारी है एवं उसके पत्तों के स्वरस की मालिश करना भी गुणकारी है।

15-अग्निदग्ध व्रण – कडुवे परवल का क्वाथ और कल्क सरसों के तेल में मिलाकर उसमें सरसों से 4 गुना पानी डालकर उबालें । पानी जल जाने पर उतारकर छान लें । इससे अग्निदग्ध व्रण पर लगाने से पीड़ा, स्राव, दाह और फोड़े मिटते हैं।

16-कृमि- परवल का साग-खुजली, कोढ़, रक्तविकार, आँखों की बीमारियाँ, और कृमिनाशक है। पुराने बुखार में यह अधिक लाभदायक है।

परवल के नुकसान : parwal ke nuksan

कड़वी परवल का सेवन अधिक मात्रा में करने से उल्टी हो सकती है।

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