सुपारी खाने के फायदे और नुकसान | Supari ke Fayde aur Nuksan

सुपारी के औषधीय गुण : supari ke aushadhi gun

आयुर्वेद मतानुसार सुपारी भारी, शीतल, रूखी, कसैली, कफ-पित्तनाशक मोहकारक, दीपन, रूचिकारक, संकोचक, मूत्रल, मुख शुद्ध करने वाली हृदय को शक्ति प्रदान करने वाली, ऋतुस्वाव नियामक, आँखों की सूजन श्राम, पुराना प्रमेह और पीप को नष्ट करने के गुणों से भरपूर होती है ।

नोट-सुपारी कच्ची अवस्था में विष से भी अधिक हानिकारक होती है तथा मध्यम अवस्था की सुपारी भेदक और दुष्यपाच्य और सूखी हुई सुपारी अमृत के समान उपकारी तथा रसायन गुणों से भरपूर होती है । औटाकर तैयार की हुई सुपारी जिसका मध्य भाग दृढ़ हो वह अत्यन्त उत्तम और त्रिदोष नाशक होती है।

सुपारी सेवन की मात्रा : supari kitna khana chahiye

सुपारी की मात्रा 2 से 4 ग्राम तक है।

सुपारी के फायदे और उपयोग : supari ke labh in hindi

1-  मासिकधर्म में विशेष स्राव होता हो और इसके कारण रुग्णा को निर्बलता बढ़ रही हो तो चिकनी सुपारी का चूर्ण और नागकेशर का चूर्ण समभाग में एकत्र कर समभाग घृत में भूनकर दुगुनी मिश्री की चाशनी में पाक करके रखलें । 2 से 4 तोला तक सुबह-शाम गरम दूध से सेवन करें। अतीव गुणकारी योग है।  ( और पढ़ेमाहवारी में अधिक रक्त स्राव के 15 घरेलु उपचार )

2- कच्ची सुपारी को नींबू के रस में खूब घोटकर चन्दन निकलने पर पीने से आत्र के समस्त प्रकार के कृमि नष्ट हो जाते हैं।

3- कच्ची सुपारी की भस्म को मिट्टी के तैल में घोटकर लगाने से दाद खाज और खुजली नष्ट हो जाती है। ( और पढ़ेदाद खाज खुजली के 7 रामबाण घरेलु उपचार)

4- चाहे जैसा भी जखम (व्रण) हो सुपारी को जलाकर इस भस्म को खूब बारीक पीस और छानकर घाव पर बुरक कर सरसों का तैल चुपड़ देने से घाव शीघ्र ही अच्छा हो जाता है ।

5- सन्धिवात में अच्छी बड़ी-बड़ी सुपारी का चूर्ण कर रात्रि के समय जल में भिगो दें। इसमें से 1 तोला की मात्रा में प्रात:काल निकालकर सूखी इमली की लुगदी में रखकर निगल लेने से तथा ऊपर से गरम जल के कुछ घूंट पी लेने से, उत्तम साफ दस्त होकर सन्धिवात में जकड़न दूर हो जाती है।  ( और पढ़ेगठिया वात रोग के 13 रामबाण घरेलु उपचार )supari ke labh rogo ka upchar

6- अच्छी पकी सुपारी का चूर्ण 8 माशा तथा इतना ही छोटी हरड़ और बबूल की पत्ती का चूर्ण लें । तीनों को मिट्टी के पात्र में 1 पाव जल मिलाकर आग पर पकावें, 5 तोला शेष रहने पर छान लें। इसे जितनी बार छानकर पिया जायेगा उतनी ही बार दस्त होंगे । विरेचनार्थ अति उत्तम प्रयोग है ।

7- उत्तम सुपारी का चूर्ण 40 तोला, लवंग, सफेद कत्था, इलायची, जावित्री और जायफल (प्रत्येक का चूर्ण 6 माशा) दालचीनी, नागकेशर और वच (प्रत्येक का चूर्ण 3-3 माशा) सभी को लेकर एकत्र कर सुरक्षित रखलें । इस चूर्ण को पान के बीड़े में रखकर दोनों समय खाने से वात सम्बन्धी समस्त विकारों का शमन होता है । यह योग अरुचि नाशक भी है।

8-सुपारी के टुकड़े कर घृत से चिकने किये हुए मिट्टी के मटके में डालकर ऊपर से सेंमर (शाल्मली) का स्वरस डाल दें । इसे 24 घंटे बाद प्रात:काल सेवन करने से धातुगत दुर्बलता नष्ट होकर | वीर्य पुष्ट हो जाता है । ( और पढ़ेवीर्य को गाढ़ा व पुष्ट करने के आयुर्वेदिक उपाय )

9-सुपारी और नागकेशर को बराबर-बराबर लेकर पीस-छानकर सुरक्षित रखलें। इसमें से 2-3 माशा चूर्ण मासिक धर्म के बाद 16 दिनों तक ताजा जल से सेवन करने से अवश्य ही गर्भ धारण हो जाता है तथा होने वाली सन्तान पुत्र ही होता है। अनुभूत योग है।

10-उपदंश के घावों का मलहम : 1 नग सुपारी की राख, 1 नग पीली कौड़ी की राख, कत्था 2 माशा, सैलखड़ी 2 माशा, नीलाथोथा 1 रत्ती लें।
सभी को कूट पीसकर कपड़छन कर (2 तोला गाय का घी या मक्खन को 108 बार कांसे की थाली में धोकर) धुले हुए घी में उपरोक्त औषधियाँ मिलाकर 1 बरतन में सुरक्षित रखलें । इस मलहम को लगाने से गर्मी के घाव अवश्य ही मिट जाते हैं।

11- स्त्री गुप्तरोग नाशक सुपारी पाक : चिकनी सुपारी के चूर्ण 1 पाव को 1 सेर गोदुग्ध में औटाकर खोवा बनालें । इसमें छोटी इलायची 4 तोला, केसर 1 तोला, ढाक के गोंद 5 तोला का महीन चूर्ण कर मिलालें तदुपरान्त आधा सेर मिश्री की दोतरी चाशनी बनाकर इसमें उपयुक्त मिश्रण को मिलाकर पाक बनाकर रखलें ।
इसे 1 तोला तक की मात्रा में सेवन करने से श्वेत तथा रक्तप्रदर, बहुमूत्र, प्रमेह, सन्धिवात नष्ट हो जाता है । निर्बल स्त्रियों को अपूर्व बलकारक योग है।

सुपारी खाने के नुकसान : supari khane ke fayde

  • यह सीने को खूरखूरा करती है।
  • गुर्दे की पथरी वाले रोगी को तथा मूत्राशय को हानिकारक है।
  • कौलन्ज पैदा करती है।
  • कतीरा, इलायची तथा गरम और तर वस्तुएँ इसका विकल्प हैं।

(दवा व नुस्खों को वैद्यकीय सलाहनुसार सेवन करें)

Leave a Comment