धर्मतत्त्व -स्वामी विवेकानंद | Dharmtattv -Swami Vivekananda
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धर्मतत्त्व स्वामी विवेकानन्द की धर्म-विषयक पुस्तक है। शीर्ष पृष्ठ पर इसे धर्मतत्त्व नाम से अंकित किया गया है और लेखक के रूप में स्वामी विवेकानन्द का नाम अंकित है। यह तृतीय संस्करण है। प्रकाशन श्रीरामकृष्ण मठ, नागपुर से हुआ है, जिसके प्रकाशक स्वामी श्यामसुंदर जी हैं। शीर्ष पृष्ठ पर मूल्य चार रुपये पचास पैसे अंकित है और साथ में विक्रेता का पता भी दिया गया है। पुस्तक लगभग एक सौ बाईस पृष्ठ की है।
प्राक्कथन में बताया गया है कि यह धर्मतत्त्व का दूसरा प्रकाशन है, जबकि प्रथम प्रकाशन उन्नीस सौ बीस में हुआ था। साहित्य-सम्मेलन नागपुर ने स्वामी श्यामसुंदर जी एवं प्रकाशक मण्डल के व्यक्तिगत प्रयास से इसे तैयार कराना प्रारंभ किया, और इसका पहला संस्करण उन्नीस चौहत्तर में लोक भवन, नागपुर से प्रकाशित हुआ। पुस्तक में स्वामी विवेकानन्द के धर्म के बारे में दिए गए प्रवचनों का संकलन है, जिनमें धर्म की परिभाषा और उसके आधारों पर स्पष्ट विवेचन मिलता है।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो धर्म के बारे में स्वामी विवेकानन्द के विचार जानना चाहते हैं। उनका यह कहना कि धर्म व्यक्ति के भीतर सत् की अभिव्यक्ति है, आज भी उतना ही प्रासंगिक लगता है। रामकृष्ण आंदोलन के साहित्यिक पक्ष को समझने के लिए यह पुस्तक आधारभूत मानी जाती है। सरल हिन्दी में लिखे गए प्रवचन होने के कारण पढ़ना आसान है। सस्ती और छोटी पुस्तक होने के कारण नए पाठकों के लिए अच्छी शुरुआत है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- धर्म का तत्त्व तथा स्वरूप
- सहिष्णुता तथा सार्वभौमिकता
- स्वामी जी के विचार
- प्रेरक उपदेश
पुस्तक की मुख्य बातें
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