भजन संग्रह – भाग दूसरा | Bhajan Sangrah Dusra Bhaag
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भजन-संग्रह का यह दूसरा भाग गीता प्रेस, गोरखपुर से प्रकाशित हुआ है और इसका पता नीलामेर, गोरखपुर दर्ज है। संकलन का कार्य श्री विशेष हरी ने किया है। पहले भाग की तरह ही यह भाग भी भक्ति-भजनों का संग्रह है। पुस्तक में लगभग १९६ पृष्ठों का पाठ है और छपाइयों की सूची से पता चलता है कि यह अनेक बार छपा है — २००० से लेकर २०११ तक छह छपाइयाँ दर्ज हैं।
संकलन में देवी-देवताओं, संतों और विभिन्न पीठों के भजन शामिल किए गए हैं। हर भजन के साथ उसका भाव और परंपरा समझाने वाला परिचय दिया गया है, ताकि पाठक केवल गाएँ नहीं, समझ भी सकें। गीताप्रेस की पारंपरिक सज्जा और गुणवत्ता इस संस्करण में भी दिखाई देती है।
भक्ति-साहित्य और भजन-संग्रह से जुड़े पाठकों के लिए यह पुस्तक उपयोगी है। भजन-मंडलियों, संगीत-प्रेमियों और मंदिरों में कीर्तन के लिए यह भाग पहले भाग का पूरक है। नियमित छपाइयाँ इसकी निरंतत लोकप्रियता का प्रमाण हैं।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- भजनों तथा पदों का संग्रह (भाग 2)
- हिंदी अर्थ सहित
- कीर्तन तथा सत्संग के लिए उपयोगी
- नाम-जप तथा भक्ति का भाव
पुस्तक की मुख्य बातें
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