यन्त्र, मंत्र तंत्र विद्या – Yantra Mantra Tantra Vidya
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यन्त्र, मंत्र, तंत्र विद्या नामक पुस्तक के शीर्षक-पृष्ठ पर 'श्री हरिः' के नीचे यह शीर्षक छपा है। संप्रहकर्ता के रूप में दो नाम दर्ज हैं — श्री १०८ आचार्य गणधर श्री कुकुसागर जी महाराज तथा श्री १०५ गणनी अधिका श्री विजयमती माताजी, और उनका पता विद्युपति रत्न, समयकुञ्जान शिरोमणि, सिद्धान्त विहार दिया गया है। प्रकाशन संयोजक शान्ति कुमार गंगवाल हैं और प्रकाशन का पता १६३६, श्री वालों का रास्ता, करोड़ो की गली, जोहड़ी बाजार, जयपुर-३०२००३ (राजस्थान) है। पृष्ठों पर मूल्य 600 रुपये तथा प्रथम सकल 1000 प्रतियाँ अंकित हैं।
यह एक जैन तांत्रिक-यन्त्र संग्रह है। पुस्तक में यन्त्र, मंत्र और तंत्र तीनों का विस्तृत वर्णन मिलता है, और आरंभ में जैन परंपरा का श्री १००८ भगवान पार्श्वनाथ की यन्त्र-पट्टी सहित अनेक यन्त्र-लेख दिखाए गए हैं, जिनमें देवनागरी अक्षरों से बने मंत्र-युक्त चित्रों तथा शंख और कुंडला आदि आकारों का उपयोग है। प्रत्येक यन्त्र के साथ उसके बीजाक्षर, संबंधित देवता और पूजन की विधि का भी उल्लेख मिलता है।
यन्त्र-मंत्र-तंत्र के ग्रन्थ पढ़ते समय सबसे बड़ी सावधानी यह है कि इनका प्रयोग केवल योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही किया जाना चाहिए। बिना समझे यन्त्र बनाना या मंत्र-जाप करना न तो लाभकारी है और न सुरक्षित। अतः इस पुस्तक को केवल धार्मिक-शास्त्रीय जिज्ञासा और सामान्य परिचय के लिए पढ़ें, और वास्तविक साधना किसी विद्वान गुरु से सीखकर ही करें। जैन परम्परा में यन्त्र-साधना का अत्यंत महत्व माना गया है, इसलिए जिज्ञासु पाठकों के लिए यह ग्रन्थ अत्यंत रोचक और ज्ञानवर्धक है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- मंत्रों का अर्थ, उच्चारण तथा जाप-विधि
- साधना-क्रम, संख्या तथा नियम
- यंत्र, ताबीज तथा उनके प्रयोग
- फल, सावधानियाँ तथा सामान्य प्रश्न
पुस्तक की मुख्य बातें
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