Adhyatma Vigyan

Sharadiya Navratri 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

📅 3 अक्टूबर 2026 ✍️ admin ⏱️ 5 मिनट
Sharadiya Navratri 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Last Updated on अक्टूबर 3, 2026 by admin

आदि शक्ति माँ दुर्गा की उपासना का सबसे पावन पर्व शारदीय नवरात्रि, वर्ष 2026 में 11 अक्टूबर, रविवार से प्रारंभ होकर 20 अक्टूबर, मंगलवार (विजयादशमी) तक मनाया जाएगा। अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक चलने वाले ये नौ दिन केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, शक्ति जागरण और मनोकामना पूर्ति के लिए सर्वोत्तम माने गए हैं। इस बार माँ दुर्गा का आगमन और प्रस्थान दोनों ही विशेष संयोग बना रहे हैं।

धार्मिक मान्यता है कि इन नौ दिनों में देवी दुर्गा पृथ्वी लोक पर अपने भक्तों के बीच निवास करती हैं और सच्चे मन से की गई उनकी आराधना कभी व्यर्थ नहीं जाती। यदि आप देवी के नौ स्वरूपों के बारे में विस्तार से पढ़ना चाहते हैं, तो हमारी वेबसाइट से नव दुर्गा (Nav Durga) PDF Book फ्री डाउनलोड कर सकते हैं। इसलिए इसे महा नवरात्रि भी कहा जाता है।

Sharadiya Navratri 2026: तिथि और 9 दिनों का कैलेंडर

हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष तिथियों का संयोग इस प्रकार रहेगा –

दिन तिथि देवी स्वरूप विशेष
11 अक्टूबर, रविवार प्रतिपदा माँ शैलपुत्री घटस्थापना / कलश स्थापना
12 अक्टूबर, सोमवार द्वितीया माँ ब्रह्मचारिणी –
13 अक्टूबर, मंगलवार तृतीय माँ चंद्रघंटा –
14 अक्टूबर, बुधवार चतुर्थी माँ कूष्माण्डा –
15 अक्टूबर, गुरुवार पंचमी माँ स्कंदमाता –
16 अक्टूबर, शुक्रवार षष्ठी माँ कात्यायनी बिल्व निमंत्रण
17 अक्टूबर, शनिवार सप्तमी माँ कालरात्रि –
18 अक्टूबर, रविवार अष्टमी माँ महागौरी महा अष्टमी, कन्या पूजन
19 अक्टूबर, सोमवार नवमी माँ सिद्धिदात्री महा नवमी, हवन
20 अक्टूबर, मंगलवार दशमी – विजयादशमी (दशहरा)

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 2026

नवरात्रि की सफलता का आधार है सही मुहूर्त में किया गया कलश स्थापना। बिना शुभ मुहूर्त के की गई स्थापना का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

घटस्थापना की तिथि: 11 अक्टूबर 2026, रविवार
शुभ मुहूर्त: सुबह 06:10 बजे से 07:42 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक

शास्त्रों के अनुसार यदि साधक सुबह के मुहूर्त में स्थापना न कर पाएं तो अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना कर सकते हैं। इस दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का संयोग पूजा को और भी अधिक फलदायी बना रहा है।

शारदीय नवरात्रि का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व

शारदीय नवरात्रि केवल धार्मिक उत्सव नहीं है, इसका गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक आधार है।

1. पौराणिक कथा: मार्कंडेय पुराण के अनुसार, महिषासुर के अत्याचार से पीड़ित देवताओं ने जब अपनी शक्तियों को एकत्रित किया, तो आदि शक्ति माँ दुर्गा प्रकट हुईं। माँ ने लगातार 9 दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध कर देवताओं को मुक्त कराया। तभी से ये नौ दिन शक्ति की साधना और दसवां दिन विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। (अधिक जानकारी के लिए श्रीमद्देवीभागवत पुराण पढ़ें।)

2. ऋतु संधि का महत्व: शारदीय नवरात्रि शरद ऋतु के आगमन पर आती है। आयुर्वेद और ज्योतिष के अनुसार यह दो ऋतुओं का संधि काल होता है जब वातावरण में संक्रमण अधिक होता है। इस दौरान किया गया व्रत, उपवास और संयम शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और मन को सात्विक बनाता है।

कलश स्थापना और पूजा की सम्पूर्ण विधि

नवरात्रि में माँ की कृपा पाने के लिए विधि-विधान का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। (पूजा के लिए श्री दुर्गा सप्तशती PDF पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है।)

पूजा सामग्री: मिट्टी का कलश, जौ, गंगा जल, आम के पत्ते, नारियल, लाल चुनरी, अक्षत, रोली, मौली, कपूर, फल, फूल, धूप-दीप और माँ दुर्गा की प्रतिमा/चित्र।

घटस्थापना विधि:
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ लाल वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
मंदिर या पूजा स्थान को गंगाजल से पवित्र करें। एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और उस पर जल से भरा मिट्टी का कलश स्थापित करें। कलश में गंगा जल, सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें।
कलश के मुख पर आम के 5 पत्ते रखें और उसके ऊपर नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर रखें।
इसके बाद “ॐ दुं दुर्गायै नमः” मंत्र का जाप करते हुए माँ का आह्वान करें और 9 दिनों तक अखंड ज्योति प्रज्वलित करें।

9 दिन भोग और मंत्र

नवरात्रि में हर दिन देवी के अलग स्वरूप को उनका प्रिय भोग अर्पित करने से विशेष फल मिलता है। प्रतिपदा को गाय के घी का भोग, द्वितीया को शक्कर, तृतीया को दूध, चतुर्थी को मालपुए, पंचमी को केला, षष्ठी को शहद, सप्तमी को गुड़, अष्टमी को नारियल और नवमी को अनाज का भोग लगाना कल्याणकारी माना गया है।

बीज मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
इस मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करने से शत्रु बाधा, भय और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

नवरात्रि व्रत के नियम

इन 9 दिनों में लहसुन-प्याज, मांस-मदिरा और तामसिक भोजन का पूर्ण त्याग करें।
काले वस्त्र पहनने से बचें और चमड़े की वस्तुओं का उपयोग न करें।
व्रतधारी को दिन में सोने और बाल-दाढ़ी काटने से बचना चाहिए।
नौ दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन करें और मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें।
अष्टमी या नवमी पर 9 कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन कराएं। कन्या पूजन के बिना नवरात्रि व्रत अधूरा माना जाता है।

शारदीय नवरात्रि शक्ति संचय का पर्व है। जो भक्त सच्ची श्रद्धा और पूर्ण नियम से माँ की आराधना करता है, उसके जीवन से दुख, दरिद्रता और संकट सदैव के लिए दूर हो जाते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

नोट: जय माता दी! अगर आप इस नवरात्रि व्रत कथा और आरती का PDF चाहते हैं तो कमेंट में जरूर बताएं।

Share to...