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दशहरा 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

📅 5 अक्टूबर 2026 ✍️ admin ⏱️ 8 मिनट
दशहरा 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Last Updated on अक्टूबर 5, 2026 by admin

प्रस्तावना

बुराई चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न लगे, अंत में जीत सच्चाई की ही होती है। यही भरोसा हर साल दशहरा हमारे मन में फिर से जगा देता है। ढोल-नगाड़ों की गूंज, रामलीला की चौपाइयाँ और मेले की रोशनी – क्या आपको भी बचपन वाला वो उत्साह याद आता है?

अगर आप सोच रहे हैं कि विजयादशमी 2026 कब है, तो बता दें कि दशहरा 2026 मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन हम अच्छाई की जीत का उत्सव मनाते हैं और अपने भीतर के अहंकार व क्रोध पर विजय पाने का संकल्प लेते हैं।

दशहरा 2026 कब है? तिथि और दशमी का समय

दशहरा 2026 मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा, क्योंकि अपराह्न काल में दशमी तिथि इसी दिन मिल रही है।

हिंदू पंचांग के अनुसार यह आश्विन शुक्ल दशमी है। कई लोग दशहरा की तिथि को लेकर उलझन में रहते हैं। क्या दशमी 20 को है या 21 को? शास्त्रों का नियम है कि दशहरा अपराह्न-व्यापिनी दशमी में मनाते हैं। यानी जब दोपहर का समय दशमी में हो, वही दिन विजयादशमी माना जाता है।

इस साल दशमी 20 अक्टूबर की दोपहर से शुरू होकर 21 अक्टूबर की दोपहर तक रहेगी, इसलिए पर्व 20 अक्टूबर को ही मनाना शास्त्र-सम्मत है।

विवरण समय / तिथि
पर्व की तारीख 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार
दशमी तिथि आरंभ 20 अक्टूबर, दोपहर लगभग 12:51 बजे
दशमी तिथि समाप्त 21 अक्टूबर, दोपहर लगभग 2:13 बजे
मास / पक्ष आश्विन, शुक्ल पक्ष दशमी

नोट: यह समय दिल्ली के पंचांग के अनुसार है। समय शहर के अनुसार कुछ मिनट बदल सकता है, इसलिए अपने शहर का स्थानीय पंचांग जरूर देखें। बंगाल में दुर्गा विसर्जन और विजयादशमी की परंपरा 21 अक्टूबर को भी देखी जा सकती है।

दशहरा 2026 का शुभ मुहूर्त

दशहरा 2026 का शुभ मुहूर्त विजय मुहूर्त और अपराह्न काल में है, जबकि रावण दहन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में किया जाता है।

क्या आप जानते हैं दशहरा शुभ मुहूर्त इतना खास क्यों होता है? विजयादशमी को अबूझ मुहूर्त कहा गया है। इसका अर्थ है कि इस दिन बिना पंचांग देखे भी नया कार्य शुरू किया जा सकता है। माना जाता है कि इस दिन किया गया हर शुभ काम सफल होता है।

शस्त्र पूजन, शमी पूजन और अपराजिता पूजा के लिए अपराह्न और विजय मुहूर्त सबसे उत्तम माना गया है। वहीं रावण दहन का समय हमेशा सूर्यास्त के बाद का होता है, जब अंधेरा घिरने लगता है ताकि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक सब देख सकें।

मुहूर्त समय (दिल्ली के अनुसार)
विजय मुहूर्त दोपहर लगभग 1:59 से 2:45 बजे तक
अपराह्न पूजा काल दोपहर लगभग 1:30 से 3:45 बजे तक
रावण दहन का समय सूर्यास्त के बाद, प्रदोष काल में (शाम 5:45 बजे के बाद)

अपने शहर में सूर्यास्त का समय देखकर ही दहन का सही समय तय करें।

दशहरा क्यों मनाया जाता है?

दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत के तीन बड़े प्रसंगों के कारण मनाया जाता है।

आपने कभी सोचा है, एक ही दिन इतनी कथाएँ क्यों जुड़ी हैं? दरअसल दशहरा क्यों मनाया जाता है, इसके पीछे हमारे तीन गहरे सांस्कृतिक कारण हैं।

  1. श्रीराम द्वारा रावण वध: सबसे प्रसिद्ध कथा त्रेतायुग की है। भगवान श्रीराम ने नौ दिनों तक शक्ति की उपासना के बाद दशमी के दिन लंका के अहंकारी राजा रावण का वध किया। यह अहंकार और अधर्म पर धर्म की जीत थी। इसीलिए इसे विजयादशमी कहते हैं।
  2. माँ दुर्गा द्वारा महिषासुर वध: दूसरी कथा शक्ति की है। कई स्थानों पर मान्यता है कि माँ दुर्गा ने नौ दिनों तक चले भयंकर युद्ध के बाद दसवें दिन महिषासुर का वध किया था। बंगाल सहित पूर्वी भारत में यही विजय नवरात्रि का चरम है।
  3. पांडवों का शमी वृक्ष से शस्त्र उठाना: महाभारत के अनुसार, अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने अपने अस्त्र-शस्त्र शमी के पेड़ पर छिपा दिए थे। विजयादशमी के दिन उन्होंने शमी पूजन कर अपने शस्त्र वापस उठाए और युद्ध के लिए प्रस्थान किया। तभी से शमी के पत्ते को ‘सोना’ मानकर बाँटने की परंपरा है।

विजयादशमी का महत्व

विजयादशमी का महत्व केवल रावण दहन देखना नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों पर जीत पाना है।

दशहरा का महत्व समझें तो यह सिर्फ बाहर का उत्सव नहीं, भीतर का पर्व है। हमारे भीतर भी तो दस सिर वाले रावण हैं न? अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या – क्या इन पर जीत आसान है? विजयादशमी हमें यही सिखाती है।

इस दिन शस्त्र पूजन का विशेष भाव है। पहले राजा अपने शस्त्र पूजते थे, आज किसान अपने हल को, कारीगर अपने औजारों को और आप अपनी गाड़ी, लैपटॉप या कलम को पूजते हैं। भाव वही है – जो हमें जीवन में सहारा दे, उसका सम्मान करो।

इसी कारण इस दिन नया व्यापार, नया घर, विद्या आरंभ या कोई भी शुभ कार्य करना बहुत फलदायी माना जाता है।

दशहरा पूजा विधि

दशहरा पूजा विधि सरल है और इसे घर पर भी पूरे भाव से किया जा सकता है।

सोच रहे हैं कि घर पर दशहरा पूजा विधि कैसे करें? घबराइए नहीं, यहाँ क्रम से समझिए:

  1. तैयारी: सुबह स्नान कर घर के पूजा स्थान को साफ करें। गंगाजल छिड़कें। एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएँ।
  2. देव पूजन: चौकी पर श्रीराम दरबार या माँ दुर्गा की तस्वीर रखें। कई स्थानों पर अपराजिता देवी की भी पूजा होती है। फूल, अक्षत, रोली से पूजन करें।
  3. शमी पूजन: शमी के पौधे या उसकी टहनी का पूजन करें। यदि शमी न मिले तो उसकी पत्तियाँ लाकर पूजा में रखें। शमी को विजय और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
  4. शस्त्र / औजार / वाहन पूजन: अपने औजार, किताबें, वाहन या मशीनों को साफ कर उनके सामने दीप जलाएँ। उन पर तिलक लगाएँ, कलावा बाँधें और फूल चढ़ाएँ।
  5. आरती और प्रसाद: अंत में श्रीराम आरती या दुर्गा आरती करें। सबको प्रसाद बाटें और बड़ों से विजय तिलक लेकर आशीर्वाद लें।

पूरे मन से किया गया पूजन ही सबसे बड़ा मुहूर्त बन जाता है।

रावण दहन: परंपरा और संदेश

रावण दहन बुराई को जलाने की परंपरा है, न कि किसी व्यक्ति से नफरत की।

शाम होते ही मेले में तीन बड़े पुतले खड़े दिखते हैं – रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण। रामलीला के बाद श्रीराम के प्रतीक के रूप में अग्निबाण चलाया जाता है और पुतले धू-धू कर जल उठते हैं। क्या आपने बच्चों की आँखों में उस समय की चमक देखी है?

यह दृश्य हमें याद दिलाता है कि ज्ञान, बल और पद होने पर भी अगर अहंकार आ गया तो विनाश तय है। रावण विद्वान था, पर अहंकार ने उसे खत्म कर दिया। इसलिए दहन के बाद लोग एक-दूसरे को गले मिलकर ‘विजयादशमी की शुभकामनाएँ’ देते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. दशहरा 2026 कब है?

A: दशहरा 2026 मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन अपराह्न काल में दशमी तिथि व्याप्त है, इसलिए यही दिन विजयादशमी के रूप में मान्य है। 21 अक्टूबर को दशमी दोपहर 2:13 बजे तक रहेगी, पर पर्व 20 को ही होगा।

Q2. रावण दहन किस समय करें?

A: रावण दहन हमेशा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में करना चाहिए। दिल्ली के अनुसार 20 अक्टूबर को शाम 5:45 बजे के बाद का समय उत्तम है। अपने शहर के सूर्यास्त के अनुसार समय तय करें।

Q3. क्या विजयादशमी पर बिना मुहूर्त देखे शुभ कार्य कर सकते हैं?

A: हाँ, विजयादशमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन विवाह को छोड़कर गृह प्रवेश, नया व्यापार, वाहन खरीदना या विद्या आरंभ जैसे कार्य बिना मुहूर्त देखे भी किए जा सकते हैं।

निष्कर्ष

दशहरा 2026 हमें फिर याद दिलाएगा कि अंधेरा चाहे कितना भी गहरा हो, एक दिया ही उसे हरा देता है। इस विजयादशमी 2026 पर अपने भीतर के रावण को पहचानें और अच्छाई का एक नया संकल्प लें। आपको और आपके परिवार को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

 

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