
धनतेरस 2026 शुक्रवार, 16 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन प्रदोष काल में धन्वंतरि पूजा की जाती है जो आरोग्य और समृद्धि के देवता हैं। त्रयोदशी तिथि 16 अक्टूबर शाम से 17 अक्टूबर दोपहर तक रहेगी, इसलिए खरीदारी और दीपदान का मुख्य मुहूर्त 16 अक्टूबर की शाम को है। अगर आप आरोग्य, धन की स्थिरता और परिवार की रक्षा चाहते हैं तो इस शाम का समय सबसे महत्वपूर्ण है।
धनतेरस 2026 कब है और धन्वंतरि पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को धनतेरस कहते हैं। 2026 में यह तिथि 16 अक्टूबर शुक्रवार को शाम 5:12 बजे शुरू होकर 17 अक्टूबर शनिवार को दोपहर 2:48 बजे तक रहेगी। उदया तिथि नहीं, बल्कि प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी मान्य होती है, इसलिए पर्व 16 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा।
धन्वंतरि पूजा के लिए सबसे उत्तम समय प्रदोष काल है, जब स्थिर लग्न वृषभ होता है।
| कार्य | मुहूर्त 2026 |
| धन्वंतरि पूजा और लक्ष्मी-कुबेर पूजन | शाम 6:08 से रात 8:15 तक |
| खरीदारी मुहूर्त | शाम 5:12 से रात 11:40 तक |
| यम दीपदान | शाम 6:30 के बाद, घर के बाहर दक्षिण दिशा में |
अक्सर लोग यह नहीं जानते कि धनतेरस पर अभिजीत मुहूर्त से अधिक महत्व प्रदोष काल और स्थिर लग्न को दिया जाता है। सोना-चांदी या बर्तन दोपहर में भी ले सकते हैं, पर उन्हें घर लाकर पूजा प्रदोष काल में ही करनी चाहिए।
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धन्वंतरि पूजा क्यों की जाती है? समुद्र मंथन की अधूरी समझी गई कथा
धन्वंतरि को आयुर्वेद के प्रवर्तक और विष्णु का अंशावतार माना जाता है। भागवत पुराण के अनुसार समुद्र मंथन से जब अमृत कलश लेकर धन्वंतरि प्रकट हुए, तब उनके एक हाथ में अमृत, दूसरे में आयुर्वेद ग्रंथ, तीसरे में जड़ी-बूटी और चौथे में शंख था। यह रूप केवल धन नहीं, बल्कि निरोगी जीवन का प्रतीक है।
यहाँ एक सूक्ष्म बात समझो। धनतेरस को लोग केवल धन त्रयोदशी समझते हैं, जबकि इसका मूल नाम धन्वंतरि त्रयोदशी है। धन शब्द धन्वंतरि से बना है। लक्ष्मी पूजन धनतेरस की रात गौण है, मुख्य देवता धन्वंतरि ही हैं। कुबेर और लक्ष्मी की पूजा उनके साथ इसलिए जुड़ी कि आरोग्य के बिना संपत्ति टिकती नहीं।
दूसरी बात, धन्वंतरि जयंती पर वैद्य समुदाय अपने औजारों और ग्रंथों की पूजा करता है। घर में भी इस दिन दवा, हल्दी, या तुलसी के पौधे की पूजा करना आरोग्य की प्रार्थना माना जाता है। केवल सोना खरीदना पूजा नहीं है।
तीसरी सूक्ष्म बात, धन्वंतरि की पूजा में पीले फूल और तुलसी दल का विशेष महत्व है क्योंकि धन्वंतरि विष्णु रूप हैं। कई घरों में गलती से केवल लाल फूल और कुंकुम से पूजा कर दी जाती है जो लक्ष्मी के लिए है, विष्णु रूप के लिए पीला चंदन और तुलसी अधिक उपयुक्त है।
धन्वंतरि पूजा विधि: घर पर सही क्रम क्या है?
घर पर धन्वंतरि पूजा को जटिल बनाने की जरूरत नहीं। शुद्धता और क्रम बना रहे तो थोड़े उपचार से भी फल मिलता है।
तैयारी
उत्तर-पूर्व कोने में चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएँ। धन्वंतरि का चित्र या विष्णु स्वरूप स्थापित करें। पास में एक छोटा कलश जल भरकर रखें और उसमें तुलसी दल डालें। धातु का बर्तन या सिक्का जो आज खरीदकर लाए हैं, उसे भी चौकी पर रखें, जमीन पर नहीं।
पूजन क्रम
- आचमन और संकल्प – हाथ में जल, अक्षत लेकर तिथि, नाम और आरोग्य की कामना बोलें।
- आवाहन – धन्वंतरये नमः कहते हुए फूल अक्षत चढ़ाएँ। मंत्र नहीं आता तो केवल प्रार्थना करें कि हे आरोग्य के देव, हमारे घर में वास करें।
- स्नान – चित्र को जल और पंचामृत से नहीं, केवल गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें। चित्र पर पंचामृत चढ़ाने से छपाई खराब होती है, यह आम गलती है।
- वस्त्र, चंदन, तुलसी – पीला चंदन, पीले फूल, तुलसी दल और अक्षत अर्पित करें।
- धातु पूजन – नए बर्तन या सिक्के पर केसर का टीका लगाएँ। यह लक्ष्मी का प्रतीक है जो धन्वंतरि के साथ आई है।
- प्रसाद और आरती – बताशा, पंचमेवा या खीर का भोग लगाएँ। घी का एक दीपक धन्वंतरि के सामने और एक यम के लिए अलग रखें।
पूजा के बाद परिवार के जो सदस्य अस्वस्थ रहते हों, उनके नाम से तुलसी मिश्रित जल का आचमन कराना बहुत शुभ माना जाता है।
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खरीदारी मुहूर्त 2026: धनतेरस पर क्या खरीदें और क्या न खरीदें?
शास्त्र में खरीदारी का अर्थ संचय नहीं, बल्कि शुभ धातु को घर में आह्वान करना है। इसलिए क्या खरीद रहे हैं, उससे अधिक महत्वपूर्ण है किस भाव से खरीद रहे हैं।
क्या खरीदना शुभ है
- सोना, चांदी या उनका कोई भी अंश – सिक्का, बिस्किट, आभूषण
- पीतल, तांबे या कांसे के बर्तन – स्टील को शास्त्रीय धातु नहीं माना जाता
- लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, कौड़ी, गोमती चक्र, नया झाड़ू, धनिया बीज, हल्दी की गांठ
- इलेक्ट्रॉनिक्स या वाहन लेना हो तो उसी दिन बुक करके पूजा अवश्य कर लें
क्या खरीदने से बचें
- कांच, एल्युमिनियम, प्लास्टिक की वस्तुएँ – इन्हें समृद्धि का प्रतीक नहीं मानते
- नुकीली वस्तुएँ जैसे चाकू, कैंची, सुई – इन्हें धन को काटने वाला मानते हैं
खाली बर्तन कभी घर न लाएँ। दुकान से लाते ही उसमें जल या चावल भर दें, फिर घर में प्रवेश कराएँ
एक अनुभव की बात। अक्सर लोग धनतेरस पर कर्ज लेकर सोना ले लेते हैं। शास्त्रीय दृष्टि से उधार लेकर की गई खरीदारी शुभ नहीं, क्योंकि वह स्थिरता नहीं लाती। सामर्थ्य के अनुसार चांदी का छोटा सिक्का भी उतना ही फलदायी है जितना बड़ा आभूषण, यदि उसे श्रद्धा से पूजा जाए।
खरीदारी मुहूर्त में एक और भेद है। शहर के शोर में लोग रात 11 बजे तक खरीदारी करते रहते हैं, पर उत्तम मुहूर्त प्रदोष काल तक ही है। देर रात किया गया क्रय केवल सुविधा है, पूजा का मुहूर्त नहीं।
धनतेरस पर दीपदान का रहस्य: यम दीपक कैसे जलाएँ?
धनतेरस की शाम को यमराज के लिए दीपदान किया जाता है। इसे यम दीपम भी कहते हैं। कथा है कि राजा हिम के पुत्र की मृत्यु टालने के लिए उसकी पत्नी ने घर के द्वार पर ढेर सारे दीप जलाकर यम को रोका था। तभी से अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए यह दीप जलाया जाता है।
यह दीप मुख्य पूजा का हिस्सा नहीं, बल्कि घर के बाहर का दीप है। इसे घर के अंदर पूजा स्थान पर न रखकर मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा में रखना चाहिए। दिशा का मुख दक्षिण हो, बाती दक्षिण की ओर निकली हो।
सबसे आम गलती – लोग यम दीपक में घी डाल देते हैं। यम के लिए सरसों के तेल का दीप मान्य है, घी का नहीं। घी का दीपक धन्वंतरि और लक्ष्मी के लिए जलता है, तेल का यम के लिए। दूसरा, यम दीपक एक ही जलाएँ, चार बाती वाला नहीं। उसमें थोड़ा काले तिल डालना भी कई परंपराओं में बताया गया है।
दीप जलाकर उसे वापस घर में न लाएँ, न बुझाएँ। वह रात भर जलता रहे तो उत्तम है। यदि हवा से बुझ जाए तो दोष नहीं। अगले दिन उस दीप के तेल को घर में उपयोग न करें, उसे पीपल के नीचे डाल दें।
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धनतेरस से दिवाली तक धन को स्थिर कैसे रखें?
पूजा एक दिन की है, पर उसका प्रभाव पूरे वर्ष चाहिए। इसके लिए तीन सरल नियम अपनाओ।
पहला, धनतेरस पर लाए गए धनिया बीज को दिवाली पूजन में लक्ष्मी के पास रखें और गोवर्धन पूजा के बाद उसे गमले या खेत में बो दें। अंकुर फूटना धन वृद्धि का संकेत माना जाता है।
दूसरा, इस दिन लाए गए झाड़ू को लक्ष्मी का प्रतीक मानो। उसे खड़ा करके न रखें, लिटाकर छुपाकर रखें और पैर न लगने दें। यह छोटी बात घर में लक्ष्मी की मर्यादा बनाए रखती है।
तीसरा, धनतेरस की रात उधार न दो, न लो। खाता-बही, पर्स या तिजोरी की सफाई पहले कर लो, उस रात हिसाब-किताब न करो। यह रात केवल आह्वान की है, गणना की नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. धनतयरस कब हौ 2026 मैं औ धनवंतरी पुजा किस दिन होगी?
A: धनतयरस औ धनवंतरी पुजा दोनों 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार कौ हौं। त्रयोदशी शाम कौ الشुरु होगी, इसलिये मुख्य पूजन, खरदीारी औ दीपदान इसी शाम प्रदोष काल में होंगे। 17 अक्टूबर को उदया तिथि में त्रयोदशी दोपहर तक रहेगी पर पर्व नहीं मनाया जाएगा।
Q2. धनवंतरी पुजा में किस मंत्र का जप करना चाहिए?
A: यदि संस्कृत मंत्र कठिन लगे तो सरल प्रार्थना करें – ॐ धनवंतरये नमः। जो लोग श्लोक जानते हैं वे – ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धनवंतरये अमृतकलश हस्तये सर्वभय विनाशाय सर्वरोग निवारणाय त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप श्री धनवंतरि स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः का जाप कर सकते हैं।
Q3. धनतयरस पर खरीदारी का सबसे शुभ समय क्या है?
A: 2026 में 16 अक्टूबर को शाम 5:12 के बाद से रात 8:15 तक स्थिर वृषभ लग्न में खरीदारी सबसे शुभ है। इस दौरान लाई गई धातु की उसी शाम पूजा भी कर लें तो खरीदारी पूर्ण मानती जाती है।
Q4. क्या धनतयरस पर स्टील के बर्तन खरीद सकते हैं?
A: व्यावहारिक रूप से आप खरीद सकते हैं, पर शास्त्रीय रूप से स्टील को शुभ धातु नहीं माना जाता। पीतल, तांबा, चांदी या कांसा अधिक शुभ है। यदि स्टील लेना ही हो तो उसी के साथ थोड़ा चावल या जल भरकर घर लाएँ और पूजा करें।
Q5. यम दीपदान घर के अंदर करना चाहिए या बाहर?
A: यम दीपदान हमेशा घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा में करना चाहिए。इसे पूजा घर में न रखें। सरसों के तेल का एक मुखी दीपक जलाएँ और रात भर जलने दें।





