बच्चों के आक्रमक व चिढ़चिढ़े होने के कारण, जानें इनमें कैसे करें सुधार

जमाना स्पर्धात्मक हो गया है। बच्चों को क्षमता से अधिक पढ़ाई और बचपन से ही करीयर का बोझ सहना पड़ रहा है। घर-परिवार से भी सतत पढ़ाई में ऊँचाई पर रहने का दबाव होता है । सतत् की परीक्षाओं से बच्चे थकावट महसूस करते हैं। निराशा भी एक कारण होता है। माता-पिता भी अपने-अपने कार्य में व्यस्त होने की वजह से बच्चों को समय देने में असमर्थ होते हैं, जिससे बच्चों की समस्याएँ समझने का समय ही नहीं निकाल पाते ।

बच्चों को प्यार की कमी महसूस होती है, असुरक्षा की भावना, अकेलापन महसूस होता है, जिसके परिणामस्वरूप बच्चे चिढ़चिढ़े होते हैं, चिल्लाने लगते हैं, कभी-कभी हाथ भी उठा देते हैं। ऐसे बच्चों को समय रहते ही संभाल लेना चाहिए ताकि उनके जीवन का संपूर्ण और सही विकास सही दिशा में हो पाए।

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बच्चों में चिड़चिड़ापन की वजहें :

1). बच्चों में आत्मसम्मान की कमी दिखाई देती है। हम कहीं कम हैं, होशियार नहीं हैं ऐसी भावनाएँ होती हैं। इस वजह से अपने आपको दूसरों की नजरों में आकर्षित करने हेतु आक्रमकता का सहारा लेते हैं। आत्मविश्वास की कमी को दूर करने हेतु सभी को अपने आसपास देखने की चाह में कुछ ऐसा करते हैं कि सभी का ध्यान उसकी तरफ रहें।

2). कुछ बच्चों का घर में या बाहर गलत उपयोग किया जाता है। उन्हें शारीरिक या मानसिक तकलीफें दी जाती है।

3). कुछ बच्चों के मित्र या परिवार के सदस्य आक्रमक होते हैं। उन्हें देखकर बच्चे उनका अनुकरण करते हैं।

4). बच्चों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई जाती हैं।

5). अलग-अलग कारणों की वजह से उन पर दबाव आता है, जिसे वे हिंसक तरीके से बाहर निकालते हैं।

6). आक्रमकता के पीछे कुछ मानसिक बीमारी होने की आशंका भी रह सकती है। इसलिए मनोवैज्ञानिक या समुपदेशक से संपर्क करें।

7). हार्मोनल असंतुलन इसकी एक वजह हो सकती है।

8). छोटे भाई या बहन के जन्म के कारण भी कुछ बच्चे असुरक्षितता महसूस करते हैं और सबका ध्यान आकर्षित करने के लिए आक्रमक बनते हैं।

9). नवयुवक, युवतियों में एक कारण यह भी हो सकता है कि उनका किसी से अफेअर टूट गया हो या कॉलेज-स्कूल में कोई उन्हें किसी कारण से चिढ़ाता या छेड़ता हो।

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बच्चों को कैसे सँभालें ? :

1). सबसे पहले अपने बच्चे को समझें, उनसे संवाद करें। बच्चों को नैतिकता के विषय में बताएँ। उनकी समस्याओं के विषय में पूछे, समझें और दूर करें। उन्हें विश्वास दिलाएँ कि आप उनकी हर समस्या का समाधान देंगे। उन्हें उनकी गलत आदतों के विषय में प्यार से समझाएँ। आपकी समझदारी आपके बच्चे को सही विकास की राह पर ले जाएगी।

2). बच्चों को कुछ चीजें समझाने के लिए पुस्तकें, टी. वी. आदि का भी आधार लें।

3). बच्चों में बचपन से ही जिम्मेदारी उठाने की आदतें डालें। प्रेम, आदर का उदाहरण प्रस्तुत करें। दूसरों की मदद करने की आदत डालें। यह सब धैर्य से होगा। बच्चे में गुणों को बढ़ाने के लिए आपको धैर्यशील बनना होगा। ऐसा नहीं कि आपने एक बार कहा और उसने तुरंत सुन लिया। बच्चे को इन बातों को समझने का समय दें, उन्हें प्रोत्साहन दें।

4). बच्चे प्रोत्साहन से आगे बढ़ते हैं। उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है। हर कार्य की सफलता के लिए आत्मविश्वास जरूरी होता है।

5). बच्चों को सही-गलत बातों के बारे में भी बताएँ । गलत बातों से दूर रहने को कहें, कुछ उदाहरण बताएँ, गलत बातों के परिणाम के विषय में भी जानकारी दें। अपने विचार उन पर थोपने से बेहतर है उनके मित्र बनकर उन्हें समझाएँ। उन्हें समझना भी जरूरी है। वे क्या सोचते हैं, क्यों ऐसा सोचते हैं यह आपको समझना होगा। इतना समय तो आपको भी देना जरूरी है कि आपके बच्चे की सोच क्या है, कहाँ तक है ?

6). बच्चों को केवल उपदेश देना काफी नहीं होता है। बच्चे अनुकरणप्रिय होते हैं। अपने माता-पिता, परिवार के सदस्यों को देखकर वे बहुत कुछ सीखते हैं इसलिए जो गुण आपको अपने बच्चों में विकसित करने हैं वह पहले अपने आपमें आत्मसात करें। एक बच्चे के परिवार में होने से परिवार के सभी को अत्यंत सावधानी से बरताव करना चाहिए। घर का वातावरण प्रेममय, प्रसन्न रखें। घर में झगड़ना टालें । यदि परिवार में मतभेद हो तो उसे समझदारी से सुलझाएँ, ना कि झगड़कर। आपकी बड़ी आवाज आपके बच्चे को विचलीत कर सकती है।

7). बच्चे बाहरी दुनिया में घुल मिल नहीं पाते, लोगों से, बाकी बच्चों से संपर्क नहीं कर पाते। यह भी बच्चों में आक्रमकता बढ़ाने का एक कारण हो सकता है। बच्चों में कुशलता विकसित करें। संभाषण, कुशलता बढ़ाएँ। बच्चों को लोगों में लेकर जाएँ, उनका परिचय बढ़ाने की कोशिश करें। कुछ बच्चे समाज में घुलते मिलते नहीं हैं लेकिन अपनी उपस्थिति में कोशिश कर सकते हैं।

8). अपने बच्चे में सकारात्मकता विकसित करें । हर पहलू में सकारात्मक सोच को कैसे चुनें, कैसे हर घटना, हर परिस्थिति में सकारात्मक रवैया, प्रतिक्रिया देनी चाहिए यह समझाएँ। आपका वर्तन वैसा ही हो । सकारात्मक सोच के लाभ बताएँ। सकारात्मकता निराशा को दूर करने का हथियार होता है।

9). बच्चों को सम्मान दें। उनकी सोच पर विचार करें। उन्हें छोटी-छोटी जिम्मेदारी देकर पूर्ण करने के लिए प्रोत्साहित करें।

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